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कल्याण सिंह ने दिया प्रतापगढ़ के विकास को नया आयाम
Sun, 22 Aug 2021 08:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 22 Aug 2021 08:03 PM IST
सार
- नगर निकाय के लिए दी थी राज्यवित्त की सौगात, बेल्हा देवी के विकास में भी रही अहम भूमिका
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में शहरों के विकास को नया आयाम दिया था। बेहाल नगर निकाय को राज्यवित्त की धनराशि देकर संजीवनी देने का काम किया था। उनके कार्यकाल में ही बेल्हा देवी मंदिर का विकास हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से जुड़ीं यादों को ताजा करते हुए भाजपा नेता बृजेश सौरभ व नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह बताते हैं कि वर्ष 1997 के उनके कार्यकाल में शहर के विकास को नया आयाम मिला था। उस समय शहर की सड़कें संकरी थीं। जिस वजह से जाम की समस्या का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने शहर की सड़कों को चौड़ा करने के लिए बजट दिया। प्रदेश की नगरीय निकाय की दशा बेहतर नहीं थी। कर्मचारियों को आठ से दस महीने तक का वेतन नहीं मिल पाता था। नगरीय निकाय की समस्या को देखते हुए उन्होंने राज्यवित्त की मद का प्रावधान कराया। ताकि कर्मचारियों को वेतन मिल सके और शहर का विकास भी बेहतर तरीके से कराया जा सके। आबादी के सापेक्ष बजट आवंटित होने लगा। कर्मचारियों को वेतन मिलने लगा। पूर्व मंत्री बृजेश शर्मा ने बताया कि बेल्हा देवी के सुंदरीकरण के लिए कल्याण सिंह ने अलग से धनराशि मुहैया कराई थी। इसके बाद वहां कायाकल्प शुरू हो सका। पूर्व चेयरमैन हरिप्रताप सिंह उस समय शहर के विकास के लिए कई योजनाएं स्वीकृत कराने में कामयाब हुए थे। वह बताते हैं कि बाबूजी उनकी मांगों को सहर्ष स्वीकार कर लेते थे और उस पर अमल भी होता था।
जब कल्याण ने कहा था ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’
वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा पहुंचे थे। उन्होंने भाषण के दौरान चौपाई के अंदाज में कहा था, ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’। वहां मौजूद लोगों से हाथ उठाकर भाजपा को वोट देने का संकल्प भी दिलाया था। हालांकि इसके बाद भी भाजपा प्रत्याशी शिवनारायण मिश्र को हार का सामना करना पड़ा।
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इस चुनाव में कुंडा से राजाभैया के खिलाफ भाजपा से शिवनारायण मिश्र प्रत्याशी थे। उनका प्रचार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। उन्हें सुनने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे थे। जनसभा को संबोधित करने से पहले कल्याण सिंह ने सभी का अभिवादन स्वीकार करते हुए जय श्रीराम का नारा लगवाया था। उन्होंने कहा था कि कानून हाथ में लेने वालों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं है।
इस दौरान चौपाई के अंदाज में कल्याण सिंह ने कहा था ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’। वहां मौजूद लोगों को भाजपा के पक्ष में मत देने का संकल्प भी दिलाया था। हिंदूवादी चेहरा बनकर कुंडा पहुंचे कल्याण सिंह के ओजस्वी भाषण के बावजूद चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार शिवनारायण मिश्र को राजाभैया से हार का सामना करना पड़ा। मायावती ने जब कल्याण सरकार से समर्थन वापस लिया था तब राजाभैया ने सरकार बचाने में कल्याण सिंह की बहुत मदद की थी।
सबके लिए नियम-कानून रखते थे बराबर
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नियम-कानून सबके लिए बराबर मानते हुए अपने कर्तव्य का बखूबी निर्वहन करते थे। उन्हें नियमों को दरकिनार कर काम कराने वालों से नफरत थी। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ जनसंघ में संगठन की जिम्मेदारी देखने वाले पूर्व मंत्री बृजेश शर्मा उनके निधन पर खासे दुखी हैं। वह बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री के साथ संगठन में काम करने का मौका मिला। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में वह परिवहन मंत्री बने थे। उन्होंने बताया कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनकी सरकार में कभी बूथ लूटने या बेईमानी की बात सामने नहीं आती थी। अमेठी के विधानसभा चुनाव में मुझे प्रभारी बनाया गया। अमेठी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। समय लेकर वह मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्होंने अमेठी के चुनाव का हाल पूछा।
हालात की जानकारी देते हुए मैंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से थोड़ी मदद मिल जाए तो वहां का चुनाव निकल जाएगा। यह सुनते ही वह तेज आवाज में बोले, हमें अमेठी की सीट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी कीमत पर मतदान के दिन बेईमानी नहीं होनी चाहिए। परिणाम सकारात्मक नहीं रहा। उनके कार्यकाल में कांग्रेस, सपा, बसपा के लोगों को खूब नौकरी मिली। जिसे लेकर पार्टी के लोग नाराज रहते थे और मौका मिलने पर आरोप भी लगाते थे। मगर मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सीधा जवाब रहता था कि उस पद के लिए योग्य व्यक्ति का ही चयन हुआ है। वह किस दल का समर्थक है, इससे किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। योग्यता वाले व्यक्ति का चयन जरूरी है। संगठन व सरकार में उनका प्रभाव साफ दिखाई देता था। उनके भीतर सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता थी।
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उन्होंने शहर की सड़कों को चौड़ा करने के लिए बजट दिया। प्रदेश की नगरीय निकाय की दशा बेहतर नहीं थी। कर्मचारियों को आठ से दस महीने तक का वेतन नहीं मिल पाता था। नगरीय निकाय की समस्या को देखते हुए उन्होंने राज्यवित्त की मद का प्रावधान कराया। ताकि कर्मचारियों को वेतन मिल सके और शहर का विकास भी बेहतर तरीके से कराया जा सके। आबादी के सापेक्ष बजट आवंटित होने लगा। कर्मचारियों को वेतन मिलने लगा। पूर्व मंत्री बृजेश शर्मा ने बताया कि बेल्हा देवी के सुंदरीकरण के लिए कल्याण सिंह ने अलग से धनराशि मुहैया कराई थी। इसके बाद वहां कायाकल्प शुरू हो सका। पूर्व चेयरमैन हरिप्रताप सिंह उस समय शहर के विकास के लिए कई योजनाएं स्वीकृत कराने में कामयाब हुए थे। वह बताते हैं कि बाबूजी उनकी मांगों को सहर्ष स्वीकार कर लेते थे और उस पर अमल भी होता था।
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जब कल्याण ने कहा था ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’
वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा पहुंचे थे। उन्होंने भाषण के दौरान चौपाई के अंदाज में कहा था, ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’। वहां मौजूद लोगों से हाथ उठाकर भाजपा को वोट देने का संकल्प भी दिलाया था। हालांकि इसके बाद भी भाजपा प्रत्याशी शिवनारायण मिश्र को हार का सामना करना पड़ा।
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इस चुनाव में कुंडा से राजाभैया के खिलाफ भाजपा से शिवनारायण मिश्र प्रत्याशी थे। उनका प्रचार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। उन्हें सुनने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे थे। जनसभा को संबोधित करने से पहले कल्याण सिंह ने सभी का अभिवादन स्वीकार करते हुए जय श्रीराम का नारा लगवाया था। उन्होंने कहा था कि कानून हाथ में लेने वालों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं है।
इस दौरान चौपाई के अंदाज में कल्याण सिंह ने कहा था ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, भुजा उठाय दोउ हाथ’। वहां मौजूद लोगों को भाजपा के पक्ष में मत देने का संकल्प भी दिलाया था। हिंदूवादी चेहरा बनकर कुंडा पहुंचे कल्याण सिंह के ओजस्वी भाषण के बावजूद चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार शिवनारायण मिश्र को राजाभैया से हार का सामना करना पड़ा। मायावती ने जब कल्याण सरकार से समर्थन वापस लिया था तब राजाभैया ने सरकार बचाने में कल्याण सिंह की बहुत मदद की थी।
सबके लिए नियम-कानून रखते थे बराबर
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नियम-कानून सबके लिए बराबर मानते हुए अपने कर्तव्य का बखूबी निर्वहन करते थे। उन्हें नियमों को दरकिनार कर काम कराने वालों से नफरत थी। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ जनसंघ में संगठन की जिम्मेदारी देखने वाले पूर्व मंत्री बृजेश शर्मा उनके निधन पर खासे दुखी हैं। वह बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री के साथ संगठन में काम करने का मौका मिला। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में वह परिवहन मंत्री बने थे। उन्होंने बताया कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनकी सरकार में कभी बूथ लूटने या बेईमानी की बात सामने नहीं आती थी। अमेठी के विधानसभा चुनाव में मुझे प्रभारी बनाया गया। अमेठी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। समय लेकर वह मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्होंने अमेठी के चुनाव का हाल पूछा।
हालात की जानकारी देते हुए मैंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से थोड़ी मदद मिल जाए तो वहां का चुनाव निकल जाएगा। यह सुनते ही वह तेज आवाज में बोले, हमें अमेठी की सीट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी कीमत पर मतदान के दिन बेईमानी नहीं होनी चाहिए। परिणाम सकारात्मक नहीं रहा। उनके कार्यकाल में कांग्रेस, सपा, बसपा के लोगों को खूब नौकरी मिली। जिसे लेकर पार्टी के लोग नाराज रहते थे और मौका मिलने पर आरोप भी लगाते थे। मगर मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सीधा जवाब रहता था कि उस पद के लिए योग्य व्यक्ति का ही चयन हुआ है। वह किस दल का समर्थक है, इससे किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। योग्यता वाले व्यक्ति का चयन जरूरी है। संगठन व सरकार में उनका प्रभाव साफ दिखाई देता था। उनके भीतर सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता थी।