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डेढ़ दशक में करोड़पति बन गए लेखपाल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 16 Nov 2016 12:39 AM IST
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जिले के कुछ लेखपालों ने जमीन में हेरफेर का खेलकर करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। कहीं जमीन की नवैयत बदल दी तो कहीं किसी की जमीन किसी के नाम कर दी। बाद में समझौता कराया और लंबी रकम डकार गए। शहर और उससे आसपास के गांवों में यह खेल अब भी लगातार जारी है। काली कमाई से लेखपालों ने होटल-मॉल और आलीशान मकान खड़े कर लिए। इनकी कारगुजारी जानने के बाद भी अफसर इन पर मेहरबान हैं।
सदर तहसील में तैनात कई लेखपाल करीब डेढ़ दशक में करोड़पति बन गए। काली कमाई के जरिए बेनामी संपत्ति पर संपत्ति बनाते चले गए। शहर में ही आलीशान मॉल, होटल और कोठी तैयार कर ली। दहिलामऊ, जोगापुर, करनपुर, पूरे पितई, गोपालापुर, कुसमी, पूर्वी सहोदरपुर, सगरा, पूरे ईश्वरनाथ, रूपापुर, बेल्हा घाट, पठखौली, अचलपुर, कादीपुर समेत शहर के कई अन्य मोहल्लों में सरकारी जमीनों की नवैयत (कागाजों में आबादी घोषित) बदलकर उसे महंगे दामों में बेच दी। लेखपाल इतने पर ही नहीं रुके, वे विवादित जमीनों में बीच का रास्ता निकालने का काम करने लगे। चूंकि दोनों पक्ष अपने फेवर में लेखपालों के पास ही रिपोर्ट लगवाने के लिए आते हैं। इसका लेखपालों ने जमकर फायदा उठाया और उनके बीच लेनदेन के जरिए समझौता कराकर उस जमीन को अपने परिजनों के नाम करा लिया। बाद में प्लाटिंग कर महंगे दाम में बेच दिया।
गांव में रहने वाले ऐसे लेखपालों के परिवार का रहन सहन ही बदल गया। शहर के कई इलाके में लेखपालों की आलीशान कोठियां देखते ही बनती हैं। जानकारों की मानें तो जनपद में ऐसे लेखपालों की संख्या करीब 15 है। वे अपने परिवार या रिश्तेदारों को आगे कर उनके नाम से भी संपति खरीदते रहे। अगर केंद्र सरकार की मंशा अमल में आई इन लोगों का फंसना तय है। आयकर विभाग के अफसरों की मानें तो जनपद में करीब 70 हजार के करीब ही लोग आयकर देते हैं। पीएम की घोषणा के पहले ही आय से जुड़ी जांच की जा रही थी। अब इसमें तेजी आएगी। कुछ लेखपालों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
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सदर तहसील में तैनात कई लेखपाल करीब डेढ़ दशक में करोड़पति बन गए। काली कमाई के जरिए बेनामी संपत्ति पर संपत्ति बनाते चले गए। शहर में ही आलीशान मॉल, होटल और कोठी तैयार कर ली। दहिलामऊ, जोगापुर, करनपुर, पूरे पितई, गोपालापुर, कुसमी, पूर्वी सहोदरपुर, सगरा, पूरे ईश्वरनाथ, रूपापुर, बेल्हा घाट, पठखौली, अचलपुर, कादीपुर समेत शहर के कई अन्य मोहल्लों में सरकारी जमीनों की नवैयत (कागाजों में आबादी घोषित) बदलकर उसे महंगे दामों में बेच दी। लेखपाल इतने पर ही नहीं रुके, वे विवादित जमीनों में बीच का रास्ता निकालने का काम करने लगे। चूंकि दोनों पक्ष अपने फेवर में लेखपालों के पास ही रिपोर्ट लगवाने के लिए आते हैं। इसका लेखपालों ने जमकर फायदा उठाया और उनके बीच लेनदेन के जरिए समझौता कराकर उस जमीन को अपने परिजनों के नाम करा लिया। बाद में प्लाटिंग कर महंगे दाम में बेच दिया।
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गांव में रहने वाले ऐसे लेखपालों के परिवार का रहन सहन ही बदल गया। शहर के कई इलाके में लेखपालों की आलीशान कोठियां देखते ही बनती हैं। जानकारों की मानें तो जनपद में ऐसे लेखपालों की संख्या करीब 15 है। वे अपने परिवार या रिश्तेदारों को आगे कर उनके नाम से भी संपति खरीदते रहे। अगर केंद्र सरकार की मंशा अमल में आई इन लोगों का फंसना तय है। आयकर विभाग के अफसरों की मानें तो जनपद में करीब 70 हजार के करीब ही लोग आयकर देते हैं। पीएम की घोषणा के पहले ही आय से जुड़ी जांच की जा रही थी। अब इसमें तेजी आएगी। कुछ लेखपालों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
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