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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Not to dismiss grievances, fake reports being sent to government

शिकायतों का निस्तारण नहीं, शासन को भेजी जा रही फर्जी रिपोर्ट

Wed, 06 Jun 2018 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Wed, 06 Jun 2018 12:13 AM IST
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केस 1- आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र कस्त्रत्त्े नौरंगाबाद निवासी पूनम वर्मा पुत्री इंद्रपाल वर्मा कई बार अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे चुकी है। उसकी समस्या का निस्तारण नहीं हो रहा है। उसका भाई दो साल पहले गायब हो गया। जिस बस मालिक के पास उसका भाई है, पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। पूनम हर दिन अफसरों के चक्कर काट रही है। उसके प्रार्थनापत्र पर क्या कार्रवाई हुई, अफसर यह भी बताने के लिए तैयार नहीं हैं।  
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केस 2- मानधाता थाना क्षेत्र के रूपपुर निवासी अफसाना पत्नी लियाकत की भी पुलिस नहीं सुन रही है। गांव के कुछ लोगों ने 30 अक्तूबर 2017 को उसकी आबरू लूटने का प्रयास किया। बार-बार शिकायत के बाद भी पुलिस के न सुनने पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली है। कोर्ट के आदेश पर भी पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है। उसे टरकाया जा रहा है।  
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केस 3- सदर तहसील के बीर का पुरवा गांव निवासी हरिकेश प्रजापति बैनामे की जमीन की नाप कराने के लिए चार माह से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार उन्होंने जनता दर्शन में अफसरों को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उनकी जमीन की नाप नहीं कराई गई। उनके प्रार्थनापत्र को कूड़े में फेंक दिया गया।  
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केस 4- सदर तहसील के सरूआवां गांव निवासी रामबली की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। रामबली ने जमीन की नाप और अपना हिस्सा अलग कराने के लिए छह माह से अफसरों को जनता दर्शन में प्रार्थना पत्र दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। अंत में परेशान होकर एक जून से रामबली कचहरी में परिवार के साथ धरने पर बैठे हुए हैं।  
जनता दर्शन में जिले के अफसर हर दिन सैकड़ों लोगों की समस्याएं सुनने और उन्हें निस्तारित करने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। पीड़ित लोगों के प्रार्थना पत्र लेने के बाद अफसर उसे मातहतों के पास भेजते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। अपराध, जमीन, विवाद, मारपीट जैसी तमाम समस्याओं से जूझ रहे लोग छह-छह माह से अधिकारियों की चौखटू चूम रहे हैं। राजस्व और पुलिस के मामलों में बिना मौके पर गए ही समस्या के निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी जा रही है। शासन को भी कार्रवाई की फर्जी रिपोर्ट भेज दी जाती है।  
शासन की ओर से जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए हर दिन  सुबह दस से 12 तक जनता दर्शन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके अलावा तहसील से थानों तक समाधान दिवस का भी आयोजन होता है। हर दिन मुख्यालय पर जिलाधिकारी,  पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक से लेकर एसडीएम कार्यालय में पीड़ित अपनी फरियाद लेकर खड़े रहते हैं। थानों से लेकर पुलिस चौकी पर भी पीड़ित अपना दुखड़ा लेकर पहुंचते हैं, लेकिन उनका निस्तारण नहीं हो पाता। पुलिस कार्यालय में हर दिन लगभग 160 के करीब प्रार्थना पहुंचते हैं। जिसमे पुलिस अधीक्षक, एएसपी से लेकर डाक से भेजे गए प्रार्थना पत्र भी शामिल होते हैं। जिलाधिकारी कार्यालय में हर दिन लगभग 140 से अधिक प्रार्थना पत्र आते हैं। सभी प्रार्थना पत्रों को बकाएदे रजिस्टर पर दर्ज करने के बाद संबंधित थानों व तहसीलों पर निस्तारण के लिए भेजा जाता है। वहां से अधिकांश मामलों में बिना मौके पर गए और पीड़ितों की बातों को सुने ही मातहत निस्तारण की रिपोर्ट लगा देते हैं। कई बार विरोधी पक्ष के लोगों को गवाह के रूप में दर्शा दिया जाता है, जिससे कोई अधिकारी जानकारी लेना चाहे तो उसकी रिपोर्ट सत्य निकले। राजस्व विभाग के लेखपाल ऐसे ही समस्याओं का निराकरण कर देते हैं।  

90 फीसदी निस्तारण का दावा
जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचने वाले प्रार्थना पत्रों को रजिस्टर पर दर्ज करने के बाद संबंधित थानों और मातहतों के पास भेजा जाता है। इसके अलावा सभी प्रार्थना पत्रों को आईजीआरएस (जिला स्तर) पर फीड किया जाता है। निस्तारण रिपोर्ट आने के बाद प्रार्थना पत्रों की संख्या घटाई जाती है। दावा है कि 90 फीसदी मामलों का निस्तारण हो जाता है। केवल दस प्रतिशत शिकायतें ऐसी होती हैं जो राजस्व से संबंधित होती हैं। उन्हीं मामलों को लेकर निस्तारण नहीं हो पाता।

जिलाधिकारी को भीच गवुमराह करते हैं अफसर  
जिलाधिकारी के पास आने वाले शिकायती पत्रों को निस्तारण के लिए संबंधित तहसीलों में भेज दिया जाता है। वहां उपजिलाधिकारी और तहसीलदार को मामले का निस्तारण करना होता है। यह अफसर सबकुछ लेखपालों और ग्राम पंचायत अधिकारियों के हवाले कर देते हैं। यह कर्मचारी मौके पर गए बिना ही निस्तारण कर देते हैं। यही हाल एसपी के पास पहुंचने वाली शिकायतों का भी होता है।  


जनता दर्शन में आने वाले लोगों की शिकायतों का निस्तारण हर हाल में होना चाहिए। यह शासन की प्राथमिकता में है। लापरवाही करने वाले अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ  लगातार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। जनता की समस्याओं को न सुनने वाले अफसरों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।  
शंभु कुमार, जिलाधिकारी।
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