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प्रतापगढ़ नगर पालिका चुनाव : सियासत की मिली विरासत.. दूसरी पारी में छलके प्रेमलता की आंख से दर्द के आंसू

Thu, 19 Dec 2024 05:58 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Dec 2024 05:58 PM IST
सार

सदर बाजार के रहने वाले हरि प्रताप सिंह वर्ष 1995 में भाजपा से नगर पालिका चेयरमैन के चुनाव में उतरे। जीत मिलने के बाद उन्होंने अपने कार्यों व व्यवहार से लोगों का दिल जीत लिया। तब से वे लगातार चेयरमैन और एक बार सदर से विधायक भी चुने गए।

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Pratapgarh Municipality Election Inherited legacy of politics Tears of pain shed from Premlata's eyes
अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद छलके प्रेमलता सिंह के आंसू। - फोटो : संवाद।

विस्तार

नगर पालिका चेयरमैन की कुर्सी पर करीब तीन दशक से कब्जा जमाने वाले स्व. हरि प्रताप सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी जीत का सेहरा उनकी पत्नी प्रेमलता सिंह के सिर बंधा। सियासत की जीत में पति की फिर विरासत मिलते ही प्रेमलता की आंखों से आंसू छलक पड़ा। यह देख कुछ देर के लिए नारेबाजी बंद हो गई।

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सदर बाजार के रहने वाले हरि प्रताप सिंह वर्ष 1995 में भाजपा से नगर पालिका चेयरमैन के चुनाव में उतरे। जीत मिलने के बाद उन्होंने अपने कार्यों व व्यवहार से लोगों का दिल जीत लिया। तब से वे लगातार चेयरमैन और एक बार सदर से विधायक भी चुने गए।

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वर्ष 2012 में भाजपा ने टिकट काटा तो वह निर्दल ही मैदान में उतरकर जीत दर्ज की, हालांकि बाद में भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 में महिला सीट होने के नाते पत्नी प्रेमलता को भाजपा से टिकट दिलाया। शहर के मतदाताओं ने प्रेमलता को जीत दिलाई। वर्ष 2023 में सामान्य सीट पर हरि प्रताप सिंह पांचवीं बार चुनाव लड़े। करीब 12 हजार मतों से जीत भी हासिल की। मगर वह साल भर के भीतर ही जिंदगी की जंग हार गए। उनके निधन के बाद रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी प्रेमलता पर दांव लगाया।

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जीत का प्रमाण पत्र लेतीं नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रेमलता सिंह। - फोटो : संवाद।

पति के निधन से रिक्त हुई सीट पर चुनाव लड़ रही प्रेमलता के आंसुओं को मतदाताओं ने सहानुभूति के रूप में लिया। बृहस्पतिवार को चुनाव में जीत की खबर के साथ प्रमाणपत्र लेने के लिए बेटे विशाल सिंह व देवर बब्बू सिंह ने जीआईसी बुलाया। वाहन से उतरते ही समर्थक नारेबाजी करने लगे। यह देख भावुक हुईं नवनिर्वाचित प्रेमलता सिंह की आंखें डबडबा गईं।

आंखों से छलकते आंसुओं के साथ उनके कदम प्रमाणपत्र लेने के लिए बढ़ते रहे। पति की विरासत दूसरी बार संभालने वाली प्रेमलता ने भले ही जीत हासिल कर ली हो लेकिन पति के असमय साथ छोड़कर चले जाने का दुख साफ नजर आ रहा था।

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