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बिना ऋण लिए ही सैकड़ों लोगों को बना दिया कर्जदार

Wed, 28 Jun 2017 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Wed, 28 Jun 2017 12:15 AM IST
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matter of aahar behar & dewari village
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ - फोटो : pratapgarah
आहर बीहर और देवरी गांव के सैकड़ों लोगों को बिना ऋण लिए ही सहकारी बैंक ने कर्जदार बना दिया। जिनमें कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जब उनके घर वालों को पता चला तो उनके पांव तले जमीन खिसक गई। लोगों का मानना है कि सहकारी बैंक में लाखों रुपये का घपला उनके नाम पर  किया गया है। उच्च स्तरीय जांच कराए जाने पर कई लोगों की गर्दन फंस सकती है। मामले की जानकारी होने पर तमाम किसान सहकारी समिति एवं सहकारी बैंक का चक्कर लगा रहे हैं।  
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सांगीपुर सहकारी बैंक से जुड़ी सहकारी समिति दलापट्टी है। दलापट्टीह समिति से आहर बीहर और देवरी गांव जुड़े हैं। शुक्रवार को समिति से जुड़ा मदार नाम का एक कर्मचारी आहर बीहर के बेचू सिंह के यहां आया और आधार कार्ड की मांग करने लगा। वजह पूछने पर बताया गया कि समिति में लगना है। बाद में उसने गांव के बजरंग बहादुर सिंह, हरिश्चंद्र तिवारी, अखिलानंद, सोभई, रामसमुझ, रामधनी, जमुना आदि लोगों के घर जाकर आधार कार्ड की मांग की। उधर, देवरी गांव के रमाशंकर व छोटई सिंह का कहना है कि उनके नाम भी फर्जी ऋण दिखा कर उन्हे कर्जदार बना दिया गया। गांव के लोगों ने जब पूछताछ की तो पता चला कि समिति से उन लोगों के नाम कर्ज लिया गया है। कर्जमाफी की योजना का लाभ उठाने के लिए आधारकार्ड लगाना आवश्यक है। जब कर्ज की जानकारी हुई तो कई लोग सांगीपुर स्थित सहकारी बैंक पहुंच गए। सहकारी बैंक से बकाएदारों की सूची निकलवाई गई तो सैकड़ों लोगों के नाम सामने आए। कर्ज की बात सुनकर तमाम लोग तिलमिलाए गए। ग्रामीणों ने इसकी उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
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सोमवार को क्षेत्र भ्रमण पर आए राज्यसभा संासद प्रमोद तिवारी को अठेहा बाजार में लोगों ने धोखाधड़ी की जानकारी दी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रमोद तिवारी ने सहायक निबंधक सहकारी समिति से मामले की जांच कर किसानों के साथ न्याय करने का निर्देश दिया। इस संदर्भ में सहायक विकास अधिकारी सहकारिता रामसुमन सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। ऋण का मामला बैंक और समिति के बीच का होता है। उनसे कोई मतलब नहीं। जिन किसानों के नाम गलत तरीके से ऋण दिखाया जा रहा है, उन लोगों को शाखा प्रबंधक से शिकायत करनी चाहिए। सहकारी बैंक से ऋण लेने वालों की जो सूची गांव वालों को दी गई है, उसमें किसी का तीन हजार तो किसी का चार हजार ऋण दिखाया गया है। कर्ज वर्ष 2009 के बाद का है। जानकारों का कहना है कि यूपीए सरकार ने वर्ष 2007 में किसानों का कर्ज माफ किया था। तो 2009 मे क र्ज लेने का कोई मतलब नहीं। आहर बीहर गांव निवासी व भाजपा के पूर्व जिलाउपाध्यक्ष डा. काशीधर द्विवेदी व पूर्व प्रधान भानू प्रताप सिंह समेत कई लोगों ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की ह
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