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होटल को लेकर पुलिस-प्रशासन में ठनी रार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 23 Jan 2016 11:33 PM IST
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बाबागंज स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में तीन दिनों से साफ सफाई के साथ ही दर्जन भर मजदूर रंग-रोगन करने में जुटे हैं। जबकि फायरब्रिगेड के एफएसओ अबुल अब्बास हुसैन ने पहले ही भवन को जर्जर घोषित कर रखा है। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि होटल का भवन जर्जर होने की दशा में धराशाई हो सकता है। तीन दिन बाद होटल के प्रकरण को लेकर पुलिस और तहसील प्रशासन अपना-अपना राग अलाप रहे हैं। पुलिस होटल को लेकर बवाल की आशंका जताते हुए एसडीएम सदर को कार्रवाई के लिए पत्र भेज रही है।
तो एसडीएम की ओर से नगर कोतवाल को निर्देश दिया जा रहा है कि वह अपने स्तर से होटल में हो रहे कार्य को तत्काल बंद कराएं। शनिवार को सीओ सिटी मनीष मिश्रा ने नगर कोतवाल को निर्देशित किया यदि होटल में रंगरोगन के दौरान कोई अप्रिय वारदात होती है तो इस मामले की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। तहसील प्रशासन को साथ लेकर तत्काल कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर एफएसओ को भेजे पत्र में कहा है कि यदि भवन अगिभनकांड के बाद जर्जर हो चुका है तो उसमें फिर से हो रहे कार्यों को तत्काल रोक दिया जाए। अन्यथा की स्थिति में सारी जवाबदेही फायरब्रिगेड विभाग की होगी। पुलिस के बार-बार अनुरोध के बाद भी तहसील प्रशासन साथ नहीं खड़ा हो रहा है। ऐसे में दोनों ओर से प्रकरण को लेकर रार ठनी हुई है।
बाबागंज स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में दस लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई थी। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन में बैठे अधिकारियों के साथ ही जिले के आला अधिकारियों को तलब कर लिया था। उस समय सरकारी मशीनरी ने अपना दामन बचाने के लिए कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने के साथ ही पूर्व के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट भेजी थी।
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सीओ सिटी मनीष मिश्रा ने कहा कि होटल में हुए हादसे के बाद जांच में कई होटल और लाज को तहसील प्रशासन ने अमानक करार दिया था , ऐसे संस्थानों को ध्वस्त कराने के लिए एसडीएम सदर ने 16 जुलाई 2015 को निर्देश भी जारी किया था। लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे संस्थानों को ध्वस्त कराने के लिए कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया है कि वे पत्र भेजकर तहसील प्रशासन से ऐसे संस्थानों की सूची और समय मांगे। केवल तहसील के जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहें। हर स्तर पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल मौजूद मिलेगा।
होटल गोयल रेजीडेंसी के प्रकरण को लेकर व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जिलाधिकारी से मिला। उन्हें प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि होटल का संचालन नहीं होगा। ऐसा करने से पहले मानक को पूरा किया जाएगा।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह छाबड़ा, व्यापारी नेता श्रीकिशोर अग्रवाल, शिवशंकर सिंह भोले, अनुराग खंडेलवाल, उमाप्रकाश अग्रहरि, सुनील कुमार, अनिल गोयल, रेखा गोयल के अधिवक्ता अरविंद शुक्ला, विनय कुमार मिश्रा ने शनिवार को जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह से मुलाकात की। उन्हें प्रार्थना पत्र देते हुए होटल गोयल का संचालन न करने की बात बताई। कहा कि केवल साफ-सफाई कराई जा रही है। ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। घटना के बाद मैनेजर की गिरफ्तारी के चलते होटल बंद कर दिया गया था। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही व्यवसाय किया जाएगा। कुछ लोगों की साजिश से प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है।
नगर कोतवाल को शहर में अमानक संचालित होटल और लाजों के खिलाफ तीन दिन के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश एसडीएम सदर ने दिया है। पुलिस पर ही सारी जिम्मेदारी डाल दी है। जबकि जानकारों की मानें तो ऐसी कार्रवाई के दौरान मजिस्ट्रेट की मौजूदगी जरूरी होती है। उपजिलाधिकारी सदर जेपी मिश्रा ने नगर कोतवाल को भेजे पत्र में कहा है कि शहर में अमानक होटल व लाज संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश भी दिया जा चुका है। होटल गोयल रेजीडेंसी के प्रकरण को लेकर आख्या भेजी गई है। जो सरासर गलत है। जिस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए उस मामले में आख्या दी जा रही है। पूर्व में 16 जुलाई 2015 को उनके द्वारा अवैध निर्माणकर्ताओं के भवन निर्माण, होटल, लाज के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कोतवाली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि होटल गोयल रेजीडेंसी समेत अन्य होटलों व लाजों के खिलाफ तीन दिन के भीतर तत्काल कार्रवाई की जाए। अन्यथा की स्थिति में कोतवाली पुलिस जिम्मेदार होगी।
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तो एसडीएम की ओर से नगर कोतवाल को निर्देश दिया जा रहा है कि वह अपने स्तर से होटल में हो रहे कार्य को तत्काल बंद कराएं। शनिवार को सीओ सिटी मनीष मिश्रा ने नगर कोतवाल को निर्देशित किया यदि होटल में रंगरोगन के दौरान कोई अप्रिय वारदात होती है तो इस मामले की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। तहसील प्रशासन को साथ लेकर तत्काल कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर एफएसओ को भेजे पत्र में कहा है कि यदि भवन अगिभनकांड के बाद जर्जर हो चुका है तो उसमें फिर से हो रहे कार्यों को तत्काल रोक दिया जाए। अन्यथा की स्थिति में सारी जवाबदेही फायरब्रिगेड विभाग की होगी। पुलिस के बार-बार अनुरोध के बाद भी तहसील प्रशासन साथ नहीं खड़ा हो रहा है। ऐसे में दोनों ओर से प्रकरण को लेकर रार ठनी हुई है।
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बाबागंज स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में दस लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई थी। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन में बैठे अधिकारियों के साथ ही जिले के आला अधिकारियों को तलब कर लिया था। उस समय सरकारी मशीनरी ने अपना दामन बचाने के लिए कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने के साथ ही पूर्व के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट भेजी थी।
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सीओ सिटी मनीष मिश्रा ने कहा कि होटल में हुए हादसे के बाद जांच में कई होटल और लाज को तहसील प्रशासन ने अमानक करार दिया था , ऐसे संस्थानों को ध्वस्त कराने के लिए एसडीएम सदर ने 16 जुलाई 2015 को निर्देश भी जारी किया था। लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे संस्थानों को ध्वस्त कराने के लिए कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया है कि वे पत्र भेजकर तहसील प्रशासन से ऐसे संस्थानों की सूची और समय मांगे। केवल तहसील के जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहें। हर स्तर पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल मौजूद मिलेगा।
होटल गोयल रेजीडेंसी के प्रकरण को लेकर व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जिलाधिकारी से मिला। उन्हें प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि होटल का संचालन नहीं होगा। ऐसा करने से पहले मानक को पूरा किया जाएगा।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह छाबड़ा, व्यापारी नेता श्रीकिशोर अग्रवाल, शिवशंकर सिंह भोले, अनुराग खंडेलवाल, उमाप्रकाश अग्रहरि, सुनील कुमार, अनिल गोयल, रेखा गोयल के अधिवक्ता अरविंद शुक्ला, विनय कुमार मिश्रा ने शनिवार को जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह से मुलाकात की। उन्हें प्रार्थना पत्र देते हुए होटल गोयल का संचालन न करने की बात बताई। कहा कि केवल साफ-सफाई कराई जा रही है। ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। घटना के बाद मैनेजर की गिरफ्तारी के चलते होटल बंद कर दिया गया था। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही व्यवसाय किया जाएगा। कुछ लोगों की साजिश से प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है।
नगर कोतवाल को शहर में अमानक संचालित होटल और लाजों के खिलाफ तीन दिन के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश एसडीएम सदर ने दिया है। पुलिस पर ही सारी जिम्मेदारी डाल दी है। जबकि जानकारों की मानें तो ऐसी कार्रवाई के दौरान मजिस्ट्रेट की मौजूदगी जरूरी होती है। उपजिलाधिकारी सदर जेपी मिश्रा ने नगर कोतवाल को भेजे पत्र में कहा है कि शहर में अमानक होटल व लाज संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश भी दिया जा चुका है। होटल गोयल रेजीडेंसी के प्रकरण को लेकर आख्या भेजी गई है। जो सरासर गलत है। जिस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए उस मामले में आख्या दी जा रही है। पूर्व में 16 जुलाई 2015 को उनके द्वारा अवैध निर्माणकर्ताओं के भवन निर्माण, होटल, लाज के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कोतवाली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि होटल गोयल रेजीडेंसी समेत अन्य होटलों व लाजों के खिलाफ तीन दिन के भीतर तत्काल कार्रवाई की जाए। अन्यथा की स्थिति में कोतवाली पुलिस जिम्मेदार होगी।