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चेकडैम निर्माण में मिलावट का खेल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 16 Jan 2016 11:29 PM IST
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लघु सिंचाई विभाग से बनने वाले चेकडैम निर्माण में व्यापक स्तर पर खेल हो रहा है। बाहर से देखने में ठीकठाक लगने वाले चेकडैम के अंदर खामियां ही खामियां हैं। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी से चेकडैम के निर्माण में घटिया सामग्री की मिलावट की जा ररही है।
जिले के नदी और नालों से बहने वाले बरसात के पानी को रोककर किसानों के खेतों की सिंचाई के प्रयोग में लाने के लिए लघु सिंचाई विभाग जिले में चेकडैम का निर्माण करा रहा है।चालू वित्तीय वर्ष में विभाग से 31 और जिला योजना के तहत 18 चेकडैम का निर्माण होना है। लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्यों में खूब मनमानी बरत रहे हैं। एक चेकडैम के निर्र्माण में 36-40 लाख रुपये विभाग से मिलते हैं। ग्रामीणों की मानें तो बाहर से तो डैम ठीक है लेकिन अंदर से खोखला है क्योंकि इसको बनाने में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है। इतना ही नहीं कई जगह तो मानकों के विपरीत ही काम किया जा रहा है। शिवगढ़ विकास खंड के बुढ़ौरा गांव के केन्हुआ नाले पर और रामपट्टी में बने चेकडैम की दीवार की ऊंचाई इतनी कम है कि पानी उसके ऊपर से निकल जाता है।
इससे किसानों के लिए यह चेकडैम निरर्थक साबित हो रहा है। विभाग से मिलने वाली धनराशि का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदार जेब भरने में जुटे हुए हैं। विभाग से बनने वाले किस चेकडैम को कौन ठेकेदार बनाएगा, इसका फैसला इलाहाबाद में बैठे अफसर ही करते हैं। इसलिए जिले के अधिकारियों की अधिक जबाबदेही भी नहीं होती है। इससे वह भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय निरीक्षण का सिर्फ कागजी कोरम पूरा कर चलते बनते हैं। संडवा चंद्रिका के छतरपुर नाले पर बनने वाले चेकडैम में पीली ईंट और घटिया मसाले का प्रयोग जा रहा है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की, मगर कोई भी वास्तविकता देखने नहीं गया।
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जिले के नदी और नालों से बहने वाले बरसात के पानी को रोककर किसानों के खेतों की सिंचाई के प्रयोग में लाने के लिए लघु सिंचाई विभाग जिले में चेकडैम का निर्माण करा रहा है।चालू वित्तीय वर्ष में विभाग से 31 और जिला योजना के तहत 18 चेकडैम का निर्माण होना है। लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्यों में खूब मनमानी बरत रहे हैं। एक चेकडैम के निर्र्माण में 36-40 लाख रुपये विभाग से मिलते हैं। ग्रामीणों की मानें तो बाहर से तो डैम ठीक है लेकिन अंदर से खोखला है क्योंकि इसको बनाने में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है। इतना ही नहीं कई जगह तो मानकों के विपरीत ही काम किया जा रहा है। शिवगढ़ विकास खंड के बुढ़ौरा गांव के केन्हुआ नाले पर और रामपट्टी में बने चेकडैम की दीवार की ऊंचाई इतनी कम है कि पानी उसके ऊपर से निकल जाता है।
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इससे किसानों के लिए यह चेकडैम निरर्थक साबित हो रहा है। विभाग से मिलने वाली धनराशि का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदार जेब भरने में जुटे हुए हैं। विभाग से बनने वाले किस चेकडैम को कौन ठेकेदार बनाएगा, इसका फैसला इलाहाबाद में बैठे अफसर ही करते हैं। इसलिए जिले के अधिकारियों की अधिक जबाबदेही भी नहीं होती है। इससे वह भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय निरीक्षण का सिर्फ कागजी कोरम पूरा कर चलते बनते हैं। संडवा चंद्रिका के छतरपुर नाले पर बनने वाले चेकडैम में पीली ईंट और घटिया मसाले का प्रयोग जा रहा है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की, मगर कोई भी वास्तविकता देखने नहीं गया।
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