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ठिठुरे बंदी, फटे कंबलों में कट रही रात
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:33 AM IST
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जिला कारागार की 12 बैरकों में सर्द रातें बंदी जागकर गुजार रहें हैं। ठंड से बचने के लिए जेल प्रशासन ने बंदियों को पुराने व फटे कंबल दिए हैं। जिससे बंदियों की ठंड दूर नहीं हो रही है। क्षमता से अधिक बंदी जेल में निरुद्ध होने के नाते ही जेल प्रशासन के सामने समस्या खड़ी हो गई। जेल अधीक्षक ने जनपद के लोगों से बंदियों के लिए कंबल की मदद मांगी है।
कई दशक पूर्व बनी जेल में अभी भी पहले का नियम लागू हैं। उसी सापेक्ष शासन से सुविधाएं भी मिलती हैं। मौजूदा समय में जेल में 458 बंदियों को रखने की क्षमता है। बंदियों के लिए अस्पताल समेत 12 बैरकें हैं। महिला समेत कुल 704 बंदी निरुद्ध हैं। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंड और कोहरे से बैरकों में रात के समय सर्द हवाएं प्रवेश करती हैं। बैरकों की जाली पर प्लास्टिक लगाकर हवाओं को रोकने का भले जेल प्रशासन ने प्रयास किया लेकिन बंदियों को रात जागकर गुजारना पड़ रहा है। शासन से इस बार बंदियों के लिए कंबल नहीं मिल सके।
जेल सूत्रों की मानेें तो बंदियों को ठंड से बचाव के लिए जो कंबल दिए गए हैं। वह काफी पुराने व फटेहाल हैं। जिनसे बंदियों की ठंड दूर नहीं होती। पुराने व फटे होने के कारण बंदियों के लिए कंबल कम पड़ गए हैं। यह समस्या देखते हुए जेल प्रशासन ने जनपद के समाजसेवियों समेत अन्य लोगों से मदद मांगी है। ताकि आने वाली शीतलहरी व सर्दी से बंदियों को बचाने का जतन किया जा सके। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि जिस बंदी के परिजन रजाई या कंबल देना चाहते हैं वे दे सकते हैं। कोई भी बंदियों के लिए कंबल दान दे सकता है।
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कई दशक पूर्व बनी जेल में अभी भी पहले का नियम लागू हैं। उसी सापेक्ष शासन से सुविधाएं भी मिलती हैं। मौजूदा समय में जेल में 458 बंदियों को रखने की क्षमता है। बंदियों के लिए अस्पताल समेत 12 बैरकें हैं। महिला समेत कुल 704 बंदी निरुद्ध हैं। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंड और कोहरे से बैरकों में रात के समय सर्द हवाएं प्रवेश करती हैं। बैरकों की जाली पर प्लास्टिक लगाकर हवाओं को रोकने का भले जेल प्रशासन ने प्रयास किया लेकिन बंदियों को रात जागकर गुजारना पड़ रहा है। शासन से इस बार बंदियों के लिए कंबल नहीं मिल सके।
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जेल सूत्रों की मानेें तो बंदियों को ठंड से बचाव के लिए जो कंबल दिए गए हैं। वह काफी पुराने व फटेहाल हैं। जिनसे बंदियों की ठंड दूर नहीं होती। पुराने व फटे होने के कारण बंदियों के लिए कंबल कम पड़ गए हैं। यह समस्या देखते हुए जेल प्रशासन ने जनपद के समाजसेवियों समेत अन्य लोगों से मदद मांगी है। ताकि आने वाली शीतलहरी व सर्दी से बंदियों को बचाने का जतन किया जा सके। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि जिस बंदी के परिजन रजाई या कंबल देना चाहते हैं वे दे सकते हैं। कोई भी बंदियों के लिए कंबल दान दे सकता है।
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