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लालगंज पुलिस के बचाव में उतरे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:42 PM IST
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कंट्रोलरूम को फोनकर लालगंज कोतवाली में बम होने की फर्जी सूचना देने के मामले में दो मासूम बच्चों को पांच घंटे तक कोतवाली में बैठाने की घटना में अफसर पुलिस के बचाव मे उतर आए हैं। एसपी शगुन गौतम ने बताया कि बच्चों को पुलिस नहीं बल्कि बुजुर्ग लेकर आया था। दस मिनट बाद ही उन्हें छोड़ दिया गया। एएसपी पश्चिमी और सीओ लालगंज मामले से कन्नी काटते रहते। उधर, पांच घंटे तक कोतवाली में रखे जाने के बाद से बच्चे बेहद सहमे हुए हैं। दोनाें घराें में दुबके हुए हैं। दूसरे दिन भी दोनों पुलिस के खौफ से उबर नहीं सके । पुलिस दूसरे दिन भी यह नहीं पता कर सकी कि कंट्रोल में झूठी सूचना देने वाले कौन थे।
लालगंज कोतवाली में बम रखे जाने की सूचना पर शनिवार को पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सौ नंबर पर कॉल कर बम की सूचना देने वाले ने खुद को अखिलेश यादव बताया था। पुलिस ने आननफानन में सौ नंबर के कंट्रोल रूम से बम की सूचना देने वाले का मोबाइल नंबर मांगा। पुलिस को जो नंबर उपलब्ध कराया गया वह लालगंज कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर अमावंा के रहने वाले रिटायर्ड दूरसंचार कर्मी रामनेवल शुक्ल का निकला। पुलिस उनके घर पहुंची और रामनेवल समेत दो मासूम बच्चे अनुभव व वैभव को लेकर कोतवाली आ गई। यहां पांच घंटे तक दोनाें मासूमाें को पूछताछ के नाम पर हिरासत में रखा गया। मोबाइल की डिटेल खंगालने व कस्टमर केयर से इस बात की पुष्टि होने पर कि इस नंबर से सौ नंबर पर फोन नहीं किया गया, बच्चों को देर शाम घर जाने दिया गया। कोतवाली की हवा खाने के बाद रात में दोनाें मासूम घर पहुंचे तो उनके चेहरे पर पुलिस का खौफ साफ दिखाई दिया। बताया जाता है कि परिजनाें ने खाना खिलाने के बाद उनको सोने के लिए कमरे में भेजा, लेकिन रातभर दोनाें ठीक से सो नहीं सके। वहीं पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों में आक्रोश था। लोग चर्चा करते रहे कि पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी तो जिसके नाम सिम का कनेक्शन था और जो मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था उसे दबोचती। नौनिहालों का क्या कसूर था, जो पांच घंटे कोतवाली की हवा खिला दी। वहीं दूसरे दिन दोनाें मासूमाें के भीतर पुलिस का खौफ छाया रहा। आसपास के बच्चे खेलने के लिए अनुभव व वैभव को बुलाने भी आए, लेकिन वह घराें में दुबके रहे। उनको भय सता रहा था कि कहीं पुलिस दोबारा उनको पकड़ने न आए। ग्रामीणाें ने उनका हौसला भी बढ़ाया, लेकिन दोनाें के भीतर घुसा पुलिस का डर खत्म नहीं हो सका। उधर बम की सूचना देने वाले तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके हैं। छानबीन के नाम पर पुलिस की जांच एक कदम भी आग नहीं बढ़ सकी है। अफसर भी मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। उनकी चुप्पी से साफ दिख रहा है कि मासूमाें को हिरासत में लेने के मामले में पुलिस बैक फुट पर है। सीओ रमाकांत यादव ने बताया कि वह बकरीद के चलते पूरे दिन क्षेत्र भ्रमण पर थे। मासूमाें को कोतवाली लाए जाने की बाबत पुलिस से पूछताछ की जाएगी। जरूरी हुआ तो मामले की तह तक जाने के लिए जांच भी कराई जाएगी। उधर, एएसपी पश्चिमी बसंतलाल ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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लालगंज कोतवाली में बम रखे जाने की सूचना पर शनिवार को पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सौ नंबर पर कॉल कर बम की सूचना देने वाले ने खुद को अखिलेश यादव बताया था। पुलिस ने आननफानन में सौ नंबर के कंट्रोल रूम से बम की सूचना देने वाले का मोबाइल नंबर मांगा। पुलिस को जो नंबर उपलब्ध कराया गया वह लालगंज कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर अमावंा के रहने वाले रिटायर्ड दूरसंचार कर्मी रामनेवल शुक्ल का निकला। पुलिस उनके घर पहुंची और रामनेवल समेत दो मासूम बच्चे अनुभव व वैभव को लेकर कोतवाली आ गई। यहां पांच घंटे तक दोनाें मासूमाें को पूछताछ के नाम पर हिरासत में रखा गया। मोबाइल की डिटेल खंगालने व कस्टमर केयर से इस बात की पुष्टि होने पर कि इस नंबर से सौ नंबर पर फोन नहीं किया गया, बच्चों को देर शाम घर जाने दिया गया। कोतवाली की हवा खाने के बाद रात में दोनाें मासूम घर पहुंचे तो उनके चेहरे पर पुलिस का खौफ साफ दिखाई दिया। बताया जाता है कि परिजनाें ने खाना खिलाने के बाद उनको सोने के लिए कमरे में भेजा, लेकिन रातभर दोनाें ठीक से सो नहीं सके। वहीं पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों में आक्रोश था। लोग चर्चा करते रहे कि पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी तो जिसके नाम सिम का कनेक्शन था और जो मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था उसे दबोचती। नौनिहालों का क्या कसूर था, जो पांच घंटे कोतवाली की हवा खिला दी। वहीं दूसरे दिन दोनाें मासूमाें के भीतर पुलिस का खौफ छाया रहा। आसपास के बच्चे खेलने के लिए अनुभव व वैभव को बुलाने भी आए, लेकिन वह घराें में दुबके रहे। उनको भय सता रहा था कि कहीं पुलिस दोबारा उनको पकड़ने न आए। ग्रामीणाें ने उनका हौसला भी बढ़ाया, लेकिन दोनाें के भीतर घुसा पुलिस का डर खत्म नहीं हो सका। उधर बम की सूचना देने वाले तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके हैं। छानबीन के नाम पर पुलिस की जांच एक कदम भी आग नहीं बढ़ सकी है। अफसर भी मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। उनकी चुप्पी से साफ दिख रहा है कि मासूमाें को हिरासत में लेने के मामले में पुलिस बैक फुट पर है। सीओ रमाकांत यादव ने बताया कि वह बकरीद के चलते पूरे दिन क्षेत्र भ्रमण पर थे। मासूमाें को कोतवाली लाए जाने की बाबत पुलिस से पूछताछ की जाएगी। जरूरी हुआ तो मामले की तह तक जाने के लिए जांच भी कराई जाएगी। उधर, एएसपी पश्चिमी बसंतलाल ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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