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अस्पताल में भर्ती मरीज घर पर कर रहे आराम
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:16 AM IST
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प्रतापगढ़। जिला अस्पताल में मनमाना राज हो गया है। यहां आपरेशन के लिए आने वाले मरीज को दो दिन पहले लिखापढ़ी में भर्ती कर उन्हें घर भेज दिया जाता है। दो से तीन दिन बाद उन्हें बुलाकर ऑपरेशन किया जाता है। इसका लाभ आपराधिक किस्म के लोग भी उठा रहे हैं।
जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराने के लिए आने वाले मरीज को डॉक्टर तीन दिन पहले ही रजिस्टर में भर्ती कर लेते हैं। मरीज को लेटने के लिए बेड नहीं दिया जाता है। मरीज को तीन-चार दिन बाद इलाज करने के लिए बुलाया जाता है। ऐसे में कुछ मरीजों को जहां बीमारी के चलते परेशानी उठानी पड़ती है, वहीं आपराधिक किस्म के लोग इसका फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भर्ती होने के बाद आपराधिक किस्म के लोग घटना को अंजाम देने के लिए निकल जाते हैं।
वारदात के बाद वे अस्पताल आकर अपना इलाज कराना शुरू कर देते हैं। दो दिन भर्ती होने के बाद बगैर ऑपरेशन कराए घर भी लौट जाते हैं। पुलिस की छानबीन के बाद पता चलता है कि जिस व्यक्ति का नाम प्रकाश में आया है वह जिला अस्पताल में भर्ती था। सरकारी कागजात में फंसे होने के चलते पुलिस को परेशान होना पड़ता है और अंत में आपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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शुक्रवार को 12 मरीज भर्ती होकर गए घर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉक्टर बीपी सिंह और प्रेममोहन गुप्ता ने शुक्रवार को 12 से ज्यादा मरीज को ऑपरेशन करने के लिए वार्ड में भर्ती किया। मरीज वार्ड में पहुंच कर बीएसटी जमाकर भर्ती हो गए, मगर उनको रुकने के लिए बेड नहीं मिल पाया। अब चिकित्सकों ने उन्हें सोमवार को ऑपरेशन करने के लिए बुलाया है। इस दौरान उन्हें कुछ हो जाता है या फिर वे किसी घटना को अंजाम दे देते है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इनसेट---
पुलिस को नहीं दी जानकारी
अस्पताल छोड़कर घर चले जाने वाले मरीज के बारे में पुलिस को जानकारी देने के लिए जिला अस्पताल में पीआई पुस्तिका बनी है। मगर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पुलिस को जानकारी देना उचित नहीं समझते हैं। इसका कारण यह है कि भर्ती से लेकर मरीज को घर छोड़ने के लिए उनसे धन उगाही की जाती है।
भर्ती पर्चे पर स्टाफ नर्सें उल्लेख करती हैं कि मरीज बेड पर है या फिर अस्पताल छोड़ कर कहीं चला गया है। दो दिन पहले मरीज को भर्ती किया जाता है तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
आरडी द्विवेदी, सीएमएस जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराने के लिए आने वाले मरीज को डॉक्टर तीन दिन पहले ही रजिस्टर में भर्ती कर लेते हैं। मरीज को लेटने के लिए बेड नहीं दिया जाता है। मरीज को तीन-चार दिन बाद इलाज करने के लिए बुलाया जाता है। ऐसे में कुछ मरीजों को जहां बीमारी के चलते परेशानी उठानी पड़ती है, वहीं आपराधिक किस्म के लोग इसका फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भर्ती होने के बाद आपराधिक किस्म के लोग घटना को अंजाम देने के लिए निकल जाते हैं।
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वारदात के बाद वे अस्पताल आकर अपना इलाज कराना शुरू कर देते हैं। दो दिन भर्ती होने के बाद बगैर ऑपरेशन कराए घर भी लौट जाते हैं। पुलिस की छानबीन के बाद पता चलता है कि जिस व्यक्ति का नाम प्रकाश में आया है वह जिला अस्पताल में भर्ती था। सरकारी कागजात में फंसे होने के चलते पुलिस को परेशान होना पड़ता है और अंत में आपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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शुक्रवार को 12 मरीज भर्ती होकर गए घर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉक्टर बीपी सिंह और प्रेममोहन गुप्ता ने शुक्रवार को 12 से ज्यादा मरीज को ऑपरेशन करने के लिए वार्ड में भर्ती किया। मरीज वार्ड में पहुंच कर बीएसटी जमाकर भर्ती हो गए, मगर उनको रुकने के लिए बेड नहीं मिल पाया। अब चिकित्सकों ने उन्हें सोमवार को ऑपरेशन करने के लिए बुलाया है। इस दौरान उन्हें कुछ हो जाता है या फिर वे किसी घटना को अंजाम दे देते है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इनसेट---
पुलिस को नहीं दी जानकारी
अस्पताल छोड़कर घर चले जाने वाले मरीज के बारे में पुलिस को जानकारी देने के लिए जिला अस्पताल में पीआई पुस्तिका बनी है। मगर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पुलिस को जानकारी देना उचित नहीं समझते हैं। इसका कारण यह है कि भर्ती से लेकर मरीज को घर छोड़ने के लिए उनसे धन उगाही की जाती है।
भर्ती पर्चे पर स्टाफ नर्सें उल्लेख करती हैं कि मरीज बेड पर है या फिर अस्पताल छोड़ कर कहीं चला गया है। दो दिन पहले मरीज को भर्ती किया जाता है तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
आरडी द्विवेदी, सीएमएस जिला अस्पताल।