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अब ग्रामीणों की मुट्ठी में भी होगी दुनिया
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:27 AM IST
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गांव के लोगों की भी दुनिया अब ग्लोबल होगी। अपनी स्वयं की ग्राम सभा में ही इंटरनेट के माध्यम से उन्हें सारी जानकारियां मुहैया होंगी। यही नहीं खतौनी से लेकर आय, जाति और जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र भी वहीं प्राप्त हो जाएंगे। इसके लिए बीएसएनएल की सहकंपनी बीबीएनएल हर गांव के पंचायत भवन तक इंटरनेट का केबिल पहुंचा रही है।
गांव में ही खतौनी मिल जाए, गांव में ही आय, जाति और निवास सहित जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन हो जाए। यही नहीं यह सारे प्रमाण पत्र गांव में ही मिल भी जाएं और कर्मचारियों के चक्कर न लगाने पड़े तो यह कितना अच्छा होगा। यह सबकुछ सच होने वाला है।
जल्द ही गांव के पंचायत भवन से ही यह सारी व्यवस्था मिलने लगेगी। बस गांव के पंचायत भवन और उसमें लगने वाले सामानों की सुरक्षा की व्यवस्था हो जाए। इसके बाद गांव के लोगों को इंटरनेट जैसी सुविधा के लिए कहीं दूर नहीं जाना होगा। बीएसएनएल की सहकंपनी बीबीएनएल का केबिल कुंडा क्षेत्र के 64 गांवों के सचिवालय तक पहुंच चुका है। यह कंपनी सिर्फ इंटरनेट की ही व्यवस्था देती है। इसकी स्पीड भी इतनी रहेगी कि पलक झपके ही किसी भी तरह की जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी। इससे न सिर्फ 25 किलोमीटर दूर तहसील जाकर खतौनी के लिए चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि हर तरह की जानकारी भी आसानी से गांव बैठे ही मुहैया हो जाएगी। इसका कार्य तो करीब तीन साल से चल रहा था लेकिन अब जाकर यह धरातल पर उतरा है।
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गांव में ही खतौनी मिल जाए, गांव में ही आय, जाति और निवास सहित जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन हो जाए। यही नहीं यह सारे प्रमाण पत्र गांव में ही मिल भी जाएं और कर्मचारियों के चक्कर न लगाने पड़े तो यह कितना अच्छा होगा। यह सबकुछ सच होने वाला है।
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जल्द ही गांव के पंचायत भवन से ही यह सारी व्यवस्था मिलने लगेगी। बस गांव के पंचायत भवन और उसमें लगने वाले सामानों की सुरक्षा की व्यवस्था हो जाए। इसके बाद गांव के लोगों को इंटरनेट जैसी सुविधा के लिए कहीं दूर नहीं जाना होगा। बीएसएनएल की सहकंपनी बीबीएनएल का केबिल कुंडा क्षेत्र के 64 गांवों के सचिवालय तक पहुंच चुका है। यह कंपनी सिर्फ इंटरनेट की ही व्यवस्था देती है। इसकी स्पीड भी इतनी रहेगी कि पलक झपके ही किसी भी तरह की जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी। इससे न सिर्फ 25 किलोमीटर दूर तहसील जाकर खतौनी के लिए चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि हर तरह की जानकारी भी आसानी से गांव बैठे ही मुहैया हो जाएगी। इसका कार्य तो करीब तीन साल से चल रहा था लेकिन अब जाकर यह धरातल पर उतरा है।
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