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खनन माफिया ने कमाई के लिए खोद डाली सई नदी, अफसर अंजान
Tue, 29 Dec 2020 01:17 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 01:17 AM IST
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रेलवे पुल के समीप सई घाट खनन माफियाओं द्वारा निकाली गयी रेत।
- फोटो : PRATAPGARH
जिले के कुछ लोग अपनी कमाई के लिए सई नदी के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रतिबंधों के बावजूद नदी का जलस्तर घटते ही शहर के इर्द गिर्द सई नदी में कई स्थानों पर खनन हो रहा है। बालू ट्रकों पर जेसीबी से लादकर अन्य जिलों में बिकने के लिए भेजी जाती है। प्रशासन की अनदेखी से सई नदी के बहाव पर ही खतरा मंडरा रहा है।
जनपद के लालगंज तहसील की सीमा में सई नदी प्रवेश करती हैै। इस नदी के तट पर अभी तक लोग खेती किसानी करते थे लेकिन अब मोटी कमाई के फेर में खनन माफिया मनमानी कर सई नदी के अस्तित्व को मिटाने पर उतर आए हैं।
गांवों की बात छोड़िए यहां तो शहर के करीब ही अवैध खनन का कार्य तेजी के साथ चल रहा है। जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय से दो किमी की दूरी पर बेल्हाघाट, कादीपुर, जिरियामऊ, खीरीबीर घाट में सई नदी बालू दिन रात निकाली जा रही है। बेखौफ लोग दिन में भी बालू निकालने का काम कर रहे हैं। जबकि सई नदी पर बने पुलों से होकर अफसर व कर्मचारी गुजरते रहते हैं।
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कोई अवैध खनन करने वालों पर डंडा चलाना तो दूर मौके पर जाना भी मुनासिब नहीं समझता। सोमवार को भी बेल्हाघाट, जिरियामऊ के करीब सई नदी के भीतर ट्रैक्टर ट्राली पर मजदूर बालू लाद रहे थे। नदी में बालू लादने वाले मजदूर कैमरे में फोटो कैद होते देख भागने लगे। सई नदी से बालू निकालने के बाद उसे सरपतों के झुरमुटों के बीच डंप करके रखा गया था। आसपास के लोगों के अनुसार अवैध खनन का यह खेल काफी दिनों से चल रहा है।
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जनपद के लालगंज तहसील की सीमा में सई नदी प्रवेश करती हैै। इस नदी के तट पर अभी तक लोग खेती किसानी करते थे लेकिन अब मोटी कमाई के फेर में खनन माफिया मनमानी कर सई नदी के अस्तित्व को मिटाने पर उतर आए हैं।
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गांवों की बात छोड़िए यहां तो शहर के करीब ही अवैध खनन का कार्य तेजी के साथ चल रहा है। जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय से दो किमी की दूरी पर बेल्हाघाट, कादीपुर, जिरियामऊ, खीरीबीर घाट में सई नदी बालू दिन रात निकाली जा रही है। बेखौफ लोग दिन में भी बालू निकालने का काम कर रहे हैं। जबकि सई नदी पर बने पुलों से होकर अफसर व कर्मचारी गुजरते रहते हैं।
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कोई अवैध खनन करने वालों पर डंडा चलाना तो दूर मौके पर जाना भी मुनासिब नहीं समझता। सोमवार को भी बेल्हाघाट, जिरियामऊ के करीब सई नदी के भीतर ट्रैक्टर ट्राली पर मजदूर बालू लाद रहे थे। नदी में बालू लादने वाले मजदूर कैमरे में फोटो कैद होते देख भागने लगे। सई नदी से बालू निकालने के बाद उसे सरपतों के झुरमुटों के बीच डंप करके रखा गया था। आसपास के लोगों के अनुसार अवैध खनन का यह खेल काफी दिनों से चल रहा है।
डंपिंग प्वाइंटों से जेसीबी लगाकर ट्रकों पर होती है बालू लोड
सई नदी की सफेद बालू बाहर घनफिट के हिसाब से बिकती है। दिन में कार्रवाई के डर से सूनसान स्थानों पर डंप की गई सफेद बालू रात के अंधेरे में ट्रकों पर जेसीबी से लोड की जाती है ताकि किसी को भनक न लग सके। आसपास के लोग दुश्मनी के डर से शिकायत भी नहीं करते।शहर के निर्माणाधीन मकानों में भी पहुंचाते हैं बालू
शहर में निर्माणाधीन मकानों में मिट्टी व बालू पहुंचाई जाती है। एक ट्रैक्टर मिट्टी व सफेद बालू की कीमत पांच से लेकर सात सौ रुपये तक होती है। मिट्टी व बालू के जरिए कमाई करने वाले लोग किसानों को संकट में डाल रहे हैं। रास्ता तो खराब करते ही हैं। उपजाऊ मिट्टी के कटान से बगल के खेतों में को नुकसान पहुंचाते हैं।
नगर कोतवाली के रेलवे पुल के समीप सई नदी से ट्रैक्टर पर रेत रखते मजदूर।- फोटो : PRATAPGARH