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किसके लिए है हौसला पोषण मिशन योजना

Wed, 14 Dec 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 14 Dec 2016 11:47 PM IST
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no prgress of hounsala posan yojna
कार्यक्रम में बच्चे - फोटो : अमर उजाला

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बेल्हा में हौसला पोषण मिशन योजना फ्लाप होती दिख रही है। शासन के लाख प्रयास के बाद भी अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। जबकि ऐसे बच्चों की सेहत सुधारने के लिए हौसला पोषण मिशन योजना संचालित की जा रही है। बच्चों के इलाज के दौरान उनकी मां को दोनों मीटिंग खाना के साथ 50 रुपये भी प्रतिदिन शासन की ओर से दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके लोग पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों का इलाज कराने नहीं आ रहे हैं।

शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने बीते दिनों दो दिनों तक वजन दिवस मनाया। इस दौरान 0 से 5 वर्ष तक के 3 लाख 25 हजार 29 सौ बच्चों का वजन किया गया। वजन के दौरान 31 हजार 836 बच्चे अतिकुपोषित मिले। 65047 बच्चों कुपोषित पाए गए। इसके बाद भी इन बच्चों को न तो इलाज शुरू हुआ और न ही इनकी देखभाल की जा रही है। जबकि बीते वर्ष 26 हजार अतिकुपोषित बच्चे पाए गए थे। इनमें से महज 144 बच्चों को ही जिला अस्पताल में बने पोषणपुर्नवास केन्द्र में भर्ती करके इलाज किया गया। बाकी बच्चों का हाल-चाल जानना भी स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने उचित नहीं समझा।
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आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा बहू और एएनएम पर ऐसे बच्चों के देखभाल की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी ने भी इन बच्चों की सेहत की तरफ ध्यान नहीं दिया। हौसला पोषण मिशन योजना के संचालन की जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम अधिकारी की है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के साथ अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों को भोजन के साथ ही देशी घी और फल रोजाना देने का आदेश शासन ने दिया है,मगर जिले में कहीं ऐसा नहीं हो रहा है। न तो गर्भवती महिलाओं को कुछ खाने को दिया जा रहा है और न ही कुपोषित बच्चों को।इसके चलते इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
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अस्पताल में भर्ती करवाने की जिम्मेदारी किसकी
जिला अस्पताल के एनआरसी सेंटर में कुपोषित बच्चों को भर्ती करवाने की किसकी जिम्मेदारी है, इसको लेकर भी कुछ स्पष्ट नहीं है। सीएमओ यूके पांडेय की मानी जाए तो चिह्नित बच्चों को भर्ती आंगनबाड़ी कार्यकत्री करवाती हैं। शासन की ओर से उन्हें प्रोत्साहन राशि मिलती है। आशा बहुओं को कुछ भी नहीं दिया जाता है। इस लिए उन पर दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। आंगनबाड़ी केंद्र संचालिका रोजाना इन बच्चों को देखती हैं। समय पर फल, देशी घी और दलिया वितरित करती हैं। भर्ती तो उन्हें ही करवाना चाहिए। उधर, डीपीओ संतोष श्रीवास्तव की मानी जाए तो चिह्नित कुपोषित बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ ही आशा बहू और एएनएम की होती है।
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