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होलिका दहन के लिए मिलेंगे 1 घंटा 39 मिनट
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:04 AM IST
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pratapgarh
- फोटो : प्रतापगढ़
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इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 12 मार्च स्रद्ध शाम 6 बजकर 23 मिनट का निकला है जो रात 8 बजकर 25 मिनट पर समाप्त हो रहा है। यानि होलिका दहन के लिए 1 घंटा 39 मिनट का समय रहेगा। इस बीच कभी भी होलिका में आग लगाई जा सकती है। रंग 13 मार्च को ही खेला जाएगा।
रंगों के त्योहार होली के नजदीक आते ही घर-घर में इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वैसे तो होली की तैयारी एक माह पहले ही शुरू हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन प्रतीक स्वरूप होलिका चौराहों और तिराहों पर गाड़ी जाती है। उसके एक महीने बाद फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन होलिका का दहन किया जाता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि मुहूर्त निकलने के बाद भी लोग अपनी मर्जी से होलिका में आग लगाते हैं। पंडितों का मानना है कि ऐसा नहंी करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज चौबे के मुताबिक विधिविधान से होलिका दहन करना फलदायी होता है। ऐसा करने वाले लोग भगवान विष्णु की कृपा के पात्र होते हैं। इस बार होलिका दहन 12 मार्च की शाम 6 बजकर 23 मिनट से शुरू हो होगा।
शहर में निर्मल तिराहा, रेलवे स्टेशन, अंबेडकर चौराहे, भंगवाचुंगी, निरंकारी मोड़, चिलबिला चौराहा, महुली, महुली मंडी व ओझला समेत कई स्थानों पर होलिका दहन की तैयारी की जा रही है। कई स्थानों पर तो बसंत पंचमी के दिन ही होलिका गाड़ दी गई थी। कुछ स्थानों पर दहन के दिन लकड़ी लगाई जाती है।
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होलिका दहन से पहले की जाती है पूजा
होलिका दहन से पहले उसकी पूजा की जाती है। होलिका के चारों तरफ जल लेकर लोग परिक्रमा करते हैं। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका में आग लगाई जाती है।
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रंगों के त्योहार होली के नजदीक आते ही घर-घर में इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वैसे तो होली की तैयारी एक माह पहले ही शुरू हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन प्रतीक स्वरूप होलिका चौराहों और तिराहों पर गाड़ी जाती है। उसके एक महीने बाद फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन होलिका का दहन किया जाता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि मुहूर्त निकलने के बाद भी लोग अपनी मर्जी से होलिका में आग लगाते हैं। पंडितों का मानना है कि ऐसा नहंी करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज चौबे के मुताबिक विधिविधान से होलिका दहन करना फलदायी होता है। ऐसा करने वाले लोग भगवान विष्णु की कृपा के पात्र होते हैं। इस बार होलिका दहन 12 मार्च की शाम 6 बजकर 23 मिनट से शुरू हो होगा।
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शहर में निर्मल तिराहा, रेलवे स्टेशन, अंबेडकर चौराहे, भंगवाचुंगी, निरंकारी मोड़, चिलबिला चौराहा, महुली, महुली मंडी व ओझला समेत कई स्थानों पर होलिका दहन की तैयारी की जा रही है। कई स्थानों पर तो बसंत पंचमी के दिन ही होलिका गाड़ दी गई थी। कुछ स्थानों पर दहन के दिन लकड़ी लगाई जाती है।
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होलिका दहन से पहले की जाती है पूजा
होलिका दहन से पहले उसकी पूजा की जाती है। होलिका के चारों तरफ जल लेकर लोग परिक्रमा करते हैं। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका में आग लगाई जाती है।