{"_id":"665a169bb81aca86cf0da67f","slug":"medical-colleges-blood-bank-is-suffering-from-blood-shortage-pratapgarh-news-c-262-1-ptp1003-117970-2024-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: खून की कमी से जूझ रहा मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: खून की कमी से जूझ रहा मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में स्थित ब्लडबैंक में खून की कमी हो गई है। तीन सौ यूनिट वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 93 यूनिट रक्त बचा है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
तपन भरी गर्मी के चलते रक्तदाता रक्तदान करने से कतरा रहे हैं। जिनको खून की जरूरत भी पड़ रही है वे बगैर ब्लड डोनेट किए रक्त लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंच रहे हैं। इसी का खामियाजा है कि मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक खून की कमी से जूझ रहा है। तीन सौ यूनिट के बजाए महज 93 यूनिट ही खून बचा है। जबकि हर दिन दस से अधिक मरीज ब्लड लेने ब्लड बैंक आते हैं। खून की कमी से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को नहीं दिया जाता खून
खून की कमी के चलते निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को खून नहीं दिया जाता है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ता है। प्रयागराज या फिर सुलतानपुर का चक्कर काटना पड़ता है। सीएमएस डॉ. सौभाग्य प्रकाश ने कहा कि रक्तदान शिविरों से ब्लड इकट्ठा किया जाता है, लेकिन तमाम ऐसे लोग भी हैं जो खुद अपने परिवार के सदस्यों के लिए एक यूनिट अपना रक्त नहीं दे सकते हैं। ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं और रक्त की मांग करने लगते हैं। शासन का आदेश है कि यदि प्रसव पीड़िताओं को खून की जरूरत पड़े तो उन्हें बगैर डोनर के ही रक्त मुहैया कराया जाए। ऐसे में लोग इसका फायदा उठाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
तपन भरी गर्मी के चलते रक्तदाता रक्तदान करने से कतरा रहे हैं। जिनको खून की जरूरत भी पड़ रही है वे बगैर ब्लड डोनेट किए रक्त लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंच रहे हैं। इसी का खामियाजा है कि मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक खून की कमी से जूझ रहा है। तीन सौ यूनिट के बजाए महज 93 यूनिट ही खून बचा है। जबकि हर दिन दस से अधिक मरीज ब्लड लेने ब्लड बैंक आते हैं। खून की कमी से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
विज्ञापन
निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को नहीं दिया जाता खून
खून की कमी के चलते निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को खून नहीं दिया जाता है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ता है। प्रयागराज या फिर सुलतानपुर का चक्कर काटना पड़ता है। सीएमएस डॉ. सौभाग्य प्रकाश ने कहा कि रक्तदान शिविरों से ब्लड इकट्ठा किया जाता है, लेकिन तमाम ऐसे लोग भी हैं जो खुद अपने परिवार के सदस्यों के लिए एक यूनिट अपना रक्त नहीं दे सकते हैं। ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं और रक्त की मांग करने लगते हैं। शासन का आदेश है कि यदि प्रसव पीड़िताओं को खून की जरूरत पड़े तो उन्हें बगैर डोनर के ही रक्त मुहैया कराया जाए। ऐसे में लोग इसका फायदा उठाते हैं।
विज्ञापन