{"_id":"58922adc4f1c1b232ae80018","slug":"gas-price-rise-of-one-hundred-twenty","type":"story","status":"publish","title_hn":"हद है ! 15 महीने में 121 रुपये बढ़ गया रसोई गैस का दाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हद है ! 15 महीने में 121 रुपये बढ़ गया रसोई गैस का दाम
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:21 AM IST
विज्ञापन
गैस
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पीएम मोदी की अपील पर लाखों की संख्या में लोगों ने गैस सब्सिडी तो छोड़ दी लेकिन जिस रफ्तार से रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं उससे अब तमाम लोग अब गैस सब्सिडी छोड़ने के फैसले पर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बीते 15 माह की बात करें तो इलाहाबाद में रसोई गैस के दाम में अब तक 121 रुपये का इजाफा हो चुका है। बार-बार रसोई गैस के दाम बढ़ने से गृहणियां भी खासी निराश हैं। अधिकांश का यही मानना है कि अगर रसोई गैस के दाम में वृद्धि करनी भी है तो उसे हर माह न करके वर्ष में एक या दो बार ही किया जाए।
एक फरवरी से इलाहाबाद में रसोई गैस का दाम 704.50 रुपये हो गया है, जबकि 31 जनवरी तक रसोई गैस का दाम 637.50 रुपये था। रसोई गैस के दाम में 67 रुपये की वृद्धि किए जाने से उपभोक्ता खासे निराश हैं। बता दें कि अक्तूबर 2015 में रसोई गैस का दाम 583 रुपये था। शिक्षिका एवं गृहणी सौम्या मालवीय का कहना है कि पीएम मोदी के आह्वान पर स्वेच्छा से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ दी थी लेकिन बार-बार रसोई गैस के दाम में हो रही वृद्धि से लगता है कि हमें सब्सिडी नहीं छोड़नी चाहिए थी। गृहणी पूर्णिमा श्रीवास्तव ने कहा कि गैस के दाम बढ़ने से घर के बजट पर तो खास फर्क नहीं पड़ना है लेकिन हर माह रसोई गैस का दाम बढ़ाना ठीक नहीं है।
साउथ मलाका में रहने वाली गृहणी रुचि छावड़ा ने भी हर माह गैस के दाम में वृद्धि किए जाने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस तरह से वर्ष में एक बार केंद्र सरकार बजट पेश करती है उसी तरह वर्ष में एक बार ही रसोई गैस और डीजल-पेट्रोल आदि के ज्यादा या कम दाम करने चाहिए। सिविल लाइंस की पल्लवी जैन ने भी रसोई गैस के दाम बढ़ने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि उनके घर में हर माह दो सिलेंडर की खपत है। बार-बार दाम बढ़ने से घर के बजट पर भी फर्क पड़ता है।
एक फरवरी से इलाहाबाद में रसोई गैस का दाम 704.50 रुपये हो गया है, जबकि 31 जनवरी तक रसोई गैस का दाम 637.50 रुपये था। रसोई गैस के दाम में 67 रुपये की वृद्धि किए जाने से उपभोक्ता खासे निराश हैं। बता दें कि अक्तूबर 2015 में रसोई गैस का दाम 583 रुपये था। शिक्षिका एवं गृहणी सौम्या मालवीय का कहना है कि पीएम मोदी के आह्वान पर स्वेच्छा से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ दी थी लेकिन बार-बार रसोई गैस के दाम में हो रही वृद्धि से लगता है कि हमें सब्सिडी नहीं छोड़नी चाहिए थी। गृहणी पूर्णिमा श्रीवास्तव ने कहा कि गैस के दाम बढ़ने से घर के बजट पर तो खास फर्क नहीं पड़ना है लेकिन हर माह रसोई गैस का दाम बढ़ाना ठीक नहीं है।
विज्ञापन
साउथ मलाका में रहने वाली गृहणी रुचि छावड़ा ने भी हर माह गैस के दाम में वृद्धि किए जाने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस तरह से वर्ष में एक बार केंद्र सरकार बजट पेश करती है उसी तरह वर्ष में एक बार ही रसोई गैस और डीजल-पेट्रोल आदि के ज्यादा या कम दाम करने चाहिए। सिविल लाइंस की पल्लवी जैन ने भी रसोई गैस के दाम बढ़ने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि उनके घर में हर माह दो सिलेंडर की खपत है। बार-बार दाम बढ़ने से घर के बजट पर भी फर्क पड़ता है।
विज्ञापन