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चुनावी घोषणा न साबित हो इंजीनियरिंग कालेज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:00 AM IST
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अखिलेश सरकार के सबसे बड़े अनुपूरक बजट में जिले में इंजीनियरिंग कालेज खोलने की घोषणा से यहां के लोगों में खुशी तो है, लेकिन सिर्फ एक करोड़ का बजट देने से सवाल भी खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि इंजीनियरिंग कालेज के लिए करीब 92 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। ऐसे में लोग चर्चा कर रहे हैं कि इंजीनियरिंग कालेज खोलने की घोषणा चुनावी झुनझुना न साबित हो जाए। हालांकि जिले में पहला इंजीनियरिंग कालेज लाने का दावा करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री और रानीगंज विधायक शिवाकांत ओझा आशंका को खारिज कर रहे हैं। जरूरत के मुताबिक सरकार धन उपलब्ध कराती रहेगी।
कैबिनेट मंत्री रहते हुए रानीगंज के विधायक शिवाकांत ओझा ने रानीगंज तहसील में राजकीय इंजीनियरिंग कालेज खोलने की मांग की थी। उस समय शासन ने यह शर्त रखी थी कि सरकार कालेज के लिए जमीन नहीं खरीदेगी। इसके लिए जमीन जिला प्रशासन को उपलब्ध करानी होगा। जमीन शहर से बहुत दूर नहीं होना चाहिए। जिला प्रशासन ने शिवसत गांव में ग्रामसभा की जमीन कालेज के लिए पुनर्ग्रहित की थी। इस बीच सांसद कुंवर हरिवंश सिंह के प्रयास से जिले में केंद्रीय विद्यालय खोलने की भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी, लेकिन इसके लिए जमीन नहीं मिल पा रही थी। शहर के आसपास काफी तलाश के बाद भी जमीन नहीं मिलने पर जिला प्रशासन इंजीनियंरिग कालेज के लिए प्रस्तावित 10 एकड़ जमीन केंद्रीय विद्यालय के लिए दे दी। हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शिवसत में ही चलाकपुर बाद फरोसान में 15 एकड़ के आसपास जमीन है। इसे इंजीनिरिंग कालेज के लिए पुन:गृहित कर लिया जाएगा।
जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने बताया कि अभी शासन से इस बारे में पत्र नहीं आया है। निर्देश आते ही प्रयास शुरू कर दिया जाएगा। वहीं अखिलेश सरकार के अनुपूरक बजट में बेल्हा में इंजीनियरिंग कालेज खोलने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा को भाजपाइयों और बसपाइयों ने हवा-हवाई बताया है। भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि अगर जिले में इंजीनियरिंग कालेज खुले तो इसका स्वागत है, लेकिन साढ़े चार साल तक अखिलेश को इसकी याद क्यों नहीं आई। चुनाव नजदीक आने पर फिर से लोगों को छलने का प्रयास शुरू कर दिया गया। सरकार जिले के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। बसपा जिलाध्यक्ष लालचंद्र गौतम ने भी इसे अखिलेश सरकार की चुनावी घोषणा बताया।
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कैबिनेट मंत्री रहते हुए रानीगंज के विधायक शिवाकांत ओझा ने रानीगंज तहसील में राजकीय इंजीनियरिंग कालेज खोलने की मांग की थी। उस समय शासन ने यह शर्त रखी थी कि सरकार कालेज के लिए जमीन नहीं खरीदेगी। इसके लिए जमीन जिला प्रशासन को उपलब्ध करानी होगा। जमीन शहर से बहुत दूर नहीं होना चाहिए। जिला प्रशासन ने शिवसत गांव में ग्रामसभा की जमीन कालेज के लिए पुनर्ग्रहित की थी। इस बीच सांसद कुंवर हरिवंश सिंह के प्रयास से जिले में केंद्रीय विद्यालय खोलने की भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी, लेकिन इसके लिए जमीन नहीं मिल पा रही थी। शहर के आसपास काफी तलाश के बाद भी जमीन नहीं मिलने पर जिला प्रशासन इंजीनियंरिग कालेज के लिए प्रस्तावित 10 एकड़ जमीन केंद्रीय विद्यालय के लिए दे दी। हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शिवसत में ही चलाकपुर बाद फरोसान में 15 एकड़ के आसपास जमीन है। इसे इंजीनिरिंग कालेज के लिए पुन:गृहित कर लिया जाएगा।
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जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने बताया कि अभी शासन से इस बारे में पत्र नहीं आया है। निर्देश आते ही प्रयास शुरू कर दिया जाएगा। वहीं अखिलेश सरकार के अनुपूरक बजट में बेल्हा में इंजीनियरिंग कालेज खोलने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा को भाजपाइयों और बसपाइयों ने हवा-हवाई बताया है। भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि अगर जिले में इंजीनियरिंग कालेज खुले तो इसका स्वागत है, लेकिन साढ़े चार साल तक अखिलेश को इसकी याद क्यों नहीं आई। चुनाव नजदीक आने पर फिर से लोगों को छलने का प्रयास शुरू कर दिया गया। सरकार जिले के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। बसपा जिलाध्यक्ष लालचंद्र गौतम ने भी इसे अखिलेश सरकार की चुनावी घोषणा बताया।
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