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धान की फसल पर खैरा रोग का खतरा
प्रतापगढ़ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:02 AM IST
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धान की लहलहाती फसल पर खैरा रोग का हमला हो गया है। इससे किसानों की नजर अब फसलों की सुरक्षा को लेकर टिक गई है। परेशान किसान कभी कृषि विभाग और कभी कृषि विशेषज्ञों का चक्कर लगा रहे हैं। शासन की तरफ से उन्हें सब्सिडी पर जिंक भी नहीं मिला, जिससे फसलों का बचाव हो सके।
जिले में 1,27,463 हेक्टेअर में धान की रोपाई की गई है। इस वर्ष बरसात अच्छी होने से किसानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन होने की संभावना है। बरसात होेने से धान के खेत लहलहा रहे हैं। मगर अधिकांश इलाकों में फसलें खैरा रोग का शिकार हो गई हैं। संडवा चंद्रिका, सदर, लालगंज, शिवगढ़, आसपुर देवसरा, बेलखरनाथ के अधिकांश गांवों के किसान खैरा रोग से फसल को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। खैरा रोग का प्रमुख लक्षण धान की पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पड़ना है। जगह-जगह पड़ने वाले धब्बे धीरे-धीरे पूरे पौधे को अपनी गिरफ्त में लेते हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल ने बताया कि बेल्हा के अधिकांश इलाकों में जिंक की भारी कमी है। जिंक की कमी से ही खैरा रोग होता है। उन्होंने किसानों से प्रति हेक्टअर 25 किग्रा जिंक का छिड़काव करने को कहा है। उन्होंने बताया कि खैरा रोग से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, यूरिया के साथ जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़काव करने से तीन से पांच दिन के अंदर धान के पौधे स्वस्थ हो जाते हैं। कृषि विभाग प्रतिवर्ष किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर जिंक मुहैया कराता था, मगर इस वर्ष विभाग में जिंक नहीं आने के कारण बाजार में मंहगी मिल रही है।
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जिले में 1,27,463 हेक्टेअर में धान की रोपाई की गई है। इस वर्ष बरसात अच्छी होने से किसानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन होने की संभावना है। बरसात होेने से धान के खेत लहलहा रहे हैं। मगर अधिकांश इलाकों में फसलें खैरा रोग का शिकार हो गई हैं। संडवा चंद्रिका, सदर, लालगंज, शिवगढ़, आसपुर देवसरा, बेलखरनाथ के अधिकांश गांवों के किसान खैरा रोग से फसल को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। खैरा रोग का प्रमुख लक्षण धान की पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पड़ना है। जगह-जगह पड़ने वाले धब्बे धीरे-धीरे पूरे पौधे को अपनी गिरफ्त में लेते हैं।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल ने बताया कि बेल्हा के अधिकांश इलाकों में जिंक की भारी कमी है। जिंक की कमी से ही खैरा रोग होता है। उन्होंने किसानों से प्रति हेक्टअर 25 किग्रा जिंक का छिड़काव करने को कहा है। उन्होंने बताया कि खैरा रोग से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, यूरिया के साथ जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़काव करने से तीन से पांच दिन के अंदर धान के पौधे स्वस्थ हो जाते हैं। कृषि विभाग प्रतिवर्ष किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर जिंक मुहैया कराता था, मगर इस वर्ष विभाग में जिंक नहीं आने के कारण बाजार में मंहगी मिल रही है।
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