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मनरेगा के दस्तावेज मिले
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 06 Jan 2015 10:51 PM IST
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शिवगढ़ ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों से गायब मनरेगा कार्यों के सालों पुराने दस्तावेज ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों ने रातोंरात खोज लिया। बीडीओ उमा गुप्ता का दावा है कि उन लोगों ने सारे अभिलेख उपलब्ध करा दिए हैं। इसलिए उन्होंने रानीगंज थाने में दी गई तहरीर वापस ले लीं। उनकी यह बात किसी के गले नहीं उतर रहीं। लोग मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं।
जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के करोड़ों रुपए से विकास कार्य कराए गए हैं। सरकार को खबर मिली की कई जनपदों में मनरेगा के पैसे में बड़ा घपला हुआ है। यह सुन सरकार ने घपले की जांच सीबीआई को सौंप दी। घपले की जड़ खोजने में जुटी सीबीआई ने जिले के अधिकारियों से विगत कई वर्षों में मनरेगा से हुए कार्यों का दस्तावेज मांगा है। सूत्र कहते हैं कि शिवगढ़ ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों का दस्तावेज कई बार मांगने के बाद भी नहीं मिला। यह देख सीबीआई ने अधिकारियों व वहां की बीडीओ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
खुद के बचाव में उतरीं बीडीओ उमा गुप्ता सोमवार की रात रानीगंज थाने में 19 ग्राम पंचायतों में हुए मनरेगा कार्यों के गायब दस्तावेज की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचीं। उनका कहना था कि उन ग्राम पंचायतों के विगत कई वर्षों के दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि वह कई बार मातहतों से उन अभिलेखों की मांग कर चुकी हैं। इसलिए उन ग्राम पंचायतों के ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ वह रिपोर्ट दर्ज कराएंगी। सुबह यानी मंगलवार को बीडीओ ने कहा कि सारे दस्तावेज मिल गए हैं। इस लिए उन्होंने तहरीर वापस ले ली।
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उनकी यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही। लोगों का मानना है कि जो अभिलेख कई बार मांगने के बाद भी नहीं मिले, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी उसे रातोरात बीडीओ को कैसे दे दिए। यदि वे दस्तावेज उनके पास या ब्लॉक में मौजूद थे तो उन लोगों ने पहले क्यों नहीं दिए। इस तरह के तमाम सवाल न सिर्फ शिवगढ़ ब्लॉक बल्कि पूरे रानीगंज क्षेत्र के लोगों में चर्चा का विषय बने हैं। यदि बीडीओ की बात ही थोड़ी देर के लिए सच मान ली जाए तो प्रश्न यह उठता है कि रिपोर्ट दर्ज कराने की बात सुनने के बाद डर कर आखिर ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों ने बीडीओ को दस्तावेज क्यों दिए। लोगों का कहना है कि इस मामले में कहीं न कहीं दाल में कुछ काला जरूर है।
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जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के करोड़ों रुपए से विकास कार्य कराए गए हैं। सरकार को खबर मिली की कई जनपदों में मनरेगा के पैसे में बड़ा घपला हुआ है। यह सुन सरकार ने घपले की जांच सीबीआई को सौंप दी। घपले की जड़ खोजने में जुटी सीबीआई ने जिले के अधिकारियों से विगत कई वर्षों में मनरेगा से हुए कार्यों का दस्तावेज मांगा है। सूत्र कहते हैं कि शिवगढ़ ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों का दस्तावेज कई बार मांगने के बाद भी नहीं मिला। यह देख सीबीआई ने अधिकारियों व वहां की बीडीओ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
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खुद के बचाव में उतरीं बीडीओ उमा गुप्ता सोमवार की रात रानीगंज थाने में 19 ग्राम पंचायतों में हुए मनरेगा कार्यों के गायब दस्तावेज की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचीं। उनका कहना था कि उन ग्राम पंचायतों के विगत कई वर्षों के दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि वह कई बार मातहतों से उन अभिलेखों की मांग कर चुकी हैं। इसलिए उन ग्राम पंचायतों के ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ वह रिपोर्ट दर्ज कराएंगी। सुबह यानी मंगलवार को बीडीओ ने कहा कि सारे दस्तावेज मिल गए हैं। इस लिए उन्होंने तहरीर वापस ले ली।
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उनकी यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही। लोगों का मानना है कि जो अभिलेख कई बार मांगने के बाद भी नहीं मिले, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी उसे रातोरात बीडीओ को कैसे दे दिए। यदि वे दस्तावेज उनके पास या ब्लॉक में मौजूद थे तो उन लोगों ने पहले क्यों नहीं दिए। इस तरह के तमाम सवाल न सिर्फ शिवगढ़ ब्लॉक बल्कि पूरे रानीगंज क्षेत्र के लोगों में चर्चा का विषय बने हैं। यदि बीडीओ की बात ही थोड़ी देर के लिए सच मान ली जाए तो प्रश्न यह उठता है कि रिपोर्ट दर्ज कराने की बात सुनने के बाद डर कर आखिर ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों ने बीडीओ को दस्तावेज क्यों दिए। लोगों का कहना है कि इस मामले में कहीं न कहीं दाल में कुछ काला जरूर है।