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मुसाफिरों को नहीं मालूम था होटल का रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 19 Jun 2015 11:36 PM IST
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होटल रेजीडेंसी की बाहरी चमक-दमक देख वहां ठहरने वाले मुसाफिरों को नहीं मालूम था कि बृहस्पतिवार की रात उनके लिए आखिरी रात होगी। उन लोगों को होटल से निकलने का रास्ता तक नहीं मालूम था। हर तरफ फैले धुएं ने लोगों को कमरे में कैद कर दिया। वहां अग्निशमन यंत्र था लेकिन उसे चलाने वाले कर्मचारी अपनी जान बचाकर भागते नजर आए। जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी आग पर काबू पाती, तब तक दस लोगों की मौत हो चुेकी थी।
शहर के मशहूर कारोबारी सुनील गोयल के होटल रेजीडेंसी की बाहरी बनावट लोगों को मोह लेती थी। यह बात अलग है कि भीतर कोई खास सुविधा नहीं थी। बृहस्पतिवार रात होटल के 12 कमरों में मुसाफिर रुके थे। वे आग लगने की घटना से अनजान गहरी नींद में सो रहे थे। जब कमरों में धुआं भरने लगा तो सांस फूलने से लोगों की नींद टूटी। दम घुटने लगा तो लोग गिरते-पड़ते होटल से बाहर निकलने के लिए भागने लगे लेकिन बाहर से आए मुसाफिरों को नहीं मालूम था कि किस दरवाजे से बाहर निकलें। हर तरफ आग और धुआं था। कर्मचारी होटल से बाहर निकलने के रास्तों से परिचत थे लेकिन अपनी जान सांसत में देख मुसाफिरों को अकेला छोड़ कर्मचारी वहां से सुरक्षित बाहर निकल भागे।
होटल के कर्मचारी अमित ने बताया कि वे अपनी जान जोखिम में देख बाहर की ओर भागे। राकेश, दीपक, मनोज आशुतोष तो छत पर पहुंच गए और फिर बगल के मकान की छत पर कूद कर नीचे उतरने लगे। हालांकि आग के कारण वहां से भी बाहर निकलना आसान नहीं था लेकिन नीचे मौजूद कुछ लोगों ने केबल तार ऊपर की तरफ फेंक दिया, जिसे पकड़कर कर्मचारी नीचे उतरे। इसमें कुछ कर्मचारी घायल भी हो गए। दूसरी ओर मुसाफिर अपने कमरों में ही फंसे रहे। धुएं के गुबार से उनका दम घुट रहा था। इस बीच मुहल्ले के पंकज, गंगू, राजेश मौर्य, योगेश सहित आधा दर्जन युवाओं ने हौसला दिखाया और फायर ब्रिगेड कर्मियों के साथ मिलकर कुछ लोगों को होटल से बाहर सुरक्षित निकाल लिया।
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शहर के मशहूर कारोबारी सुनील गोयल के होटल रेजीडेंसी की बाहरी बनावट लोगों को मोह लेती थी। यह बात अलग है कि भीतर कोई खास सुविधा नहीं थी। बृहस्पतिवार रात होटल के 12 कमरों में मुसाफिर रुके थे। वे आग लगने की घटना से अनजान गहरी नींद में सो रहे थे। जब कमरों में धुआं भरने लगा तो सांस फूलने से लोगों की नींद टूटी। दम घुटने लगा तो लोग गिरते-पड़ते होटल से बाहर निकलने के लिए भागने लगे लेकिन बाहर से आए मुसाफिरों को नहीं मालूम था कि किस दरवाजे से बाहर निकलें। हर तरफ आग और धुआं था। कर्मचारी होटल से बाहर निकलने के रास्तों से परिचत थे लेकिन अपनी जान सांसत में देख मुसाफिरों को अकेला छोड़ कर्मचारी वहां से सुरक्षित बाहर निकल भागे।
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होटल के कर्मचारी अमित ने बताया कि वे अपनी जान जोखिम में देख बाहर की ओर भागे। राकेश, दीपक, मनोज आशुतोष तो छत पर पहुंच गए और फिर बगल के मकान की छत पर कूद कर नीचे उतरने लगे। हालांकि आग के कारण वहां से भी बाहर निकलना आसान नहीं था लेकिन नीचे मौजूद कुछ लोगों ने केबल तार ऊपर की तरफ फेंक दिया, जिसे पकड़कर कर्मचारी नीचे उतरे। इसमें कुछ कर्मचारी घायल भी हो गए। दूसरी ओर मुसाफिर अपने कमरों में ही फंसे रहे। धुएं के गुबार से उनका दम घुट रहा था। इस बीच मुहल्ले के पंकज, गंगू, राजेश मौर्य, योगेश सहित आधा दर्जन युवाओं ने हौसला दिखाया और फायर ब्रिगेड कर्मियों के साथ मिलकर कुछ लोगों को होटल से बाहर सुरक्षित निकाल लिया।
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