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घोटाले में फंसा बिहार आईटीआई भवन का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:22 PM IST
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लैकफेड घोटाले में फंसा बिहार आईटीआई का भवन आज तक नहीं उबर सका। निर्माण कार्य नवंबर 2012 से लटका पड़ा है। भवन का निर्माण न हो पाने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। पढ़ाई के लिए वहां के बच्चे प्रतापगढ़ आईटीआई की कृपा के लिए मोहताज हो गए हैं।
आईटीआई बिहार का भवन निर्माण वर्ष 2012 में भिटारा में शुरू हुआ। निर्माण शुरू होने के बाद बिहार के बच्चों को उम्मीद जगी अब उन्हें प्रतापगढ़ आईटीआई की कृपा पर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। इस काम को पूरा करने के लिए शासन से करीब तीन करोड़ 58 लाख रुपये का बजट पास हुआ। निर्माण कार्य कराने के लिए लैकफेड नामक संस्था का चयन हुआ। काम शुरू ही हुआ था कि घपले का जिन्न बाहर आ गया। लैकफेड घपले का प्रकरण तूल पकड़ा तो जांच शुरू हो गई। बिहार आईटीआई का भवन निर्माण भी इसी के फेर में ठप हो गया। भवन पूरा न होने की वजह से बिहार आईटीआई के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने लगी। वहां के प्राचार्य ने प्रतापगढ़ आईटीआई से अपने यहां उन बच्चों को शिक्षा देने का पत्र लिखा। संस्था ने उस पत्र पर अनुमति प्रदान कर दी। विगत कई साल से वहां के बच्चे प्रतापगढ़ आईटीआई में पढ़ रहे हैं। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण यहां के शिक्षक उन पर ध्यान नहीं दे पा रहे।
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आईटीआई बिहार का भवन निर्माण वर्ष 2012 में भिटारा में शुरू हुआ। निर्माण शुरू होने के बाद बिहार के बच्चों को उम्मीद जगी अब उन्हें प्रतापगढ़ आईटीआई की कृपा पर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। इस काम को पूरा करने के लिए शासन से करीब तीन करोड़ 58 लाख रुपये का बजट पास हुआ। निर्माण कार्य कराने के लिए लैकफेड नामक संस्था का चयन हुआ। काम शुरू ही हुआ था कि घपले का जिन्न बाहर आ गया। लैकफेड घपले का प्रकरण तूल पकड़ा तो जांच शुरू हो गई। बिहार आईटीआई का भवन निर्माण भी इसी के फेर में ठप हो गया। भवन पूरा न होने की वजह से बिहार आईटीआई के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने लगी। वहां के प्राचार्य ने प्रतापगढ़ आईटीआई से अपने यहां उन बच्चों को शिक्षा देने का पत्र लिखा। संस्था ने उस पत्र पर अनुमति प्रदान कर दी। विगत कई साल से वहां के बच्चे प्रतापगढ़ आईटीआई में पढ़ रहे हैं। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण यहां के शिक्षक उन पर ध्यान नहीं दे पा रहे।
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