न सतरंगी झालर न लाइटिंग, नहीं निकाली गईं झांकियां, सिर्फ परंपरा का हुआ निर्वहन

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 27 Oct 2020 11:57 PM IST
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भरत मिलाप के लिए चौक घंटाघर को विद्युत लाइटों से सजाया गया।
भरत मिलाप के लिए चौक घंटाघर को विद्युत लाइटों से सजाया गया। - फोटो : PRATAPGARH

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कोरोना के संक्रमण के चलते इस बार ऐतिहासिक भरत मिलाप का कार्यक्रम फीका रहा। न सतरंगी झालर दिखे न लाइटिंग की गई। रातभर निकलने वाली झांकियां भी गायब थीं। शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। गलियां सूनी रहीं। शहरी अपने कामकाज में जुटे रहे। लोगों में किसी तरह का उल्लास नहीं दिखा। परंपरा बचाने के लिए सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई।
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दशहरा के दो दिन बाद होने वाले ऐतिहासिक भरत मिलाप में भारी भीड़ जुटती है। रातभर मेला चलता है। शहर में उल्लास का वातावरण रहता है। गलियां व चौराहे सतरंगी लाइट से जगमग हो उठते हैं। लाइटिंग का अद्भुत नजारा चौक की तरफ दिखता है। शाम होते ही शहर में भीड़ उमड़ने लगती है।
गैर जनपदों से भी लोग आते हैं। रात 9 बजे के बाद आकर्षक झाकियों एंव चौकियों का आगाज होता है। रातभर रामदल, हनुमान दल, भरत दल व लवकुश दलों के साथ चौकियों एवं झांकियों की लाइन लगी रहती है। भोर में घंटाघर में चारों दलों का मिलन होता है।
राम-लक्ष्मण, भरत- शत्रुघ्न सहित चारों भाइयों का मिलन का मार्मिक दृश्य देखने को मिलता है। मगर इस बार कोरोना ने पूरे कार्यक्रम पर पानी फेर दिया। भरत मिलाप कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर शहर में सन्नाटा पसरा रहा। गलियां सूनी रहीं। कहीं कोई उल्लास नहीं रहा।
मंगलवार को शहर का नजारा आम दिनों की तरह ही रहा। शाम को सन्नाटा पसर गया। न लाइटिंग की गई न चौकियां निकाली गईं। रामलीला समिति के अध्यक्ष श्यामशंकर सिंह व संरक्षक समाजसेवी रोशनलाल ऊमरवैश्य ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन के अनुरूप ही भरत मिलाप कार्यक्रम की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। इस बार झाकियों एवं चौकियों की कतार नहीं रहेगी। सिर्फ चार दल ही होंगे। भोर में घंटाघर पर अति सूक्ष्म कार्यक्रम होगा।
1990 में नहीं हो पाया था भरत मिलाप, एक महीने बाद निभाई गई थी परंपरा
अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही भरत मिलाप की यह परंपरा 1990 में पहली बार टूटी थी। भरत मिलाप के दिन आरएसएस व विहिप के संयोजकत्व में निकली रामदीप शोभायात्रा के दौरान जमकर बवाल हुआ था। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी स्थिति बेकाबू हो गई। आखिरकार श्रीरामलीला समिति के पदाधिकारियों को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।
माहौल शांत होने के करीब एक माह बाद सूक्ष्म तरीके भरत मिलाप की परंपरा निभाई गई थी। धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडेय व रामलीला समिति के अध्यक्ष श्यामशकर सिंह ने बताया कि माहौल शांत होने के एक महीने बाद परंपरा का निर्वहन किया गया था। अब कोरोना के चलते दूसरी बार ऐसा हो रहा है।
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