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पैसे लेकर भ्ाी 500 लोगों ने नहीं बनवाए शौचालय
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 15 Feb 2015 11:12 PM IST
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आधा अधूरा शौचालय बनवाने वाले करीब 500 लोगों पर गाज गिरना तय है। पात्रता सूची में शामिल इन लोगों को पैसा मिलने के बाद भी शौचालय का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ। सरकार की मंशा पर पानी फेरने वाले इन पात्रों को निर्माण पूरा न होने की लिखित वजह बतानी पड़ेगी। सारी रिपोर्ट डीपीआरओ के पास जमा होगी।
मंडलीय समीक्षा बैठक में शौचालयों की स्थिति बदतर पाई गई है। अफसरों ने पाया कि वित्तीय वर्ष 2013-2014 में करीब पांच सौ शौचालयों का पैसा पात्रों के खाते में एकमुश्त भेजा गया था। जिसमें से लगभग 500 लाभार्थियों के शौचालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका। अपूर्ण इन शौचालयों का निर्माण पूरा न होने से अफसरों ने नाराजगी जताई है।
कहा गया है कि यदि पैसा खाते में भेजा गया तो शौचालय निर्माण क्यों पूरा नहीं हुआ। पात्रों को इस सवाल का जवाब लिखित रूप से अधिकारियों की टेबल पर देना होगा। ऐसा न करने पर यह मान लिया जाएगा कि उन पात्रों ने पैसे का दुरुपयोग किया है। ऐसे में उन्हें शौचालय के लिए दी गई रकम की रिकवरी होगी। ग्राम पंचायत अधिकारी पर तो गाज गिरेगी ही प्रधान से भी सवाल जवाब होगा।
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विकास भवन पहुंची मंडलीय समीक्षा बैठक की रिपोर्ट में अपूर्ण शौचालयों की दशा का भी जिक्र किया गया है। इसमें से 200 शौचालय ऐसे हैं जिसमें आज तक छत नहीं पड़ सकी। 100 शौचालयों में दरवाजा आज तक नहीं लगा और पात्र उनका प्रयोग नहीं कर रहे। कहा गया है कि 150 शौचालयों की दीवार ही अपूर्ण है और 50 शौचालयों में सीट ही नहीं है।
जिले के बेसिक स्कूलों में भी शौचालयों का निर्माण हुआ है। डीएम अमृत त्रिपाठी ने यह निर्णय लिया है कि वे इन शौचालयों की जांच कराएंगे। जांच टीम यह देखेगी कि शौचालयों का प्रयोग स्कूलों के बच्चे कर रहे हैं अथवा नहीं। जिस स्कूल का शौचालय टूटा-फूटा या निष्प्रयोज्य पाया गया वहां के हेडमास्टर को जवाब देना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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मंडलीय समीक्षा बैठक में शौचालयों की स्थिति बदतर पाई गई है। अफसरों ने पाया कि वित्तीय वर्ष 2013-2014 में करीब पांच सौ शौचालयों का पैसा पात्रों के खाते में एकमुश्त भेजा गया था। जिसमें से लगभग 500 लाभार्थियों के शौचालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका। अपूर्ण इन शौचालयों का निर्माण पूरा न होने से अफसरों ने नाराजगी जताई है।
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कहा गया है कि यदि पैसा खाते में भेजा गया तो शौचालय निर्माण क्यों पूरा नहीं हुआ। पात्रों को इस सवाल का जवाब लिखित रूप से अधिकारियों की टेबल पर देना होगा। ऐसा न करने पर यह मान लिया जाएगा कि उन पात्रों ने पैसे का दुरुपयोग किया है। ऐसे में उन्हें शौचालय के लिए दी गई रकम की रिकवरी होगी। ग्राम पंचायत अधिकारी पर तो गाज गिरेगी ही प्रधान से भी सवाल जवाब होगा।
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विकास भवन पहुंची मंडलीय समीक्षा बैठक की रिपोर्ट में अपूर्ण शौचालयों की दशा का भी जिक्र किया गया है। इसमें से 200 शौचालय ऐसे हैं जिसमें आज तक छत नहीं पड़ सकी। 100 शौचालयों में दरवाजा आज तक नहीं लगा और पात्र उनका प्रयोग नहीं कर रहे। कहा गया है कि 150 शौचालयों की दीवार ही अपूर्ण है और 50 शौचालयों में सीट ही नहीं है।
जिले के बेसिक स्कूलों में भी शौचालयों का निर्माण हुआ है। डीएम अमृत त्रिपाठी ने यह निर्णय लिया है कि वे इन शौचालयों की जांच कराएंगे। जांच टीम यह देखेगी कि शौचालयों का प्रयोग स्कूलों के बच्चे कर रहे हैं अथवा नहीं। जिस स्कूल का शौचालय टूटा-फूटा या निष्प्रयोज्य पाया गया वहां के हेडमास्टर को जवाब देना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।