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एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त इलाज का दावा, दवा खरीदने में मरीजों का छूट रहा पसीना
Mon, 19 Jul 2021 12:56 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 12:56 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में इलाज कराना मरीजों को भारी पड़ रहा है। शासन की तरफ से भले ही एक रुपये की पर्ची पर उनका इलाज करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उन्हें बाहर से हजारों की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सादे पर्चे पर डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में इलाज की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्सरे, मॉडर्न पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड आदि की सुविधा है। इसी कारण जिलेभर के मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। रोजाना करीब एक हजार से 12 सौ मरीजों की ओपीडी होती है। हर दिन 15 से 20 मरीजों का ऑपरेशन होता है। 80 से 100 के करीब मरीजों को भर्ती किया जाता है। लेकिन मुफ्त इलाज का दावा सपना साबित हो रहा है।
मरीज एक रुपये का पर्चा कटवाकर जब चिकित्सक के पास इलाज कराने जाते हैं तो उन्हें सादे कागज पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं। जिसे खरीदने में मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। सामान्य उल्टी-दस्त आदि के मामले में भी चार से छह सौ रुपये की बाहर की दवाएं डॉक्टर लिख रहे हैं।
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इसके अलावा जिन मरीजों का ऑपरेशन होता है, उनसे करीब तीन से चार हजार रुपये के इंजेक्शन और दवाएं बाहर से खरीदवाई जाती हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज खुद को ठगा महसूस करते हैं।
दलाल भी लिखने लगे हैं कमीशन वाली महंगी दवाएं
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का आरोप है कि अस्पताल में दलालों की भरमार हो गई है। वे खुद को डॉक्टर से कम नहीं समझते हैं। मरीजों के पास राउंड लगाने के लिए 24 घंटे में चार बार जाते हैं। मरीजों को सादे कागज पर बाहर की दवाएं लिखकर दे देते हैं। मेडिकल कॉलेज के कई ईएमओ ने अस्पताल चौकी इंचार्ज से इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि इमरजेंसी से वार्ड तक दलालों का कब्जा है।
मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने और जांच करवाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सरकारी अस्पताल की जांच पर ही मरीजों का इलाज किया जाएगा। यदि चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं, मरीजों से जांच कराते हैं तो यह गलत है। पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दलालों को चिह्नित किया जा रहा है। डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस
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मेडिकल कॉलेज में इलाज की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्सरे, मॉडर्न पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड आदि की सुविधा है। इसी कारण जिलेभर के मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। रोजाना करीब एक हजार से 12 सौ मरीजों की ओपीडी होती है। हर दिन 15 से 20 मरीजों का ऑपरेशन होता है। 80 से 100 के करीब मरीजों को भर्ती किया जाता है। लेकिन मुफ्त इलाज का दावा सपना साबित हो रहा है।
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मरीज एक रुपये का पर्चा कटवाकर जब चिकित्सक के पास इलाज कराने जाते हैं तो उन्हें सादे कागज पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं। जिसे खरीदने में मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। सामान्य उल्टी-दस्त आदि के मामले में भी चार से छह सौ रुपये की बाहर की दवाएं डॉक्टर लिख रहे हैं।
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इसके अलावा जिन मरीजों का ऑपरेशन होता है, उनसे करीब तीन से चार हजार रुपये के इंजेक्शन और दवाएं बाहर से खरीदवाई जाती हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज खुद को ठगा महसूस करते हैं।
दलाल भी लिखने लगे हैं कमीशन वाली महंगी दवाएं
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का आरोप है कि अस्पताल में दलालों की भरमार हो गई है। वे खुद को डॉक्टर से कम नहीं समझते हैं। मरीजों के पास राउंड लगाने के लिए 24 घंटे में चार बार जाते हैं। मरीजों को सादे कागज पर बाहर की दवाएं लिखकर दे देते हैं। मेडिकल कॉलेज के कई ईएमओ ने अस्पताल चौकी इंचार्ज से इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि इमरजेंसी से वार्ड तक दलालों का कब्जा है।
मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने और जांच करवाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सरकारी अस्पताल की जांच पर ही मरीजों का इलाज किया जाएगा। यदि चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं, मरीजों से जांच कराते हैं तो यह गलत है। पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दलालों को चिह्नित किया जा रहा है। डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस