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अस्पताल में दवाएं खत्म, मरीजों की कट रही जेब

Sun, 11 Sep 2022 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2022 12:42 AM IST
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Medicines run out in hospital, patients' pockets are getting cut
Medicines run out in hospital, patients' pockets are getting cut
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में जरूरी दवाएं खत्म हो गई हैं। डॉक्टरों के दवाएं लिखने के बाद अस्पताल के काउंटर पर जाने वाले मरीजों को बैरंग लौटा दिया जा रहा है।
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डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में एंटीबायोटिक, बिकासूल, मेट्रोजिल, दर्द निवारक, ओमेज, अमोक्सिक्लेब समेत अन्य जरूरी दवाएं खत्म हो गई हैं। अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन भी नहीं है। ग्लूकोज की बोतल भी खत्म हो गई है।
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हर दिन अस्पताल में पांच सौ से अधिक की ओपीडी होती है। जांच के बाद डॉक्टरों के दवाएं लिखने पर जब मरीज दवा काउंटर पर जाते हैं तो उन्हें दवाएं न होने की बात कहकर लौटा दिया जा रहा है। मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। जिससे उनकी जेब कट रही है।
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पैसा नहीं है, घर जाकर लेंगे दवा
स्टेशन रोड निवासी सुशीला देवी के शरीर में दर्द हो रहा था। वह ओपीडी कक्ष संख्या 6 में पहुंचीं तो चिकित्सक ने पर्चे पर दवा लिख दी। साथ ही एक छोटी पर्ची और थमा दी, जिस पर बाहर की दवाएं लिखी थी। उन्होंने बताया कि वह इतने पैसा लेकर नहीं आई हैं। घर जाकर दवाएं लेंगी।
डॉक्टर छोटी पर्ची पर लिख रहे बाहर की दवाएं
मुंह में सूजन व बुखार से पीड़ित पट्टी के केशवराम के एक रुपये के पर्चे पर कुछ दवाएं लिख दी गईं। उन्होंने बताया कि जब वह डॉक्टर को दिखाकर उठने लगे तो उन्हें पर्ची थमाकर बाहर से दवा लेने के लिए कहा गया। मेडिकल स्टोर से दवाएं लेने में छह सौ रुपये खर्च हुए।
इसी तरह पट्टी की कुलपति देवी कान का इलाज कराने आई थीं। ईएनटी सर्जन को दिखाया। उन्होंने सभी दवाएं बाहर की लिख दीं। जगेशरगंज की अर्पिता अपनी नातिन व बेटी का इलाज कराने अस्पताल आई थीं। डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल में नहीं थीं। इस पर बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। इसके साथ ही एक छोटी पर्ची लिखकर थमा दी गई।

अस्पताल में कुछ दवाओं की कमी है। शासन को बजट के लिए पत्र भेजा गया है। जो दवाएं उपलब्ध हैं, चिकित्सक मरीजों के पर्चे पर लिख रहे हैं। डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस
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