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पछुवा की चाल ने बरपाया सिटकहा में कहर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 07 Jun 2015 11:34 PM IST
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पछुवा हवा की चाल ने सिटकहा पूरे खुशई में जमकर कहर बरपाया। आग की ऊंची लपटें उठते देख लोगों की जान अटक गई। यदि आग पर समय से काबू न पाया जाता तो कई और परिवार तबाह हो जाते। सिटकहा में आग ने विकराल रूप धारण कर 16 परिवार के लोगों को बेघर कर दिया। खून पसीने से बनाई गई गृहस्थी पलभर में ही राख के ढेर में तब्दील हो गई। पारस के घर लगी आग को काबू में करने का लोगों ने प्रयास किया, लेकिन चिलचिलाती धूप में पछुवा हवा ने ऐसा रूप धारण किया कि लोगों की जान ही अटक गई। तेज हवा से आग पल भर में ही भयंकर हो गई। हवा के साथ आग की लपटें इधर से उधर घूमते ही दूर छप्परों को भी अपने आगोश में लेती रहीं।
हवा की चाल ने लोगों को अपनी गृहस्थी का सामान निकालने तक का मौका भी नहीं दिया। बस्ती के इर्द-गिर्द बने पक्के मकान वाले भी दहल गए। वे भयभीत थे कि समय पर आग न बुझी तो उनका घर भी आग के आगोश में आ सकता है। ऐसे में कई परिवार के लोग अपने घरों में जलने वाले सामान को हटाने व उसे पानी से भिगोने लगे। बस्ती के लोगों ने इस हालात में भी धैर्य नही खोया और आग बुझाने के लिए भरसक प्रयास करते रहे। यदि फायरब्रिगेड समय पर पहुंच गई होती तो शायद कई घर जलने से बचाए जा सकते। मोहनगंज बाजार के लोग भी आग बुझाने के लिए पहुंचे थे। वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग से गुजर रहे राहगीर भी अगिभनकांड पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचते रहे।
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हवा की चाल ने लोगों को अपनी गृहस्थी का सामान निकालने तक का मौका भी नहीं दिया। बस्ती के इर्द-गिर्द बने पक्के मकान वाले भी दहल गए। वे भयभीत थे कि समय पर आग न बुझी तो उनका घर भी आग के आगोश में आ सकता है। ऐसे में कई परिवार के लोग अपने घरों में जलने वाले सामान को हटाने व उसे पानी से भिगोने लगे। बस्ती के लोगों ने इस हालात में भी धैर्य नही खोया और आग बुझाने के लिए भरसक प्रयास करते रहे। यदि फायरब्रिगेड समय पर पहुंच गई होती तो शायद कई घर जलने से बचाए जा सकते। मोहनगंज बाजार के लोग भी आग बुझाने के लिए पहुंचे थे। वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग से गुजर रहे राहगीर भी अगिभनकांड पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचते रहे।
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