विधानसभा कुंडा : पहली बार अपनी पार्टी से लड़े राजाभैया को मिली सीधी चुनौती
भाजपा व सपा की सरकार में प्रदेश के मंत्री रह चुके राजाभैया इस बार अपनी पार्टी जनसत्ता दल से मैदान में उतरे थे। इससे पहले वह सात बार निर्दल विधायक रह चुके थे। इस बार राजाभैया के मुकाबले में सपा ने कभी उनके करीबी रहे गुलशन यादव को चुनाव मैदान में उतारा।
विस्तार
कुंडा विधानसभा सीट से सात बार निर्दल विधायक रह चुके रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया को पहली बार अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से मैदान में उतरने के बाद सपा से कड़ी टक्कर मिली। सपा प्रत्याशी गुलशन यादव लगातार उनका पीछा करते नजर आए। यही कारण रहा कि वर्ष 2017 के चुनाव में एक लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल करने वाले राजाभैया की जीत का अंतर इस बार घटकर 30,418 पर पहुंच गया। यह पहला मौका है जब वह इतने कम वोटों के अंतर से चुनाव जीते हैं।
भाजपा व सपा की सरकार में प्रदेश के मंत्री रह चुके राजाभैया इस बार अपनी पार्टी जनसत्ता दल से मैदान में उतरे थे। इससे पहले वह सात बार निर्दल विधायक रह चुके थे। इस बार राजाभैया के मुकाबले में सपा ने कभी उनके करीबी रहे गुलशन यादव को चुनाव मैदान में उतारा। वहीं भाजपा ने सिंधुजा मिश्रा सेनानी को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा की लहर में भी वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया ने रिकार्ड एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की थी।
अबकी बार डेढ़ लाख पार का नारा फेल
इस चुनाव में वह डेढ़ लाख पार का नारा दे रहे थे। कुंडा में चुनाव के समय मारपीट की घटनाएं भी हुईं। सपा प्रत्याशी पर हमला भी हुआ। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप के दौर चले। सियासी पारा चरम पर था। ऐसे में कुंडा के परिणाम पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं। सपा प्रत्याशी गुलशन यादव ने राजाभैया को पहले राउंड से ही कड़ी टक्कर दी। अब तक कुंडा में एकतरफा जीतने वाले राजाभैया को पहली बार सीधे तौर पर चुनौती मिली।
मुस्लिम-यादव समीकरण और पिछड़ी जातियों की गोलबंदी में जुटी सपा ने उन्हें घेरने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी होने के बाद भी वोट नहीं बंटे। दो राउंड में सपा प्रत्याशी गुलशन यादव राजाभैया से आगे भी रहे, लेकिन फिर राजाभैया के मतों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई।
विधायक की प्रोफाइल
भदरी रियासत के कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया वर्ष 1993 में चुनाव मैदान में उतरे। रिकार्ड मतों से जीत हासिल करने वाले राजाभैया ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। बसपा सरकार में राजाभैया व उनके पिता पर पोटा समेत कई मुकदमे दर्ज हुए, मगर उनका राजनैतिक कद बढ़ता चला गया। इससे पहले वह भाजपा सरकार में मंत्री रहे। बाद में उनकी सपा के साथ नजदीकी हो गई और वह सपा सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे।
सपा सरकार में सीओ जियाउल हक हत्याकांड में भी उनका नाम उछला, मगर सीबीआई जांच में क्लीन चिट मिल गई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिदक का गठन किया। प्रदेश की सियासत में उन्हें बाहुबली नेता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कानून में स्नातक किया है।
जीत का अंतर
30,418
किसको कितने मिले वोट
रघुराज प्रताप सिंह जनसत्ता दल 99261
गुलशन यादव सपा 68843
सिंधुजा मिश्रा भाजपा 16347
योगेश यादव कांग्रेस 542
फहीम बसपा 3321
अन्य प्रत्याशियों को मिले मत
धर्मराज 1984, जयेश सिंह 1368, तनवीर 493, धीरेंद्र कुमार 400, सीमा 380, हरिवंश को 895 मत मिले।
बाबागंज विधानसभा : सपा-भाजपा की चुनौती के बीच विनोद ने मारी बाजी
बाबागंज सुरक्षित सीट से जनसत्ता दल के प्रत्याशी विनोद सरोज ने सपा-भाजपा से मिल रही कांटे की टक्कर के बीच 15767 मतों से बाजी मारी। इस सीट से तीन बार निर्दल विधायक रहे विनोद ने पहली बार जनसत्ता दल से जीत हासिल की है। राजाभैया के करीबी विनोद ने शुरू से जारी बढ़त को अंतिम समय तक बरकरार रखा। इस सीट को भी राजाभैया की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था। वर्ष 2007 से विधायक चुने जा रहे विनोद के पिता भी दो बार बाबागंज से विधायक रह चुके हैं।
बाबागंज विधानसभा सुरक्षित सीट पर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से चुनाव मैदान में उतरे विनोद सरोज को भाजपा प्रत्याशी केशव पासी व सपा प्रत्याशी गिरीशचंद्र से कड़ी टक्कर मिली। कभी यह सीट कांग्रेस-सपा व भाजपा के खाते में रहती थी, लेकिन दो दशक से राजाभैया के प्रभाव के चलते इस सीट पर उनके समर्थक का कब्जा होता चला आ रहा है। कुंडा विकास खंड के रैयापुर के रहने वाले विनोद सरोज के पिता रामनाथ सरोज सेवानिवृत्त विकास खंड अधिकारी थे।
अवकाश ग्रहण करने के बाद राजाभैया ने उन्हें वर्ष 1996 में चुनाव मैदान में उतारा था। वह 2002 में भी विधायक बने थे। उनके निधन के बाद विरासत बेटे विनोद सरोज ने संभाल ली। वर्ष 2007 के चुनावी समर में उतरे विनोद सरोज ने पहली बार जीत हासिल की। राजाभैया के समर्थन से वर्ष 2012 व 2017 में भी विधायक चुने गए। 2022 के चुनाव में सपा व भाजपा ने उन्हें घेरने का प्रयास किया, लेकिन अंत में बाजी विनोद के हाथ आई।
विधायक की प्रोफाइल
कुंडा विकास खंड के शीतलपुर रैयापुर के रहने वाले विनोद सरोज राजनीति में आने से पहले रायबरेली इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। उन्होंने प्रयागराज से एमए की पढ़ाई की है। विधायक पिता के निधन के बाद उनकी विरासत संभालने के लिए कॉलेज से अवैतनिक अवकाश लिया। किसान परिवार में जन्मे विनोद का सरल स्वभाव सभी को भाता है। विनोद सरोज का घर कुंडा विस क्षेत्र में पड़ता है। वे अपना व परिवार का मत भी खुद को नहीं दे पाते हैं।
जीत का अंतर
15767
किसे मिले कितने वोट
प्रत्याशी मत
विनोद कुमार जनसत्ता दल 67282
केशव प्रसाद भाजपा 30391
गिरीशचंद्र सपा 51515
वीना रानी कांग्रेस 1501
सुशील कुमार बसपा 8723
अन्य प्रत्याशियों को मिले मत
राम प्रताप सरोज को 1245, विजय पाल सरोज को 2018, विनोद कुमार को 1050, सीताराम को 1120 मत