महाशिवरात्रि 2024 : भगवान राम ने वनवास जाते समय की थी बाबा बेलखरनाथ शिवलिंग की स्थापना, लगती है भक्तों की कतार
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर सई नदी के किनारे विशाल टीले पर स्थित बेलखरनाथ शिवधाम अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों के लिए विख्यात है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा राम जानकी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर के साथ राम भक्त हुनमान की भी मंदिर है। मंदिर परिसर में सराय और धर्मशाला भी बना हुआ है।
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बेलखरनाथ शिव मंदिर आज भी अपनी पौराणिक मान्यता के साथ ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है। भगवान श्रीराम ने वन गमन के दौरान राजा बेल के शासन में इस मंदिर की स्थापना की थी। राजा बेल के नाम से प्रसिद्ध मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। शिवरात्रि पर करीब पांच हजार से अधिक शिवभक्तों की भीड़ जलाभिषेक के लिए धाम पर पहुंचती है।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर सई नदी के किनारे विशाल टीले पर स्थित बेलखरनाथ शिवधाम अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों के लिए विख्यात है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा राम जानकी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर के साथ राम भक्त हुनमान की भी मंदिर है। मंदिर परिसर में सराय और धर्मशाला भी बना हुआ है।
मंदिर की पौराणिकता के बारे में मुख्य पुजारी ब्रदीनाथ गिरि ने बताया कि वर्ष 1916 में छपी पुस्तक वत्स गोत्र चौहाल की वंशावली में गोपाल कवि ने उल्लेख किया है कि बेल राजा के शासन काल में भगवान श्रीराम ने वनवास जाते समय शिवलिंग की स्थापना इसी स्थान पर की थी।
चित्रकूट के स्वामी राम भद्राचार्य पुराणों में वर्णित बेलखरनाथ शिवलिंग की स्थापना भगवान श्रीराम द्वारा किए जाने की प्रमाणिकता को सिद्ध करता है। कालांतर में राजा दिलीपपुर ने खोज कराकर यहां एक छप्पर रखवाया। शिव हर्ष ओझा 28 वर्ष की आयु में यहां आश्रम बनाकर रहने लगे।
ब्रह्चारी ने अचला सप्तमी के दिन अपनी मां सिरता जी के हाथों ईंट रखवा कर मंदिर का नींव पूजन करवाया। उसके बाद से बाबा बेलखरनाथ धाम भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ, है। महाशिवरात्रि के साथ सोमवार व शनिवार को पूजा अर्चना की जाती है। वर्तमान में बेलखरनाथ धाम पट्टी तहसील के यहियापुर गांव में स्थित है।