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डाकघर में एएसपी ने मेडिकल क्लेम लेने वालों की फाइल रोकी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 29 Mar 2016 11:24 PM IST
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प्रधान डाकघर में मेडिकल क्लेम लेने वालों का लंबा चौड़ा बिल देखकर अधिकारी दंग रह गए हैं। एएसपी ने इस तरह के बिलों पर शंका जाहिर करते हुए उनके भुगतान पर रोक लगा दी है। फाइलों को वेरीफिकेशन के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी जिला अस्पताल के भेज दिया गया है। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की बीमारी पर आने वाले खर्च को डाकविभाग वहन करता है। इसके लिए कर्मचारी को मेडिकल क्लेम करना होता है।
उसके बाद ही अधिकारी इसका भुगतान करने का आदेश पारित करते हैं। सूत्रों के अनुसार डाकघर के कुछ कर्मचारियों ने डेढ़ से दो लाख रुपये का मेडिकल क्लेम बनाकर विभाग को पेमेंट के लिए दिया है। जब यह फाइल सहायक प्रवर डाक अधीक्षक के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंची तो उसको देखकर उनका माथा ठनक गया। जिस दवा का मूल्य उसमें लिखा था वो काफी महंगी थी। जो क्लेम कर्मचारियों ने किया है उसमें फोर्टान जैसा महंगा इंजेक्शन भी शामिल है। यह इंजेक्शन ताकत का है। एक की कीमत पांच हजार रुपये के आस-पास है। मजे की बात है कि यह इंजेक्शन सभी को लगाया गया है।
ओपीडी में हुआ इलाज
मजे की बात यह है कि मेडिकल क्लेम के लिए जिन लोगों ने दावा किया है उनका इलाज जिला अस्पताल के ओपीडी में हुआ है। यही से शंका शुरू होती है। डाकघर के अधिकारियों का कहना है कि इंडोर का बिल होता तो बात समझ में आती। मगर ओपीडी में डेढ़ से दो लाख रुपये की दवा का बिल बात समझ में नहीं आ रहा। उसमें से फोर्टान का इंजेक्शन लगना बिल को शंका के दायरे में ला देता है। चर्चा है कि जो बिल बनाया गया है उसको अस्पताल के ही किसी डॉक्टर ने पास कर दिया है। अब इस बिल का भुगतान लेने के लिए फाइल एएसपी के पास भेजी गई है। इस बारे में एएसपी पीसी तिवारी का कहना है कि उनको मेडिकल क्लेम वाले कुछ बिलों पर शंका है। ये बिल डेढ़ से दो लाख रुपये के हैं। इनके भुगतान पर आपत्ति लगा दी है। इसका वेरीफिकेशन के लिए सीएमएस जिला अस्पताल के पास भेजा गया है।
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उसके बाद ही अधिकारी इसका भुगतान करने का आदेश पारित करते हैं। सूत्रों के अनुसार डाकघर के कुछ कर्मचारियों ने डेढ़ से दो लाख रुपये का मेडिकल क्लेम बनाकर विभाग को पेमेंट के लिए दिया है। जब यह फाइल सहायक प्रवर डाक अधीक्षक के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंची तो उसको देखकर उनका माथा ठनक गया। जिस दवा का मूल्य उसमें लिखा था वो काफी महंगी थी। जो क्लेम कर्मचारियों ने किया है उसमें फोर्टान जैसा महंगा इंजेक्शन भी शामिल है। यह इंजेक्शन ताकत का है। एक की कीमत पांच हजार रुपये के आस-पास है। मजे की बात है कि यह इंजेक्शन सभी को लगाया गया है।
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ओपीडी में हुआ इलाज
मजे की बात यह है कि मेडिकल क्लेम के लिए जिन लोगों ने दावा किया है उनका इलाज जिला अस्पताल के ओपीडी में हुआ है। यही से शंका शुरू होती है। डाकघर के अधिकारियों का कहना है कि इंडोर का बिल होता तो बात समझ में आती। मगर ओपीडी में डेढ़ से दो लाख रुपये की दवा का बिल बात समझ में नहीं आ रहा। उसमें से फोर्टान का इंजेक्शन लगना बिल को शंका के दायरे में ला देता है। चर्चा है कि जो बिल बनाया गया है उसको अस्पताल के ही किसी डॉक्टर ने पास कर दिया है। अब इस बिल का भुगतान लेने के लिए फाइल एएसपी के पास भेजी गई है। इस बारे में एएसपी पीसी तिवारी का कहना है कि उनको मेडिकल क्लेम वाले कुछ बिलों पर शंका है। ये बिल डेढ़ से दो लाख रुपये के हैं। इनके भुगतान पर आपत्ति लगा दी है। इसका वेरीफिकेशन के लिए सीएमएस जिला अस्पताल के पास भेजा गया है।
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