फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   government order creates tension for clerks

लिपिकों को सीखना ही होगा कंप्यूटर वर्ना वेतन वृद्धि नहीं

Sun, 29 Oct 2017 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 29 Oct 2017 11:46 PM IST
विज्ञापन
government order creates tension for clerks
Computer Market chandigarh - फोटो : अमर उजाला
सरकारी दफ्तर में मौज करने वाले बाबुओं पर शासन ने शिकंजा कसते हुए उन्हें कम्प्यूटर सीखने का अंतिम मौका दिया है। शासन ने आदेश दिया है कि तीन माह में कर्मचारी कम्प्यूटर चलाना सीख लें नहीं तो उन्हें वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। साथ ही उनकी कुर्सी भी छिन सकती है।
विज्ञापन


सरकारी आफिसों का कंप्यूटरीकरण तेजी से हो रहा है। अब कोई भी कार्य रजिस्टर में नहीं होगा। बल्कि कम्प्यूटर से आनलाइन होगा। जिले के विभिन्न कार्यालयों में तैनात 9412 लिपिको को अब आनलाइन फीडिंग तत्काल करनी होगी। सूचनाओं का आदान और प्रदान अब ऑफलाइन नहीं बल्की ऑनलाइन तत्काल करना होगा। रजिस्टर पर उन्हें लिखने पढ़ने से छुटकारा मिल जाएगा। शासन का यह फरमान बेल्हा में पहुंचते ही उन कर्मचारियों की सांस फूलने लगी हैं जो 50 की उम्र पार कर चुके हैं और कम्प्यूटर से अनभिज्ञ हैं। जिले में कई विभाग ऐसे भी जहां कम्प्यूटर ही नहीं हैं। जहां ऑनलाइन फीडिंग कर्मचारी साइबर कैफे पर कराते हैं। इससे लगभग साढ़े तीन हजार सरकारी कर्मचारी परेशान हैं। वे रिटायरमेंट के करीब पहुंच गए हैं। अबततक ज्यादातर विभागों में दो से तीन ऑपरेटर की तैनाती संविदा पर हुई थी मगर सरकार अब उसे भी खत्म करने की तैयारी में है। इसके चलते जिन कर्मचारियों और अफसरों को कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं है उन्हें तीन माह का मौका दूसरी बार दिया गया है। एक बार पहले कर्मचारियों को मौका शासन की ओर से तीन माह का दिया गया था। समस्त विभाग में कैंप लगाकर लिपिक (बाबू) के पद पर काम करने वाले कर्मचारियों को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग भी दी गई थी। इसमें भी कुछ ही लोगों ने कंप्यूटर चलाना सीखा था। मुख्यालय पर काम करने वाले लगभग हजार से डेढ़ हजार ऐसे कर्मचारी हैं जो 50 की उम्र पार कर चुके हैं। कम्प्यूटर पर वे काम नहीं कर पाते हैँ। मगर तहसील और ब्लाक स्तर पर देखा जाए तो ज्यादातर लिपिक आज भी ऑपरेटर के भरोसे काम कर रहे हैं। दिन भर का व्यौरा शाम को ऑपरेटर को बुलाकर कम्प्यूटर पर फीड करवाकर उसे ऑनलाइन करते हैं। तब कहीं जाकर अफसरों को दिन भर के कार्यो की जानकारी हो पाती है। स्वास्थ्य विभाग के सीएचसी और पीएचसी पर तैनात ज्यादातर कर्मचारी आज भी आनलाइन की जगह ऑफलाइन काम करते हैं। सप्ताह भर बाद कागज पर रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ ऑफिस भेज दी जाती है। यहां से उसे ऑनलाइन किया जाता है।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed