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Pratapgarh News: रात में दर्द से कराह रहे मरीज, सो रहे डॉक्टर
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मेडिकल कॉलेज में भर्ती बुखार, डायरिया समेत अन्य बीमारियों के मरीजों की देखभाल करने में स्वास्थ्यकर्मी मनमानी कर रहे हैं। वहीं, रात में डॉक्टर भी विश्राम करने आवास पर चले जाते हैं। जिससे मरीजों को आपातकालीन स्थिति में दर्द से कराहना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के प्रत्येक वार्ड में एक जूनियर रेंजिडेंट (जेआर) की तैनाती होती है। मगर डॉक्टरों की संख्या कम होने के कारण मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी से लेकर सर्जिकल, आर्थो सर्जिकल, जनरल और चिल्ड्रेन वार्ड में रात में सीनियर रेंजिडेंट तो दूर जूनियर रेंजिडेंट तक नहीं रहते हैं।
वार्ड बॉय या फिर स्टाफ नर्स के भरोसे मरीजों का इलाज होता है। कुछ डॉक्टरों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि सुबह एक बार उन्हें छात्रों को पढ़ाने जाना पड़ता है। नौ बजे तक ओपीडी में बैठकर इलाज करना होता है। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी करने जाना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज के प्रत्येक वार्ड में एक जूनियर रेंजिडेंट (जेआर) की तैनाती होती है। मगर डॉक्टरों की संख्या कम होने के कारण मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी से लेकर सर्जिकल, आर्थो सर्जिकल, जनरल और चिल्ड्रेन वार्ड में रात में सीनियर रेंजिडेंट तो दूर जूनियर रेंजिडेंट तक नहीं रहते हैं।
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वार्ड बॉय या फिर स्टाफ नर्स के भरोसे मरीजों का इलाज होता है। कुछ डॉक्टरों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि सुबह एक बार उन्हें छात्रों को पढ़ाने जाना पड़ता है। नौ बजे तक ओपीडी में बैठकर इलाज करना होता है। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी करने जाना पड़ता है।
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