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मौका तो दीजिए, आसमान छुएंगी बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 04 Jul 2015 11:48 PM IST
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0 सफलता का श्रेय किसे देती हैं?
उत्तर : पिता अनिल प्रकाश मिश्रा, मम्मी कृष्णा मिश्रा और भाई योगेश मिश्रा।
0 कब से तैयारी शुरू की?
उत्तर : पिछले दो साल से। इसी के लिए दिल्ली आई थी।
0 किस प्रयास में सफलता मिली?
उत्तर : दूसरे प्रयास में।
0 अभी क्या कर रही थीं?
उत्तर : अगस्त 2014 में भारतीय आर्थिक सेवा में चयन हुआ था। इन दिनों ट्रेनिंग चल रही थी।
0 तैयारी के दौरान कोई समस्या आई?
उत्तर : पैसे की कमी कभी पापा ने महसूस नहीं होने दी। वो परेशान हुए, लेकिन हमें पता नहीं चलने दिया। मम्मी बीमार रहती हैं। दीदी की शादी हो चुकी है। फिर भी हमें पढने के लिए बाहर भेजा।
0 कितने साल से थीं दिल्ली में?
उत्तर: दो साल से।
0 आईएएस की तैयारी में कोचिंग का कितना योगदान है?
उत्तर : मैंने भी कुछ दिनों तक कोचिंग की, लेकिन इससे कुछ खास फायदा नहीं हुआ। बड़े भाई योगेश से मार्गदर्शन मिला। उसी के चलते सफलता मिली।
0 प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं बच्चियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर : अक्सर यह देखने में आता है कि लोग लड़कों के पढने के लिए पैसे की व्यवस्था कर लेते हैं। उन्हें पढने के लिए बाहर भेजते हैं। लड़कियों की पढ़ाई के लिए नहीं लोग उनकी शादी के लिए पैसे इकट्ठा करते हैं। लड़कियों में टैलेंट है। वो खुद को साबित करना चाहती हैं। उन्हें भी निश्चित तौर पर मौका मिलना चाहिए।
0 और गांव की बेटियों के लिए?
उत्तर: अभिभावक उन्हें बाहर भेजें। डरें नहीं। उन्हें मौका दें। पूरा सपोर्ट करें। निश्चित तौर पर बेटियां आसमान छूएंगी। बेटी के अंदर अगर प्रतिभा है तो उसे मौका मिलना चाहिए।
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आईएएस ही क्यों चुना?
उत्तर : बचपन से पापा का सपना था। बस उसे पूरा करने की जिद थी और यही मेरी सफलता का कारण बना।
0 कभी कोई समस्या आई?
उत्तर: बहुत सारी दिक्कतें आईं। मम्मी की तबीयत हमेशा खराब रहती है। उनकी चिंता लगी रहती थी। पिछले साल मेरी भी तबीयत बिगड़ गई। एक बार मनोबल टूटा, लेकिन परिवार ने कांफीडेंस बढ़ाया और पूरी मदद की।
0 दिल्ली में अकेले रहती थीं। कभी सुरक्षा को लेकर डर नहीं लगा?
उत्तर : जिस इलाके में रहती थी, वहां ज्यादातर तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं ही थे। शुरू से मम्मी की एक बात याद थी। समय से आना-जाना।
0 किस-किस ने परीक्षा की तैयारी में मदद की?
उत्तर : छोटे भाई लोकेश मिश्रा, दीदी क्षमा त्रिपाठी और जीजा सुधीर त्रिपाठी ने।
0 रोजना कितने घंटे पढ़ाई करती थीं?
उत्तर : शुरू में पांच से छह घंटे पढ़ाई की। पिछले एक साल से प्रतिदिन दस घंटे तक।
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उत्तर : पिता अनिल प्रकाश मिश्रा, मम्मी कृष्णा मिश्रा और भाई योगेश मिश्रा।
0 कब से तैयारी शुरू की?
उत्तर : पिछले दो साल से। इसी के लिए दिल्ली आई थी।
0 किस प्रयास में सफलता मिली?
उत्तर : दूसरे प्रयास में।
0 अभी क्या कर रही थीं?
उत्तर : अगस्त 2014 में भारतीय आर्थिक सेवा में चयन हुआ था। इन दिनों ट्रेनिंग चल रही थी।
0 तैयारी के दौरान कोई समस्या आई?
उत्तर : पैसे की कमी कभी पापा ने महसूस नहीं होने दी। वो परेशान हुए, लेकिन हमें पता नहीं चलने दिया। मम्मी बीमार रहती हैं। दीदी की शादी हो चुकी है। फिर भी हमें पढने के लिए बाहर भेजा।
0 कितने साल से थीं दिल्ली में?
उत्तर: दो साल से।
0 आईएएस की तैयारी में कोचिंग का कितना योगदान है?
उत्तर : मैंने भी कुछ दिनों तक कोचिंग की, लेकिन इससे कुछ खास फायदा नहीं हुआ। बड़े भाई योगेश से मार्गदर्शन मिला। उसी के चलते सफलता मिली।
0 प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं बच्चियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर : अक्सर यह देखने में आता है कि लोग लड़कों के पढने के लिए पैसे की व्यवस्था कर लेते हैं। उन्हें पढने के लिए बाहर भेजते हैं। लड़कियों की पढ़ाई के लिए नहीं लोग उनकी शादी के लिए पैसे इकट्ठा करते हैं। लड़कियों में टैलेंट है। वो खुद को साबित करना चाहती हैं। उन्हें भी निश्चित तौर पर मौका मिलना चाहिए।
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0 और गांव की बेटियों के लिए?
उत्तर: अभिभावक उन्हें बाहर भेजें। डरें नहीं। उन्हें मौका दें। पूरा सपोर्ट करें। निश्चित तौर पर बेटियां आसमान छूएंगी। बेटी के अंदर अगर प्रतिभा है तो उसे मौका मिलना चाहिए।
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आईएएस ही क्यों चुना?
उत्तर : बचपन से पापा का सपना था। बस उसे पूरा करने की जिद थी और यही मेरी सफलता का कारण बना।
0 कभी कोई समस्या आई?
उत्तर: बहुत सारी दिक्कतें आईं। मम्मी की तबीयत हमेशा खराब रहती है। उनकी चिंता लगी रहती थी। पिछले साल मेरी भी तबीयत बिगड़ गई। एक बार मनोबल टूटा, लेकिन परिवार ने कांफीडेंस बढ़ाया और पूरी मदद की।
0 दिल्ली में अकेले रहती थीं। कभी सुरक्षा को लेकर डर नहीं लगा?
उत्तर : जिस इलाके में रहती थी, वहां ज्यादातर तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं ही थे। शुरू से मम्मी की एक बात याद थी। समय से आना-जाना।
0 किस-किस ने परीक्षा की तैयारी में मदद की?
उत्तर : छोटे भाई लोकेश मिश्रा, दीदी क्षमा त्रिपाठी और जीजा सुधीर त्रिपाठी ने।
0 रोजना कितने घंटे पढ़ाई करती थीं?
उत्तर : शुरू में पांच से छह घंटे पढ़ाई की। पिछले एक साल से प्रतिदिन दस घंटे तक।