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चार स्लीपर गायब होने के बावजूद दो दिन दौड़ती रहीं ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:23 AM IST
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प्रतापगढ़-इलाहाबाद रेलखंड पर मालगोदाम के सामने ट्रैक के नीचे से दो दिन तक चार स्लीपर गायब रहे। चार स्लीपर गायब किए जाने की घटनासे स्थानीय रेल प्रशासन अनजान बना रहा और इस रूट पर गाड़ियां दौड़ती रहीं। गनीमत रही कि इस घोर लापरवाही के बावजूद कोई हादसा नहीं हुआ। ताज्जुब तो यह कि इंजीनियरिंग विभाग और आरपीएफ के लोग भी इस घटना से अंजान बने रहे।
नया मालगोदाम रेलवे क्रॉसिंग से दक्षिण दिशा में इलाहाबाद रेल मार्ग पर मालगोदाम के सामने 28 मार्च की रात चार स्लीपर गायब हो गये। इंजीनियरिंग विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दो दिन बाद जब अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने 30 मार्च को बिना किसी को बताये गायब स्लीपर के स्थान पर नया स्लीपर डाल दिया। खास बात यह रही कि चार स्लीपर गायब हो गए पर पटरी को चेक करने वाले कीमैन, गैंगमैन की नजर इस पर नहीं पड़ी। घटनास्थल से चंद कदम की दूरी पर रेलवे का मालगोदाम है, जहां पर रोज कर्मचारियों का आना-जाना होता है।
इस बारे में जब अधिकारियों से बात की गई तो वह भी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। डीईएन अर्जुन सिंह ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका सेक्शन नहीं है। चीफ पीडब्ल्यूआई आरएस चौधरी का है। जबकि आरएस चौधरी बोले कि पिछले तीन चार दिन से उनका काम अंतू में चल रहा है। उनके सारे कर्मचारी पीडब्ल्यूआई के साथ वहां पर जमे हुए हैं। ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। रेलकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस घटना की सूचना आरपीएफ को मौखिक रूप से दी गई थी। मगर, आरपीएफ ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस बारे में आरपीएफ इंस्पेक्टर को फोन किया गया मगर उनका फोन नहीं उठा।
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नया मालगोदाम रेलवे क्रॉसिंग से दक्षिण दिशा में इलाहाबाद रेल मार्ग पर मालगोदाम के सामने 28 मार्च की रात चार स्लीपर गायब हो गये। इंजीनियरिंग विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दो दिन बाद जब अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने 30 मार्च को बिना किसी को बताये गायब स्लीपर के स्थान पर नया स्लीपर डाल दिया। खास बात यह रही कि चार स्लीपर गायब हो गए पर पटरी को चेक करने वाले कीमैन, गैंगमैन की नजर इस पर नहीं पड़ी। घटनास्थल से चंद कदम की दूरी पर रेलवे का मालगोदाम है, जहां पर रोज कर्मचारियों का आना-जाना होता है।
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इस बारे में जब अधिकारियों से बात की गई तो वह भी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। डीईएन अर्जुन सिंह ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका सेक्शन नहीं है। चीफ पीडब्ल्यूआई आरएस चौधरी का है। जबकि आरएस चौधरी बोले कि पिछले तीन चार दिन से उनका काम अंतू में चल रहा है। उनके सारे कर्मचारी पीडब्ल्यूआई के साथ वहां पर जमे हुए हैं। ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। रेलकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस घटना की सूचना आरपीएफ को मौखिक रूप से दी गई थी। मगर, आरपीएफ ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस बारे में आरपीएफ इंस्पेक्टर को फोन किया गया मगर उनका फोन नहीं उठा।
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