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कपड़ा कारोबारियों को सात सौ करोड़ की चपत

Sat, 02 May 2020 11:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 May 2020 11:28 PM IST
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loss of 700 crore to tradesmen
clothes - फोटो : facebook

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39 दिनों से कपड़ा कारोबारियों की दुकान पर ताला लटक रहा है। इन दिनों में एक रुपये की कमाई नहीं हुई है और लाखों रुपये का खर्च सिर पर आ गया है। नए माह की शुरुआत होते ही दुकान का  किराया, बैंक की किस्त, बिजली का बिल और कर्मचारियों को सैलरी देने की चिंता सता रही है। कोरोना महामारी के दहशत के बीच अब उन्हें दुकान नहीं खुलने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कपड़ा के थोक व्यापारियों की मानें तो जिले भर में लगभग सात सौ करोड़ रुपये के  कारोबार को झटका लगा है। 

लॉकडाउन के चलते जिले के कपड़े की दुकानें 39 दिन से बंद है। इससे छोटे और बड़े कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। दुकान से एक रुपये की कमाई नहीं होने और खर्च प्रतिदिन होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। लॉकडाउन के दौरान एक भी दिन दुकानें नहीं खुली, मगर दुकान का किराया, बैंक की किस्त, बिजली का बिल जमा करने के साथ ही दुकान पर रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी देने की चिंता सता रही है।
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प्रतापगढ़ शहर के साथ ही कुंडा, पट्टी, लालगंज, रानीगंज में कपड़े के थोक विक्रेताओं के साथ ही फुटकर दुकानें भी नहीं खुल रही हैं। व्यवसाइयों की मानें तो अप्रैल, मई के माह में पूरे वर्ष भर का कारोबार होता है। यह मौसम शादी-विवाह के साथ ही फसलों की कटाई होने से किसान वर्ष भर के लिए कपड़े की खरीदारी करता था। मगर लॉकडाउन ने पूरे कारोबार को चौपट कर दिया है। 
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शहर के थोक कपड़ा व्यापारी संजय झलानी कहते हैं कि फरवरी माह से दुकानदारी चौपट हुई है। 25 मार्च से लगने वाले नवरात्र से कपड़े की बिक्री बढ़ती है, मगर इस बार 25 मार्च से ही लॉकडाउन होने से एक भी दिन दुकान नहीं खुली, जिससे सभी तैयारियों पर पानी फिर गया है।  इस बार शादी-विवाह नहीं होने से भी कपड़े का व्यवसाय पूरी तरह ठप है। 

 
थोक विक्रेताओं ने मार्च माह में ही अप्रैल और मई माह के लिए कपड़े की खरीदारी कर ली थी। मगर जब बिक्री का समय आया, तो लॉकडाउन हो गया। इससे थोक विक्रेता करोड़ों रुपये का कपड़ा खरीदकर फंस गए हैं। बचा हुआ स्टाक अब नवंबर और दिसंबर माह में ही खर्च होगा।
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