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अब कार खरीदने वालों का तलब होगा ब्यौरा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:42 PM IST
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नोटबंदी के बाद चार पहिया वाहन खरीदकर कालाधन खपाने वाले भी आयकर के रडार पर है। खासकर ऐसे लोगों को विशेष तौर से चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने दो लाख रुपये से अधिक नकदी भुगतान कर वाहन खरीदे हैं। अगर जिले के बाहर से कहीं भी खरीद हुई है, तो रसीद में दर्ज पते के आधार पर ऐसे लोगों की खोज की जाएगी।
8 नवंबर की रात नोटबंदी के बाद कालाधन को ठिकाने लगाने के लिए आनन-फानन में चार पहिया वाहन खरीदकर भी बचने वाले नहीं हैं। जिले में ही नहीं इलाहाबाद और लखनऊ में लग्जरी कार खरीदने वालों की सूची आयकर विभाग ने तलब की है। खासकर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने दो लाख रुपये या इससे अधिक का नकद भुगतान करके वाहन खरीदे हैं। इन वाहनों में टेंपो, ऑटो, ट्रैक्टर, कार, बोलेरो, स्कार्पियो, सफारी गाड़ियां शामिल हैं। आयकर विभाग ने ऑटोमोबाइल्स शोरूमों को पत्र लिखकर ऐसे लोगों की सूची तलब की है। हालांकि अभी भी कालाधन को सफेद करने के लिए चार पहिया वाहनों की खरीद हो रही है। वैसे तो ऑटोमोबाइल्स के प्रबंधकों ने नोटिस चस्पा कर पुराने नोट नहीं चलने का दावा किया है, मगर पीछे के दरवाजे से कालाधन को सफेद करके मालामाल हो रहे हैं।
हालांकि नोटबंदी के बाद सबसे अधिक बिक्री कार की हुई है। जिले के शोरूम से अब तक 38 गाड़ियां बिक चुकी हैं। बताते हैं कि अधिकांश लोगों ने सावधानी बरतने के लिए इलाहाबाद, सुल्तानपुर और लखनऊ से भी गाड़ियां खरीदी हैं। निकट के जिलों से गाड़ियां खरीदने वाले लोग सिर्फ आयकर के झंझट से बचने के लिए यह सावधानी बरती है। जिला आयकर अधिकारी राजेश मिश्रा से बात करने का प्रयास किया गया, मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
8 नवंबर की रात नोटबंदी के बाद कालाधन को ठिकाने लगाने के लिए आनन-फानन में चार पहिया वाहन खरीदकर भी बचने वाले नहीं हैं। जिले में ही नहीं इलाहाबाद और लखनऊ में लग्जरी कार खरीदने वालों की सूची आयकर विभाग ने तलब की है। खासकर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने दो लाख रुपये या इससे अधिक का नकद भुगतान करके वाहन खरीदे हैं। इन वाहनों में टेंपो, ऑटो, ट्रैक्टर, कार, बोलेरो, स्कार्पियो, सफारी गाड़ियां शामिल हैं। आयकर विभाग ने ऑटोमोबाइल्स शोरूमों को पत्र लिखकर ऐसे लोगों की सूची तलब की है। हालांकि अभी भी कालाधन को सफेद करने के लिए चार पहिया वाहनों की खरीद हो रही है। वैसे तो ऑटोमोबाइल्स के प्रबंधकों ने नोटिस चस्पा कर पुराने नोट नहीं चलने का दावा किया है, मगर पीछे के दरवाजे से कालाधन को सफेद करके मालामाल हो रहे हैं।
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हालांकि नोटबंदी के बाद सबसे अधिक बिक्री कार की हुई है। जिले के शोरूम से अब तक 38 गाड़ियां बिक चुकी हैं। बताते हैं कि अधिकांश लोगों ने सावधानी बरतने के लिए इलाहाबाद, सुल्तानपुर और लखनऊ से भी गाड़ियां खरीदी हैं। निकट के जिलों से गाड़ियां खरीदने वाले लोग सिर्फ आयकर के झंझट से बचने के लिए यह सावधानी बरती है। जिला आयकर अधिकारी राजेश मिश्रा से बात करने का प्रयास किया गया, मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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