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ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मीटर के कैसे होगी वसूली

Mon, 09 May 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Mon, 09 May 2016 12:03 AM IST
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गांव में बिजली का मीटर न लगना अधिकारियों के गले की फांस बनता जा रहा है। रोस्टर से अधिक खपत और कम वसूली के गणित में अधिकारी इस कदर उलझकर रह गए हैं कि उनको वसूली की बात सोच-सोच कर चक्कर आने लगे हैं। आने वाले समय में बढ़ी बिजली का बिल कैसे और किससे वसूल करेंगे।
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दरअसल, इस समय रोस्टर से अधिक बिजली ग्रामीण इलाकों को दी जा रही है। पंद्रह से बीस घंटे आपूर्ति का विभाग दावा कर रहा है। जबकि डिमांड इतनी नहीं है। ऐसा अधिकारियों का मानना है। जब बिजली अधिक मिल रही है तो स्वभाविक है उसी हिसाब से वसूली भी अधिक होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले कुछ दिनों में संबंधित अधिकारी को विभागीय कार्रर्वाई का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा।
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मामला शहर का होता तो शायद इतनी दिक्कत नहीं आती। क्योंकि शहर में मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे विभाग को वसूलने में दिक्कत नहीं आ रही है। उपभोक्ता बिजली का जितना उपभोग करेगा मीटर रीडिंग के बाद उतने ही बिल को उसको भुगतान करना होगा। मगर जब बात गांव की आती है तो अधिकारियों को मानों सांप सूंघ जाता है। क्योंकि गांव में अभी तक मीटर नहीं लग पाए हैं। उधर, रोस्टर से अधिक जो बिजली ग्रामीणों को मिल रही है। उसके बिल का निर्धारण बिना मीटर के कैसे होगा। यह सोचकर अधिकारी परेशान हैं। ग्रामीण उपभोक्ता चाहे जितनी बिजली जलायें, उनको फिक्स एक मुश्त रकम अभी भी बिल के रूप में देनी होती है। जिस तरह से आपूर्ति बढ़ाई गई है उसको देखने के बाद अब फिक्स बिल से काम चलने वाला नहीं हैं। क्योंकि  बढ़ी हुई आपूर्ति के हिसाब से बिजली का बिल वसूलना होगा है। जो कि मीटर के अभाव में संभव होता नहीं दिखाई दे रहा है। इसको लेकर अधिकारी ऊहापोह में हैं कि आखिर क्या होगा। इस बारे में एक्सईएन ओपी मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली गांव को मिल रही है। मीटर न लगने से बिल की वसूली में दिक्कत आ सकती है। ग्रामीणों को अभी भी एक मुश्त बिजली का बिल जमा करना होता है। यह नियम पुराने समय से चला आ रहा है।
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