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खेत में दरारें, पीली पड़ने लगीं धान की पत्तियां
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 20 Aug 2017 11:41 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarh
लंबे समय से बरसात न होने के कारण धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। तेज धूप के कारण जहां खेतों में दरारें पड़ गई हैं वहीं धान की पत्तियां पीले पड़ने लगी हैं। पौधों का विकास पूरी तरह से रुक गया है। ऐसे में किसानों को अब फसल बर्बाद होने का डर सताने लगा है।
इस बार जून माह के अंतिम सप्ताह में मानसून ने दस्तक दी। शुरू में पखवारे भर तक झमाझम बरसात से लोगोें को गर्मी से काफी राहत मिली। खेतों में चहुंओर पानी ही पानी दिखने लगा। किसानों ने पूरे उमंग से धान की रोपाई की। मगर धान की रोपाई के बाद मौसम का मिजाज बदलने लगा। बारिश की झड़ी लगाने वाले काले बादल करीब 25 जुलाई से आसमान में महज उमड़-घुमड़ तक ही सीमित हैं। इधर अगस्त माह भी अपने अंतिम चरण की ओर है, मगर बादलों का मिजाज जस का तस बना हुआ है। करीब एक महीने से बारिश न होने से किसानों में मायूसी है। स्थिति यह है कि पानी के अभाव में धान की फसल खेतों में झुलसने लगी है। जिन खेतों मेें पानी का ठहराव नहीं हो पाता उन खेतों की फसल पर ज्यादा संकट है। किसान अब उनका इस्तेमाल मवेशियों के चारे के रूप में करना शुरू कर दिए हैं। फसलों की बर्बादी देख किसानों में हाहाकार मचा हुआ है।
खेतों में पानी के अभाव में सूखती फसलों को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। मेहनत और जमापूंजी लगाने के बाद फसलों पर मंडरा रहे संकट से किसान परेशान हैं। उन्हेें जितना बारिश न होने से दुख है उससे कहीं अधिक है बिजली की अघोषित कटौती और नहरों के संचालन में बरती जा रही अनियमितता को लेकर शिकायत।
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इस बार जून माह के अंतिम सप्ताह में मानसून ने दस्तक दी। शुरू में पखवारे भर तक झमाझम बरसात से लोगोें को गर्मी से काफी राहत मिली। खेतों में चहुंओर पानी ही पानी दिखने लगा। किसानों ने पूरे उमंग से धान की रोपाई की। मगर धान की रोपाई के बाद मौसम का मिजाज बदलने लगा। बारिश की झड़ी लगाने वाले काले बादल करीब 25 जुलाई से आसमान में महज उमड़-घुमड़ तक ही सीमित हैं। इधर अगस्त माह भी अपने अंतिम चरण की ओर है, मगर बादलों का मिजाज जस का तस बना हुआ है। करीब एक महीने से बारिश न होने से किसानों में मायूसी है। स्थिति यह है कि पानी के अभाव में धान की फसल खेतों में झुलसने लगी है। जिन खेतों मेें पानी का ठहराव नहीं हो पाता उन खेतों की फसल पर ज्यादा संकट है। किसान अब उनका इस्तेमाल मवेशियों के चारे के रूप में करना शुरू कर दिए हैं। फसलों की बर्बादी देख किसानों में हाहाकार मचा हुआ है।
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खेतों में पानी के अभाव में सूखती फसलों को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। मेहनत और जमापूंजी लगाने के बाद फसलों पर मंडरा रहे संकट से किसान परेशान हैं। उन्हेें जितना बारिश न होने से दुख है उससे कहीं अधिक है बिजली की अघोषित कटौती और नहरों के संचालन में बरती जा रही अनियमितता को लेकर शिकायत।
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