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भक्तिधाम मनगढ़ में मनाया गया जगद्गुरुत्तम जयंती महोत्सव
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
- फोटो : pratapgarah
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भक्तिधाम मनगढ़ में कृपालुजी महाराज के जन्मदिन को जगद्गुरुत्मम जयंती के रूप में मनाया गया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ प्रेमरस के प्रतीक और शरद्पूर्णिमा को इस धरती पर जन्म लेने वाले गुरु को नमन किया। उनकी अर्चना करने के साथ ही उन्हें भावपूर्ण तरीके से याद किया गया। देश विदेश से आए श्रद्धालुओं और साधकों ने केक काटकर गुरु का स्मरण किया।
भक्तिधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है। जगद्गुरुोत्तम की उपाधि से विभूषित कृपालु जी महाराज के भक्त इस परम पवित्र बेला को प्राकट्य दिवस के रूप में मनाते हैं। इसी दिन जन्मी इस विभूति ने अपने अलौकिक ज्ञान की गंगा से इस धरा-धाम को पवित्र करने और विश्व में ज्ञान व भक्ति की अखंड ज्योति को प्रज्जवलित करना शुरू किया। भक्तों का कहना है कि जगद्गगुरुत्तम यानी जो जगदगुरुओं में सर्वश्रेष्ठ हो और यही वजह है कि श्री कृपालु जी महाराज को इससे विभूषित किया गया है। पूर्व में चार जगतगुरु हुए, जगद्गुुरु शंकराचार्य, जगद्गुरु निम्बाकाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य एवं जगदगुरु माधवाचार्य। इसके बाद कृपालु महाराज विश्व के पंचम मूल जगद्गुरु हैं। यही कारण रहा कि जगद्गुरोत्तम का प्राकट्य महोत्सव मनाने के लिए देश व विदेश के लोग भी मनगढ़ पहुंचे। दिन भर भक्तिधाम मनगढ़ जयकारों से गूंजता रहा। भोर में आरती, गुरु चरणों की वंदना एवं पूजन के साथ महोत्सव प्रारम्भ हुआ। मध्यरात्रि तक अखंड संकीर्तन हुआ। इसके बाद जलाभिषेक और आरती का की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने केक काटा और गुरु को भावपूर्ण भोग लगाया। श्रद्धालु चंद्रसेन के अनुसार वृंदावन स्थित प्रेम मंदिर में भी जगद्गुरुत्तम जयंती महोत्सव अत्यंत भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर प्रेम मंदिर प्रांगण में विशेष परिक्रमा हुई। इस अवसर पर हजारों दर्शनार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया।
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भक्तिधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है। जगद्गुरुोत्तम की उपाधि से विभूषित कृपालु जी महाराज के भक्त इस परम पवित्र बेला को प्राकट्य दिवस के रूप में मनाते हैं। इसी दिन जन्मी इस विभूति ने अपने अलौकिक ज्ञान की गंगा से इस धरा-धाम को पवित्र करने और विश्व में ज्ञान व भक्ति की अखंड ज्योति को प्रज्जवलित करना शुरू किया। भक्तों का कहना है कि जगद्गगुरुत्तम यानी जो जगदगुरुओं में सर्वश्रेष्ठ हो और यही वजह है कि श्री कृपालु जी महाराज को इससे विभूषित किया गया है। पूर्व में चार जगतगुरु हुए, जगद्गुुरु शंकराचार्य, जगद्गुरु निम्बाकाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य एवं जगदगुरु माधवाचार्य। इसके बाद कृपालु महाराज विश्व के पंचम मूल जगद्गुरु हैं। यही कारण रहा कि जगद्गुरोत्तम का प्राकट्य महोत्सव मनाने के लिए देश व विदेश के लोग भी मनगढ़ पहुंचे। दिन भर भक्तिधाम मनगढ़ जयकारों से गूंजता रहा। भोर में आरती, गुरु चरणों की वंदना एवं पूजन के साथ महोत्सव प्रारम्भ हुआ। मध्यरात्रि तक अखंड संकीर्तन हुआ। इसके बाद जलाभिषेक और आरती का की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने केक काटा और गुरु को भावपूर्ण भोग लगाया। श्रद्धालु चंद्रसेन के अनुसार वृंदावन स्थित प्रेम मंदिर में भी जगद्गुरुत्तम जयंती महोत्सव अत्यंत भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर प्रेम मंदिर प्रांगण में विशेष परिक्रमा हुई। इस अवसर पर हजारों दर्शनार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया।
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