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तीन माह में 600 स्वस्थ्य मरीजों को कागज पर एंबुलेंस चालकों ने पहुंचाया अस्पताल
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जनपद में मरीज घोटाले का मामला सामने आया है। एंबुलेंस चालकों ने फेरे बढ़ाने के फर्जीवाड़े में तीन माह के भीतर 305 स्वस्थ लोगों को मरीज बना दिया। सुखपालनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के बीच एंबुलेंस से मरीजों को घर से अस्पताल में भर्ती कराने और उन्हें घर तक पहुंचाने का विवरण लॉग बुक में दर्ज किया गया है। सिर्फ एक पीएचसी की प्रारंभिक जांच में इस तरह का घोटाला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी हैरान हैं।
जिले के मरीजों को घर से अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 की 40 और 108 की 38 के साथ लाइफ सपोर्ट वाली (एलएस) की चार एंबुलेंस 24 घंटे सेवा के तहत उपलब्ध हैं। एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी शासन ने जीवीके कंपनी को दी है। एंबुलेंस सेवा नि:शुल्क है पर शासन की ओर से कंपनी को निर्धारित शुल्क दिया जाता है।
शासन से मरीजों को दी जा रही सहूलियत का फायदा उठाते हुए जीवीके कंपनी के जिम्मेदारों ने चालक व ईएमटी को ज्यादा से ज्यादा केस अस्पतालों व घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य दे रखा है। फरवरी से अप्रैल 2022 के बीच एंबुलेंस से मरीजों को घर व अस्पताल तक पहुंचाने का आंकड़ा शासन स्तर पर खटका तो मामले की जांच का निर्देश दिया गया।।
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शासन ने सीएमओ को प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट 15 दिन में तलब की है। सीएमओ ने सभी सीएचसी और पीएचसी अधीक्षक को जांच कर एंबुलेंस सेवा और मरीजों का आंकड़ा भेजने का निर्देश दिया। फरवरी से अप्रैल के बीच एंबुलेंस के फर्जी फेरे बढ़ाने की जांच शुरू हुई तो पता चला कि सुखपाल नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो 102 तो 108 की एक एंबुलेंस का संचालन हो रहा है।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के भीतर कुल 2170 मरीजों ने 102 व 108 एंबुलेंस सेवा ली। जांच के दौरान यह सच भी सामने आया कि उक्त अवधि में केवल 747 मरीजों ने एंबुलेंस सुविधा का लाभ लिया। एंबुलेंस चालक व ईएमटी द्वारा लॉग बुक में बीमार बनाकर दर्ज किए गए 305 लोगों ने एंबुलेंस सुविधा का लाभ लेने से इन्कार कर दिया। लोगों के मुताबिक वे न बीमार हुए, न ही अस्पताल गए।
मामले की जांच में 934 लोगों का फोन बंद मिला। 184 लोग ऐसे भी मिले हैं, जिन्होंने कॉल ही रिसीव नहीं की। इस रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी रिपोर्ट तैयार की है। एंबुलेंस कर्मियों ने स्वस्थ लोगों को बीमार बनाकर शासन को बड़ा चूना लगाया है।
हर माह मरीजों को अस्पताल लाकर भर्ती कराने और उन्हें घर तक पहुंचाने की रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ के माध्यम से शासन को भेजी जाती है। जांच उस समय भी की जा सकती है। यदि अब एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने वाले मना कर रहे हैं, तो गलत है। रोहित सिंह, प्रोग्राम मैनेजर 108 एंबुलेंस
अभी तो जांच प्रक्रिया चल रही है। एक पीएचसी की रिपोर्ट आई है। जिले भर के अन्य सीएचसी व पीएसची की रिपोर्ट आनी बाकी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। डॉ. जीएम शुक्ला, सीएमओ।
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जिले के मरीजों को घर से अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 की 40 और 108 की 38 के साथ लाइफ सपोर्ट वाली (एलएस) की चार एंबुलेंस 24 घंटे सेवा के तहत उपलब्ध हैं। एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी शासन ने जीवीके कंपनी को दी है। एंबुलेंस सेवा नि:शुल्क है पर शासन की ओर से कंपनी को निर्धारित शुल्क दिया जाता है।
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शासन से मरीजों को दी जा रही सहूलियत का फायदा उठाते हुए जीवीके कंपनी के जिम्मेदारों ने चालक व ईएमटी को ज्यादा से ज्यादा केस अस्पतालों व घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य दे रखा है। फरवरी से अप्रैल 2022 के बीच एंबुलेंस से मरीजों को घर व अस्पताल तक पहुंचाने का आंकड़ा शासन स्तर पर खटका तो मामले की जांच का निर्देश दिया गया।।
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शासन ने सीएमओ को प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट 15 दिन में तलब की है। सीएमओ ने सभी सीएचसी और पीएचसी अधीक्षक को जांच कर एंबुलेंस सेवा और मरीजों का आंकड़ा भेजने का निर्देश दिया। फरवरी से अप्रैल के बीच एंबुलेंस के फर्जी फेरे बढ़ाने की जांच शुरू हुई तो पता चला कि सुखपाल नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो 102 तो 108 की एक एंबुलेंस का संचालन हो रहा है।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के भीतर कुल 2170 मरीजों ने 102 व 108 एंबुलेंस सेवा ली। जांच के दौरान यह सच भी सामने आया कि उक्त अवधि में केवल 747 मरीजों ने एंबुलेंस सुविधा का लाभ लिया। एंबुलेंस चालक व ईएमटी द्वारा लॉग बुक में बीमार बनाकर दर्ज किए गए 305 लोगों ने एंबुलेंस सुविधा का लाभ लेने से इन्कार कर दिया। लोगों के मुताबिक वे न बीमार हुए, न ही अस्पताल गए।
मामले की जांच में 934 लोगों का फोन बंद मिला। 184 लोग ऐसे भी मिले हैं, जिन्होंने कॉल ही रिसीव नहीं की। इस रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी रिपोर्ट तैयार की है। एंबुलेंस कर्मियों ने स्वस्थ लोगों को बीमार बनाकर शासन को बड़ा चूना लगाया है।
हर माह मरीजों को अस्पताल लाकर भर्ती कराने और उन्हें घर तक पहुंचाने की रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ के माध्यम से शासन को भेजी जाती है। जांच उस समय भी की जा सकती है। यदि अब एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने वाले मना कर रहे हैं, तो गलत है। रोहित सिंह, प्रोग्राम मैनेजर 108 एंबुलेंस
अभी तो जांच प्रक्रिया चल रही है। एक पीएचसी की रिपोर्ट आई है। जिले भर के अन्य सीएचसी व पीएसची की रिपोर्ट आनी बाकी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। डॉ. जीएम शुक्ला, सीएमओ।