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अस्पतालों में नर्स नहीं, तड़प रहे मरीज
Sun, 10 Mar 2019 12:25 AM IST
shailendra Kumar
pratapgarh
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Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 10 Mar 2019 12:25 AM IST
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प्रतापगढ़। जनपद के सरकारी अस्पतालों में नर्सों की कमी से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में भर्ती मरीजों को इलाज के अभाव में तड़पना पड़ता है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से दवा व इंजेक्शन नहीं लग पाता है। डॉक्टर भी दिनभर में मात्र एक बार मरीज को देखने के लिए जाते हैं। जिला और महिला अस्पताल में हालत यह है कि एक नर्स को 35 से 45 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
जनपद में 27 सीएचसी, 55 पीएचसी, पांच ब्लाक स्तर के अस्पतालों के साथ ही जिला व जिला महिला अस्पताल का संचालन हो रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के साथ इलाज करने के लिए शासन ने 136 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन अस्पतालों में महज 90 स्टाफ नर्स की तैनाती ही की गई है। 46 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एक नर्स को 35 से 45 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से उनका इलाज नहीं हो पाता है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। सीएचसी-पीएचसी में तो हालत कुछ हद तक ठीक है, मगर जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स के भरोसे दो से तीन वार्ड की जिम्मेदारी दे दी जाती है। इससे मरीज परेशान हो जाते हैं।
शासन ने जिला अस्पताल में 37 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं, मगर तैनाती महज 20 नर्सों की है। 17 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि शासन के आदेश को माना जाए तो एक नर्स महज 15 मरीजों की देखरेख और इलाज करेगी। मगर जिला अस्पताल में एक नर्स को 30 से 40 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है।
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जनपद में 27 सीएचसी, 55 पीएचसी, पांच ब्लाक स्तर के अस्पतालों के साथ ही जिला व जिला महिला अस्पताल का संचालन हो रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के साथ इलाज करने के लिए शासन ने 136 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन अस्पतालों में महज 90 स्टाफ नर्स की तैनाती ही की गई है। 46 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एक नर्स को 35 से 45 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से उनका इलाज नहीं हो पाता है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। सीएचसी-पीएचसी में तो हालत कुछ हद तक ठीक है, मगर जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स के भरोसे दो से तीन वार्ड की जिम्मेदारी दे दी जाती है। इससे मरीज परेशान हो जाते हैं।
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शासन ने जिला अस्पताल में 37 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं, मगर तैनाती महज 20 नर्सों की है। 17 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि शासन के आदेश को माना जाए तो एक नर्स महज 15 मरीजों की देखरेख और इलाज करेगी। मगर जिला अस्पताल में एक नर्स को 30 से 40 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है।
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