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एंबुलेंस संचालन में घपला, फर्जी भर्ती करा दिए 208 मरीज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:48 PM IST
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108 व 102 एंबुलेंस के संचालन में घपले का खुलासा हुआ है। करीब 208 लोगों को एंबुलेंस कर्मियों ने फर्जी तरीके से अपने रजिस्टर में भर्ती दिखा दिया है। जबकि मरीज अस्पताल नहीं पहुंचाए गए। इतना ही नहीं लगभग 118 लोगों के फोन करने के बाद भी चालक एंबुलेंस लेकर घंटेभर तक नहीं पहुंचे। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। उन्हें अस्पताल तक पहुंचने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
बताया जाता है कि 108 व 102 एंबुलेंस को संचालित करने वाली संस्था को प्रति केस करीब 48 सौ रुपये शासन की ओर से मिलते हैं। इसमें दूरी का निर्धारण नहीं होता है। यानी अस्पताल बीस किमी दूर हो या एक किमी भुगतान पूरा होता है। एंबुलेंस के कुछ चालकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि संस्था की ओर से चालकों पर अधिक से अधिक मरीजों को उनके घर से अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है। इससे भी वे परेशान रहते हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिसंबर 2016 से अब तक एंबुलेंस कर्मियों ने रजिस्टर में 208 ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवा दिया है जो बीमार ही नहीं थे। एंबुलेंस तो दूर वे निजी वाहन से भी सरकारी अस्पताल में नहीं गए हैं। अस्पताल में उनका कोई रिकार्ड भी नहीं मौजूद है। इतना ही नहीं 118 तीमारदारों की शिकायत है कि फोन पर एंबुलेंस की मांग करने के घंटों भी चालक एंबुलेंस लेकर नहीं पहुंचा। इससे उन्हें परेशान होना पड़ा। बेलखरनाथ में एक युवक की जहां एंबुलेंस के समय से न पहुंचने के कारण मौत हो गई थी, वहीं कुंडा में भी एक युवक ने दम तोड़ दिया। जबकि शासन का निर्देश है कि जानकारी मिलने पर ग्रामीणांचल में बीस तो शहर में 10 मिनट के अंदर एंबुलेंस मरीज के पास पहुंच जानी चाहिए। स्वास्थ्य सचिव ने सीएमओ को पत्र भेजकर सभी सीएचसी अधीक्षकों से जांच करवा कर रिपेार्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू हुई तो एंबुलेंस कर्मियों के खेल का खुलासा हो गया।
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बताया जाता है कि 108 व 102 एंबुलेंस को संचालित करने वाली संस्था को प्रति केस करीब 48 सौ रुपये शासन की ओर से मिलते हैं। इसमें दूरी का निर्धारण नहीं होता है। यानी अस्पताल बीस किमी दूर हो या एक किमी भुगतान पूरा होता है। एंबुलेंस के कुछ चालकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि संस्था की ओर से चालकों पर अधिक से अधिक मरीजों को उनके घर से अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है। इससे भी वे परेशान रहते हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिसंबर 2016 से अब तक एंबुलेंस कर्मियों ने रजिस्टर में 208 ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवा दिया है जो बीमार ही नहीं थे। एंबुलेंस तो दूर वे निजी वाहन से भी सरकारी अस्पताल में नहीं गए हैं। अस्पताल में उनका कोई रिकार्ड भी नहीं मौजूद है। इतना ही नहीं 118 तीमारदारों की शिकायत है कि फोन पर एंबुलेंस की मांग करने के घंटों भी चालक एंबुलेंस लेकर नहीं पहुंचा। इससे उन्हें परेशान होना पड़ा। बेलखरनाथ में एक युवक की जहां एंबुलेंस के समय से न पहुंचने के कारण मौत हो गई थी, वहीं कुंडा में भी एक युवक ने दम तोड़ दिया। जबकि शासन का निर्देश है कि जानकारी मिलने पर ग्रामीणांचल में बीस तो शहर में 10 मिनट के अंदर एंबुलेंस मरीज के पास पहुंच जानी चाहिए। स्वास्थ्य सचिव ने सीएमओ को पत्र भेजकर सभी सीएचसी अधीक्षकों से जांच करवा कर रिपेार्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू हुई तो एंबुलेंस कर्मियों के खेल का खुलासा हो गया।
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