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टैक्स जमा करने के बाद ही अब मिलेगा मकान का नंबर
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शहर में नया मकान बनाने वालों की अब मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अब नगर पालिका नए मकान का नंबर तभी एलाट होगा, जब वह टैक्स जमा कर देंगे। ऐसे ही पुराने मकानों के टैक्स जमा होने के बाद ही मकान की नकल भवन स्वामियों को मिलेगी। गृहकर व जलकर जमा कराने के लिए पालिका के अफसरों ने नया फार्मूला निकाला है। अब देखना यह है कि पालिका की सख्ती के बाद लोग टैक्स जमा करते हैं कि नहीं।
नगर पालिका की ओर से स्वकर प्रणाली शुरू कर दी गई है लेकिन इसके बाद भी लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। पालिका ने नए मकान बनवाने के लिए लोगों की मुश्किलें बढ़ाते हुए शर्त रख दी है कि पहले टैक्स जमा करो, फिर इसके बाद नए मकान का नंबर एलाट किया जाएगा। शहर में तीन साल के अंदर करीब 700 नए मकान बने हैं। अधिकांश मकानों का टैक्स जमा न करने के कारण नंबर नहीं एलाट हो सका।
इसके लिए लगातार मकान स्वामी नगर नालिका के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं उन पुराने मकानों की नकल भी पालिका अब जारी नहीं कर रहा। जिनका बड़ी मात्रा में गृहकर व जलकर बकाया है। यदि कोई गृहस्वामी बिना गृहकर व जलकर जमा किए मकान की नकल चाहते हैं तो अब उन्हें नहीं मिलेगी। पहले उन्हें बकाया गृहकर व जलकर जमा करना होगा। तभी उन्हें नगर पालिका प्रशासन की ओर से नकल जारी होगी।
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सवा करोड़ से अधिक है बकाया
नगर पालिका के 25 वार्डों में रहने वाले शहरियों के ऊपर करीब सवा करोड़ से अधिक रुपये गृहकर व जलकर का बकाया है। बकाया रुपये जमा कराने के लिए नगर पालिका द्वारा नोटिस पर नोटिस भेजी जा रही है। अमीनों को भी घर-घर दस्तक देने के लिए भेजा जा रहा है। मगर रुपये जमा करने में लोग आनाकानी कर रहे हैं। तमाम प्रयास के बाद भी नगर पालिका बकाया वसूलने में हांफ रही है।
पालिका कर्मचारी बाट रहे मकान मालिकों को फार्म
स्वकरण प्रणाली के तहत पालिका के कर्मियों की ओर से 25 वार्डों में रहने वाले लोगों के घरों में फार्म बांट दिए गए हैं। इन फार्मों में ही लोगों को लिखकर देना होगा कि उनके घर का टैक्स कितना हुआ है। इसी के हिसाब से उन्हें टैक्स जमा करना होगा। पहले शहर में 25 वार्ड थे। सीमा विस्तार के बाद शहर की आबादी बढ़कर सवा लाख हो गई और वार्ड बढ़कर 31 हो गए हैं। हालांकि अभी शहर में शामिल वार्डों में टैक्स लागू नहीं है।
बकाया मिलने के बाद शहर के विकास में आएगी तेजी
नगर पालिका के अधिकारियों का मानना है कि टैक्स जमा कराने के पीछे की मंशा विकास कराने की भी है। यदि टैक्स जमा होगा तो शहर के मोहल्लों में और विकास कार्य कराए जा सकेंगे। पालिका का खजाना खाली होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकता है। इसलिए टैक्स जमा कराने के लिए स्वकर प्रणाली लागू की गई है, लेकिन इसको लेकर नागरिक गंभीर नहीं है। बड़े होटल, रेस्टोरेंट तक टैक्स जमा कराने में भी फिसड्डी हैं।
शत प्रतिशत टैक्स जमा कराने के लिए शहर में स्वकर प्रणाली लागू की गई है। इसके लिए गृहकर व जलकर जमा करने के लिए मोहल्लों में कैंप भी लगाए गए। संग्रह अमीनों को बड़े बकाएदारों के पास भेजा जा रहा है। इसके बाद भी लोग टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। नए मकानों को नंबर एलाट करने के पहले नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। मुदित सिंह, ईओ नगर पालिका
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नगर पालिका की ओर से स्वकर प्रणाली शुरू कर दी गई है लेकिन इसके बाद भी लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। पालिका ने नए मकान बनवाने के लिए लोगों की मुश्किलें बढ़ाते हुए शर्त रख दी है कि पहले टैक्स जमा करो, फिर इसके बाद नए मकान का नंबर एलाट किया जाएगा। शहर में तीन साल के अंदर करीब 700 नए मकान बने हैं। अधिकांश मकानों का टैक्स जमा न करने के कारण नंबर नहीं एलाट हो सका।
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इसके लिए लगातार मकान स्वामी नगर नालिका के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं उन पुराने मकानों की नकल भी पालिका अब जारी नहीं कर रहा। जिनका बड़ी मात्रा में गृहकर व जलकर बकाया है। यदि कोई गृहस्वामी बिना गृहकर व जलकर जमा किए मकान की नकल चाहते हैं तो अब उन्हें नहीं मिलेगी। पहले उन्हें बकाया गृहकर व जलकर जमा करना होगा। तभी उन्हें नगर पालिका प्रशासन की ओर से नकल जारी होगी।
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सवा करोड़ से अधिक है बकाया
नगर पालिका के 25 वार्डों में रहने वाले शहरियों के ऊपर करीब सवा करोड़ से अधिक रुपये गृहकर व जलकर का बकाया है। बकाया रुपये जमा कराने के लिए नगर पालिका द्वारा नोटिस पर नोटिस भेजी जा रही है। अमीनों को भी घर-घर दस्तक देने के लिए भेजा जा रहा है। मगर रुपये जमा करने में लोग आनाकानी कर रहे हैं। तमाम प्रयास के बाद भी नगर पालिका बकाया वसूलने में हांफ रही है।
पालिका कर्मचारी बाट रहे मकान मालिकों को फार्म
स्वकरण प्रणाली के तहत पालिका के कर्मियों की ओर से 25 वार्डों में रहने वाले लोगों के घरों में फार्म बांट दिए गए हैं। इन फार्मों में ही लोगों को लिखकर देना होगा कि उनके घर का टैक्स कितना हुआ है। इसी के हिसाब से उन्हें टैक्स जमा करना होगा। पहले शहर में 25 वार्ड थे। सीमा विस्तार के बाद शहर की आबादी बढ़कर सवा लाख हो गई और वार्ड बढ़कर 31 हो गए हैं। हालांकि अभी शहर में शामिल वार्डों में टैक्स लागू नहीं है।
बकाया मिलने के बाद शहर के विकास में आएगी तेजी
नगर पालिका के अधिकारियों का मानना है कि टैक्स जमा कराने के पीछे की मंशा विकास कराने की भी है। यदि टैक्स जमा होगा तो शहर के मोहल्लों में और विकास कार्य कराए जा सकेंगे। पालिका का खजाना खाली होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकता है। इसलिए टैक्स जमा कराने के लिए स्वकर प्रणाली लागू की गई है, लेकिन इसको लेकर नागरिक गंभीर नहीं है। बड़े होटल, रेस्टोरेंट तक टैक्स जमा कराने में भी फिसड्डी हैं।
शत प्रतिशत टैक्स जमा कराने के लिए शहर में स्वकर प्रणाली लागू की गई है। इसके लिए गृहकर व जलकर जमा करने के लिए मोहल्लों में कैंप भी लगाए गए। संग्रह अमीनों को बड़े बकाएदारों के पास भेजा जा रहा है। इसके बाद भी लोग टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। नए मकानों को नंबर एलाट करने के पहले नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। मुदित सिंह, ईओ नगर पालिका