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प्राइवेट प्रैक्टिस छोड़िए, यहां सरकारी डॉक्टरों के भरोसे चल रहे निजी अस्पताल
Sun, 16 Jun 2019 12:45 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 16 Jun 2019 12:45 AM IST
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जिले के ज्यादातर निजी अस्पताल सरकारी डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहे हैं। नर्सिंगहोम और प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर आपरेेशन से लेकर ओपीडी तक सब संभाल रहे हैं। कुछ निजी अस्पताल तो सरकारी डाक्टरों के ही हैं, लेकिन सरकारी सेवा में होने के कारण उन्होंने किसी और के नाम पर रजिस्ट्रेशन करा रखा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने को लेकर सख्त हैं, लेकिन यहां सब कुछ स्वास्थ्य विभाग की रजामंदी से चल रहा है। सीएमओ ने सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर रखी हैं। डाक्टर, एमआर, दवा कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मरीजों को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है।
जिले में 34 निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इनमे से एक भी अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर नहीं है। सात अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो किसी में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन समेत अन्य चिकित्सक भी नहीं हैं। तीन नर्सिंगहोम को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पतालों में प्रसव पीड़िताओं को ही भर्ती किया जाता है। नार्मल या फिर सीजर प्रसव कराया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की ही मानें तो शहर में संचालित हो रहे ज्यादातर नर्सिंगहोम में जिला व महिला अस्पताल में तैनात सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर ऑपरेशन करने के लिए जाते हैं। वहीं ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में सीएचसी में तैनात सर्जन ऑपरेशन करने जाते हैं।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने को लेकर सख्त हैं, लेकिन यहां सब कुछ स्वास्थ्य विभाग की रजामंदी से चल रहा है। सीएमओ ने सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर रखी हैं। डाक्टर, एमआर, दवा कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मरीजों को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है।
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जिले में 34 निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इनमे से एक भी अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर नहीं है। सात अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो किसी में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन समेत अन्य चिकित्सक भी नहीं हैं। तीन नर्सिंगहोम को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पतालों में प्रसव पीड़िताओं को ही भर्ती किया जाता है। नार्मल या फिर सीजर प्रसव कराया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की ही मानें तो शहर में संचालित हो रहे ज्यादातर नर्सिंगहोम में जिला व महिला अस्पताल में तैनात सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर ऑपरेशन करने के लिए जाते हैं। वहीं ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में सीएचसी में तैनात सर्जन ऑपरेशन करने जाते हैं।
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