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जमीन के एवज में भी कर्ज देने को तैयार नहीं बैंक
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loan from bank
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प्रतापगढ़। सरकार किसानों और व्यवसायियों को बगैर गारंटी ऋण देने का दावा कर रही है, मगर आलम यह है कि जमीन गिरवी रखने के एवज में भी बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं हैं। लॉकडाउन में तीन माह से कारोबार ठप होने से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। खरीफ की फसल उगाने के लिए किसान जमीन गिरवी रख रहे हैं, मगर इसके बाद भी कर्ज नहीं मिल रहा है।
लॉकडाउन में नुकसान झेलने वाले किसानों को आर्थिक मदद देने के लिए जिले के बैंकों को 1 लाख 11 हजार 276 किसानों का क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया गया है। केसीसी के बदले किसानों को अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ रही है। इसके बाद भी बैंक किसानों को कर्ज देने को तैयार नहीं है। एक अप्रैल से 18 जून तक मात्र 1950 किसानों का केसीसी बनाया गया है। धान की नर्सरी डालकर रोपाई करने की तैयारी करने वाले किसानों को चिंता सता रही है कि वह इस बार किसानी कैसे करेंगे। बैंकों के चक्कर लगाने वाले किसानों को सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। किसानों का कहना है कि जिन लोगों ने पहले से केसीसी बनवा रखा है और नियमित भुगतान कर दिया है, बैंक उसका नवीनीकरण तो कर रहे हैं, मगर नया कार्ड नहीं बना रहे हैं। दरअसल, बैंक अफसरों की यह सोच होती है कि किसान कर्ज लेने के बाद चुकता करने नहीं आते हैं, बल्कि वह कर्जमाफी का इंतजार करते रहते हैं। इसका बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ता है। यही वजह है कि कर्ज देने से बैंक अफसर कतरा रहे हैं।
जो किसान केसीसी के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनको वह दिया जा रहा है। कुछ किसान कई शाखाओं से कर्ज ले रखे हैं, उन्हीं लोगों से परहेज किया जा रहा है। केसीसी बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जो पात्र हैं, उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी।
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अनिल कुमार, एलडीएम
बोले किसान--------
लॉकडाउन में जमा पूंजी खत्म हो गई है। खरीफ की फसल के लिए बैंकों से आर्थिक मदद लेना मजबूरी है। मगर बैंक अफसर हैं कि सुनने को तैयार नहीं हैं। बैंक अफसर शाखा से बाहर निकलने का प्रयास नहीं करते हैं, अगर वह गांव में आकर जानकारी करें, तो उनकी शंका का निराकरण हो सकता है और किसानों को आसानी से आर्थिक मदद मिल सकती है।
महावीर तिवारी, कटकामानापुर, संडवा चंद्रिका
गांव का किसान जो केसीसी बनवाता है, वह जमीन के अनुपात में ही बनता है। केसीसी फसलों पर आधारित ऋण होता है। इसके बाद भी बैंक अफसर किसानों को परेशान करते हैं। कर्ज किसानों को ही चुकता करना होता है, इसके बाद भी वह कर्ज देने में आनाकानी करते रहते हैं। बैंक अफसरों की सोच है कि किसान जानबूझकर कर्ज की अदायगी नहीं करते हैं, तो यह गलत है।
अनिल सिंह, बझान, संडवा चंद्रिका
किसान अपनी जमीन गिरवी रखता है और ब्याज सहित भुगतान भी करता है, मगर इसके बाद भी कर्ज देने के लिए परेशान किया जाता है। पहले आनाकानी करेंगे और किसान जब गिड़गिड़ाते हैं, तो दलालों के माध्यम से सौदेबाजी की जाती है। मगर किसान की मजबूरी होती है कि वह किसके पास रुपये लेने के लिए जाए।
सरयू प्रसाद तिवारी, दूलापुर, बेलखरनाथधाम
लॉकडाउन के दौरान शासन ने कहा था कि बगैर गांरटी किसानों को कर्ज दिया जाएगा, मगर आलम यह है कि किसान अपनी जमीन भी देने को तैयार हैं, फिर भी कर्ज देने में परहेज किया जा रहा है। किसान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
राजकुमार शुक्ल, अशोकपुर, पट्टी
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लॉकडाउन में नुकसान झेलने वाले किसानों को आर्थिक मदद देने के लिए जिले के बैंकों को 1 लाख 11 हजार 276 किसानों का क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया गया है। केसीसी के बदले किसानों को अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ रही है। इसके बाद भी बैंक किसानों को कर्ज देने को तैयार नहीं है। एक अप्रैल से 18 जून तक मात्र 1950 किसानों का केसीसी बनाया गया है। धान की नर्सरी डालकर रोपाई करने की तैयारी करने वाले किसानों को चिंता सता रही है कि वह इस बार किसानी कैसे करेंगे। बैंकों के चक्कर लगाने वाले किसानों को सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। किसानों का कहना है कि जिन लोगों ने पहले से केसीसी बनवा रखा है और नियमित भुगतान कर दिया है, बैंक उसका नवीनीकरण तो कर रहे हैं, मगर नया कार्ड नहीं बना रहे हैं। दरअसल, बैंक अफसरों की यह सोच होती है कि किसान कर्ज लेने के बाद चुकता करने नहीं आते हैं, बल्कि वह कर्जमाफी का इंतजार करते रहते हैं। इसका बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ता है। यही वजह है कि कर्ज देने से बैंक अफसर कतरा रहे हैं।
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जो किसान केसीसी के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनको वह दिया जा रहा है। कुछ किसान कई शाखाओं से कर्ज ले रखे हैं, उन्हीं लोगों से परहेज किया जा रहा है। केसीसी बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जो पात्र हैं, उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी।
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अनिल कुमार, एलडीएम
बोले किसान--------
लॉकडाउन में जमा पूंजी खत्म हो गई है। खरीफ की फसल के लिए बैंकों से आर्थिक मदद लेना मजबूरी है। मगर बैंक अफसर हैं कि सुनने को तैयार नहीं हैं। बैंक अफसर शाखा से बाहर निकलने का प्रयास नहीं करते हैं, अगर वह गांव में आकर जानकारी करें, तो उनकी शंका का निराकरण हो सकता है और किसानों को आसानी से आर्थिक मदद मिल सकती है।
महावीर तिवारी, कटकामानापुर, संडवा चंद्रिका
गांव का किसान जो केसीसी बनवाता है, वह जमीन के अनुपात में ही बनता है। केसीसी फसलों पर आधारित ऋण होता है। इसके बाद भी बैंक अफसर किसानों को परेशान करते हैं। कर्ज किसानों को ही चुकता करना होता है, इसके बाद भी वह कर्ज देने में आनाकानी करते रहते हैं। बैंक अफसरों की सोच है कि किसान जानबूझकर कर्ज की अदायगी नहीं करते हैं, तो यह गलत है।
अनिल सिंह, बझान, संडवा चंद्रिका
किसान अपनी जमीन गिरवी रखता है और ब्याज सहित भुगतान भी करता है, मगर इसके बाद भी कर्ज देने के लिए परेशान किया जाता है। पहले आनाकानी करेंगे और किसान जब गिड़गिड़ाते हैं, तो दलालों के माध्यम से सौदेबाजी की जाती है। मगर किसान की मजबूरी होती है कि वह किसके पास रुपये लेने के लिए जाए।
सरयू प्रसाद तिवारी, दूलापुर, बेलखरनाथधाम
लॉकडाउन के दौरान शासन ने कहा था कि बगैर गांरटी किसानों को कर्ज दिया जाएगा, मगर आलम यह है कि किसान अपनी जमीन भी देने को तैयार हैं, फिर भी कर्ज देने में परहेज किया जा रहा है। किसान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
राजकुमार शुक्ल, अशोकपुर, पट्टी