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अवधी सम्राट जुमई की स्मृति में कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 28 Dec 2014 10:51 PM IST
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शारदा संगीत महाविद्यालय में रविवार को सृजना साहित्यिक संस्था की ओर से अवधी सम्राट जुमई खां आजाद की याद में कवि सम्मेलन मुशायरा व सम्मान समारोह हुआ। इस दौरान त्रैमासिक पत्रिका ‘गांव की नई आवाज’ का विमोचन किया गया। संस्था अध्यक्ष डॉ. दयाराम मौर्य रत्न ने मुख्य अतिथि डॉ. एम गोविन्द राजन को सृजना भाषाई सौहार्द सम्मान से पुरस्कृत किया। कथाकार विजय चितौरी को जुमई खां आजाद अवधी गौरव सम्मान से नवाजा गया।
भाषाविद डॉ. डीपी ओझा को सृजना साहित्य शिरोमणि सम्मान दिया गया। गैर जनपद से आए प्रसिद्ध साहित्यकार शंकरलाल साहू, रामनिहोर पाल, बलराम यादव, महेन्द्रनाथ श्रीवास्तव को सम्मान पत्र व शाल के साथ स्मृति चिन्ह दिया गया। अवधी शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य का तमिल में अनुवाद कर उन्हें अति प्रशंसा हुई। डा. डीपी ओझा ने कहा कि भाषा से संस्कृति तथा साहित्य का निर्माण होता है। आज भाषा के माध्यम से संस्कार देना जरूरी है। उपन्यासकार विजय चितौरी, डॉ. शक्तिधरनाथ पांडेय, रामनेवाज पाल, डॉ. विंध्याचल सिंह, सिद्धार्थ श्रीवास्तव आदि ने भी विचार व्यक्त किया। डॉ. मो. अनीश नाजिश, डॉ. अभिमन्यु कुमार चतुर्वेदी, सत्येन्द्रनाथ मिश्र मृदुल, डॉ. राम मिलन यादव मिलन, राजमूर्ति सिंह सौरभ ने काव्यपाठ किया। रोशनलाल ऊमरवैश्य व आनन्द मोहन ओझा ने स्वागत और संचालन लखन प्रजापगढ़ी तथा डॉ. रामानुज पाल भ्रमर ने किया।
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भाषाविद डॉ. डीपी ओझा को सृजना साहित्य शिरोमणि सम्मान दिया गया। गैर जनपद से आए प्रसिद्ध साहित्यकार शंकरलाल साहू, रामनिहोर पाल, बलराम यादव, महेन्द्रनाथ श्रीवास्तव को सम्मान पत्र व शाल के साथ स्मृति चिन्ह दिया गया। अवधी शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य का तमिल में अनुवाद कर उन्हें अति प्रशंसा हुई। डा. डीपी ओझा ने कहा कि भाषा से संस्कृति तथा साहित्य का निर्माण होता है। आज भाषा के माध्यम से संस्कार देना जरूरी है। उपन्यासकार विजय चितौरी, डॉ. शक्तिधरनाथ पांडेय, रामनेवाज पाल, डॉ. विंध्याचल सिंह, सिद्धार्थ श्रीवास्तव आदि ने भी विचार व्यक्त किया। डॉ. मो. अनीश नाजिश, डॉ. अभिमन्यु कुमार चतुर्वेदी, सत्येन्द्रनाथ मिश्र मृदुल, डॉ. राम मिलन यादव मिलन, राजमूर्ति सिंह सौरभ ने काव्यपाठ किया। रोशनलाल ऊमरवैश्य व आनन्द मोहन ओझा ने स्वागत और संचालन लखन प्रजापगढ़ी तथा डॉ. रामानुज पाल भ्रमर ने किया।
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