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दिवाली से करें अच्छे दिनों की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:22 PM IST
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दिवाली नई-नई सौगातों का त्यौहार है। मान्यता है कि दिवाली से जिस काम की शुरुआत की जाती है पूरे साल उसका असर उसके जीवन और परिवार के सदस्यों पर रहता है। ज्योतिषों का कहना है कि साल भर अच्छे दिन चाहिए तो दिवाली पर अच्छे काम की शुरुआत कीजिए।
वैसे तो दिवाली हर साल हिंदुओं के साथ अन्य धर्म के लोग भी मनाते हैं। पंडित रामराज चौबे के मुताबिक, हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो इस भी त्योहार पर अच्छे-बुरे काम करेंगे वही पूरे साल भर करेगा। यही वजह है कि लोग इस पर्व पर नए बर्तन, चांदी के सिक्के और ज्वैलरी की खरीदारी करते हैं, ताकि साल बाकी के दिन भी इसी तरह से हंसी-खुशी के बीच अच्छे से बीते। वैसे दिवाली मनाने के पीछे कई मान्यताएं और धार्मिक महत्व हैं। मान्यता है कि आज के दिन भगवान श्रीराम लंका के राक्षस राजा रावण को हराकर अयोध्या लौटे थे। अयोध्या की प्रजा ने दीयों को रोशन कर उनका स्वागत किया था। आतिशबाजी भी हुई थी। समुद्र मंथन के समय लक्ष्मीजी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। बारह साल का निष्कासन समाप्त होने के बाद पांडवों को उनका राज दिवाली के दिन ही मिला था।
तैयारियों में जुटे जैन, गुजराती और सिख परिवारः दिवाली का त्योहार हिंदुओं और अन्य धर्म जैसे जैन, मारवाड़ी, गुजराती, सिख धर्म के लोगों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बेल्हा में इन धर्मों के लोगों भी काफी संख्या में रहते हैं। जो इस साल दिवाली के त्योहार को हर्षोल्लास के साथ परंपरागत तरीके से मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
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झालर और दीयों से जगमगाएंगे मंदिर
तीर्थंकर महावीर जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई। रतन जैन बताते हैं कि जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दिवाली के रूप में मनाएंगे। जैन मंदिरों को झालरों और दीयों से रोशन किया जाएगा।मारवाड़ी मनाएंगे नया साल- हिंदू कैलेंडर के अनुसार मारवाड़ी अश्विन कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर महान हिंदू त्योहार पर दिवाली पर अपने नए साल का जशभन मनाते हैं। विष्णु खंडेलवाल का कहना है इस बार बेल्हा का मारवाड़ी समाज दिवाली को लेकर काफी उत्साहित है। गुजरातियों के लिए भी नया साल है।
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वैसे तो दिवाली हर साल हिंदुओं के साथ अन्य धर्म के लोग भी मनाते हैं। पंडित रामराज चौबे के मुताबिक, हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो इस भी त्योहार पर अच्छे-बुरे काम करेंगे वही पूरे साल भर करेगा। यही वजह है कि लोग इस पर्व पर नए बर्तन, चांदी के सिक्के और ज्वैलरी की खरीदारी करते हैं, ताकि साल बाकी के दिन भी इसी तरह से हंसी-खुशी के बीच अच्छे से बीते। वैसे दिवाली मनाने के पीछे कई मान्यताएं और धार्मिक महत्व हैं। मान्यता है कि आज के दिन भगवान श्रीराम लंका के राक्षस राजा रावण को हराकर अयोध्या लौटे थे। अयोध्या की प्रजा ने दीयों को रोशन कर उनका स्वागत किया था। आतिशबाजी भी हुई थी। समुद्र मंथन के समय लक्ष्मीजी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। बारह साल का निष्कासन समाप्त होने के बाद पांडवों को उनका राज दिवाली के दिन ही मिला था।
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तैयारियों में जुटे जैन, गुजराती और सिख परिवारः दिवाली का त्योहार हिंदुओं और अन्य धर्म जैसे जैन, मारवाड़ी, गुजराती, सिख धर्म के लोगों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बेल्हा में इन धर्मों के लोगों भी काफी संख्या में रहते हैं। जो इस साल दिवाली के त्योहार को हर्षोल्लास के साथ परंपरागत तरीके से मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
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झालर और दीयों से जगमगाएंगे मंदिर
तीर्थंकर महावीर जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई। रतन जैन बताते हैं कि जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दिवाली के रूप में मनाएंगे। जैन मंदिरों को झालरों और दीयों से रोशन किया जाएगा।मारवाड़ी मनाएंगे नया साल- हिंदू कैलेंडर के अनुसार मारवाड़ी अश्विन कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर महान हिंदू त्योहार पर दिवाली पर अपने नए साल का जशभन मनाते हैं। विष्णु खंडेलवाल का कहना है इस बार बेल्हा का मारवाड़ी समाज दिवाली को लेकर काफी उत्साहित है। गुजरातियों के लिए भी नया साल है।