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मुझे रहजनों से गिला नहीं, तिरी रहबरी का सवाल है...
Thu, 09 May 2019 11:54 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 May 2019 11:54 PM IST
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प्लाजा पैलेस में आयोजित जनसभा में प्रियंका गांधी।
- फोटो : pratapgarh
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अंबाला में मंगलवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है...’ के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा हमला बोलने वाली कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को प्रतापगढ़ की रैली में भी सियासत के बहाने साहित्य में खूब हाथ आजमाए। उन्होंने अदम गोंडवी और फिराक जलालपुरी की प्रसिद्ध कविताओं के जरिए प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश की।
प्रियंका ने मंच से मशहूर शायर और कवि अदम गोंडवी की कविता ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है...’ के जरिए प्रधानमंत्री के दावों और विकास कार्यों पर तंज कसा। कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि देश फलफूल रहा है। इतना विकास हुआ जितना पिछले सत्तर सालों में नहीं हुआ।
इनकी बातें सुनने के बाद घर में बैठे लोग भी सोचते हैं कि विकास चलकर अब मेरे घर भी पहुंचने वाला होगा। यह असलियत नहीं है। भाजपा की सरकार में पांच वर्षों में कुछ भी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोलते हैं। यह प्रचार में भी लेप लगाकर दिखाते हैं। देश में पूंजीपतियों का कर्ज माफ करने के सिवा कुछ भी नहीं हुआ।
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किसान मर रहे हैं और पूंजीपति बढ़ रहे हैं। किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। युवाओं को रोजगार नहीं है। मैं जहां भी गई लोगों को रोजगार नहीं मिला।
प्रियंका यहीं नहीं रुकीं। वह प्रसिद्ध कवि फिराक जलालपुरी की रचना ‘तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यूं लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं, तिरी रहबरी का सवाल है’ के जरिए भी मोदी पर हमलावर हुईं।
प्रियंका ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद को शक्तिशाली दिखाते हैं। फिर अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर लोगों की समस्याओं समाधान क्यों नहीं करते। वह कभी पाकिस्तान की बात करते हैं तो कभी अतीत की। पांच साल में किया क्या, यह नहीं बताते।
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प्रियंका ने मंच से मशहूर शायर और कवि अदम गोंडवी की कविता ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है...’ के जरिए प्रधानमंत्री के दावों और विकास कार्यों पर तंज कसा। कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि देश फलफूल रहा है। इतना विकास हुआ जितना पिछले सत्तर सालों में नहीं हुआ।
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इनकी बातें सुनने के बाद घर में बैठे लोग भी सोचते हैं कि विकास चलकर अब मेरे घर भी पहुंचने वाला होगा। यह असलियत नहीं है। भाजपा की सरकार में पांच वर्षों में कुछ भी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोलते हैं। यह प्रचार में भी लेप लगाकर दिखाते हैं। देश में पूंजीपतियों का कर्ज माफ करने के सिवा कुछ भी नहीं हुआ।
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किसान मर रहे हैं और पूंजीपति बढ़ रहे हैं। किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। युवाओं को रोजगार नहीं है। मैं जहां भी गई लोगों को रोजगार नहीं मिला।
प्रियंका यहीं नहीं रुकीं। वह प्रसिद्ध कवि फिराक जलालपुरी की रचना ‘तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यूं लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं, तिरी रहबरी का सवाल है’ के जरिए भी मोदी पर हमलावर हुईं।
प्रियंका ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद को शक्तिशाली दिखाते हैं। फिर अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर लोगों की समस्याओं समाधान क्यों नहीं करते। वह कभी पाकिस्तान की बात करते हैं तो कभी अतीत की। पांच साल में किया क्या, यह नहीं बताते।