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Pratapgarh: जाल न पिंजरा, लाठी-डंडे लेकर खोज रहे तेंदुआ 

Thu, 28 May 2020 11:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 28 May 2020 11:56 PM IST
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Pratapgarh: Do not trap cage, search for leopard with sticks and sticks
तेंदुआ - फोटो : पेक्सेल्स
राजगढ़ में पांच जानवरों का शिकार कर चुके तेंदुए को दबोचने के लिए वन विभाग की टीम तीन दिनों से आधी-अधूरी तैयारियों के बीच कांबिंग कर रही है। टीम के पास न तो जाल है और न ही पिंजरा। राजगढ़ के जंगल व नदी के तराई इलाकों में लाठी-डंडे के सहारे ही टीम तेंदुए को खोज रही है।
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ऐसे में यदि टीम का तेंदुए से सामना हुआ तो उसे दबोचना तो दूर खुद को भी सुरक्षित करना मुश्किल होगा। हालांकि तीन दिनों से जंगल की खाक छान रही वन विभाग की टीम को अभी तक तेंदुए की लोकेशन नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर दहशत है। 
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राजगढ़ में तीन दिनों से तेंदुए की दस्तक से लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। तेंदुए ने अब तक पांच जानवरों को अपना शिकार बनाया है। 25 मई को  गांव में गोशाला में बंधे बछड़े को सबसे पहले उसने अपना शिकार बनाया। उसी दिन ही 2 कुत्ते व दो नीलगाय के बच्चों को पंजे से हमला कर मार डाला। पांच जानवरों के मांस के लोथडे़ मिलने के बाद गांव के लोग सिहर उठे।
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आनन-फानन में ग्राम प्रधान ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। डीएफओ के निर्देश पर वन विभाग की टीम रेंजर के नेतृत्व में राजगढ़ पहुंची। शिकार किए गए जानवरों को देखने के बाद टीम ने कांबिंग तो शुरू की मगर आधी- अधूरी तैयारियों के बीच। टीम के पास न जाल है और न ही पिंजरा। आमतौर पर जब भी तेंदुए की कांबिंग की जाती है तो ये दोनों ही उपकरण अहम होते हैं।

इन्हीं के सहारे तेंदुए को पकड़ा जाता है। दरअसल, जिस लोकेशन पर तेंदुए का अंदेशा हो जाता है, उसके आस-पास पिंजरा लगा दिया जाता है। पिंजरे में तेंदुए के मनपसंद मांस के लोथड़े भी रख दिए जाते है। तेंदुआ लालच में जैसे ही पिंजरे के पास पहुंचता है, वह उसी मेें फंस जाता है। इसके अलावा तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल की भी मदद ली जाती है।

मगर बिडंबना यह है कि राजगढ़ के जंगल में वन विभाग की टीम सिर्फ लाठी व डंडे के सहारे तेंदुए को काबू करने पहुंची है। लगातार तीन दिनों से तेंदुए को पकड़ने के लिए टीम जंगल की खाक छान रही है, मगर अभी तक तेंदुए की लोकेशन नहीं मिल सकी है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर दशहत कायम है।


वन रेंजर केके पांडेय ने बताया कि राजगढ़ में तेंदुए की पुष्टि नहीं हो सकी है। गांव में टीम को फुटप्रिंट तक नहीं मिले है। ग्रामीणों के बताए अनुसार टीम गांव पहुंची है। वहां कांबिंग कर रही है। जैसे ही तेंदुए की लोकेशन मिलती है, जाल व पिंजरा के साथ उसे दबोचने का प्रयास शुरू होगा।
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