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Pratapgarh News: ताले में खाद, कतार में किसान
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लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद
रबी फसलों की बोआई का समय आ गया है। किसान यूरिया और डीएपी खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। क्योंकि जिले की साधन सहकारी समितियों में ताला लटका है। सचिव और अन्य कर्मी एक वर्ष से वेतन भुगतान न होने से हड़ताल पर हैं। किसानों को निजी दुकानों पर महंगे दामों में खाद खरीदनी पड़ रही है।
जिले में धान फसल की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब गेहूं और आलू के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा किसान सरसों, मटर, चना, जौ की भी खेती करते हैं। यह समय आलू और गेहूं की बोआई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है लेकिन किसानों के सामने खाद का संकट है।
खाद लेने के लिए समिति पर पहुंचने वाले किसानों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं, कुछ समितियों में खाद मिल रही है। यहां किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। भोर से ही किसान समितियों में पर पहुंच रहे हैं।
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सेवानिवृत्त कर्मियों को भी नहीं मिला वेतन
साधन सहकारी समिति सचिव परिषद के जिलाध्यक्ष निर्भय पांडेय ने बताया कि कई ऐसे कर्मचारी भी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक साल से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कार्यरत कर्मियों का भी वेतन रुका है। इसी की मांग को लेकर कर्मी 22 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं। वेतन भुगतान न होने तक हड़ताल जारी रहेगी। समितियों का ताला सचिव नहीं खोलेंगे।
समिति संचालन के लिए बनाई जा रही वैकल्पिक व्यवस्था
सहकारिता विभाग के आयुक्त एवं निबंधक कुमार प्रशांत ने सचिवों के हड़ताल पर जाने से समिति के प्रभावित हो रहे कार्य के लिए एआर कोऑपरेटिव को पत्र जारी किया है। इसमें डीएम के निर्देश पर दूसरे विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी समिति पर लगाने को कहा गया ताकि खाद वितरण की प्रक्रिया शुरू हो सके।
बोले किसान
0 समिति पर खाद नहीं मिल पा रही है। निजी दुकान से महंगे दाम खाद खरीदनी पड़ रही है। 450 रुपये की एक यूरिया बोरी मिल रही है।
- सचिन यादव, पूरे फौजी
0 फास्फेटिक खाद की बाजार में 1800 रुपये है। समिति में यह 1350 रुपये में मिलती है लेकिन वहां पर ताला लटका है। एक बोरी खाद पर साढ़े चार सौ रुपये ज्यादा देने पड़ रहे हैं। - राम सिंह, भरोखन
0 पांच दिन से समिति पर ताला लटका है। रोज आता हूं और लौट जाता हूं। समिति कब खुलेगी कुछ नहीं पता। खेती पिछड़ जाएगी यही सोचकर निजी दुकान से चार बोरी डीएपी खरीदी। - अजय सिंह, जामताली
0 गेहूं बोआई के लिए समिति पर खाद नहीं मिल रही है। इससे खेती लगातार पिछड़ रही है। निजी दुकानदार महंगे दाम में खाद दे रहे हैं। अफसरों को इसपर लगाम लगानी चाहिए। - राजेश्वरी देवी, जगन्नाथपुर
समितियों पर खाद की उपलब्धता
यूरिया- 2280 मीट्रिक टन
फास्फेटिक- 1531 मीट्रिक टन
समितियों कुल संख्या- 170
निजी दुकानों की कुल संख्या- 635
गेहूं बोआई का रकबा- 1.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल
वर्जन-
समितियों पर खाद वितरण का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। कुछ समितियों पर खाद वितरित की जा रही है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनको समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी। - देवेंद्र वर्मन, एआर कोऑपरेटिव
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जिले में धान फसल की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब गेहूं और आलू के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा किसान सरसों, मटर, चना, जौ की भी खेती करते हैं। यह समय आलू और गेहूं की बोआई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है लेकिन किसानों के सामने खाद का संकट है।
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खाद लेने के लिए समिति पर पहुंचने वाले किसानों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं, कुछ समितियों में खाद मिल रही है। यहां किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। भोर से ही किसान समितियों में पर पहुंच रहे हैं।
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सेवानिवृत्त कर्मियों को भी नहीं मिला वेतन
साधन सहकारी समिति सचिव परिषद के जिलाध्यक्ष निर्भय पांडेय ने बताया कि कई ऐसे कर्मचारी भी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक साल से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कार्यरत कर्मियों का भी वेतन रुका है। इसी की मांग को लेकर कर्मी 22 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं। वेतन भुगतान न होने तक हड़ताल जारी रहेगी। समितियों का ताला सचिव नहीं खोलेंगे।
समिति संचालन के लिए बनाई जा रही वैकल्पिक व्यवस्था
सहकारिता विभाग के आयुक्त एवं निबंधक कुमार प्रशांत ने सचिवों के हड़ताल पर जाने से समिति के प्रभावित हो रहे कार्य के लिए एआर कोऑपरेटिव को पत्र जारी किया है। इसमें डीएम के निर्देश पर दूसरे विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी समिति पर लगाने को कहा गया ताकि खाद वितरण की प्रक्रिया शुरू हो सके।
बोले किसान
0 समिति पर खाद नहीं मिल पा रही है। निजी दुकान से महंगे दाम खाद खरीदनी पड़ रही है। 450 रुपये की एक यूरिया बोरी मिल रही है।
- सचिन यादव, पूरे फौजी
0 फास्फेटिक खाद की बाजार में 1800 रुपये है। समिति में यह 1350 रुपये में मिलती है लेकिन वहां पर ताला लटका है। एक बोरी खाद पर साढ़े चार सौ रुपये ज्यादा देने पड़ रहे हैं। - राम सिंह, भरोखन
0 पांच दिन से समिति पर ताला लटका है। रोज आता हूं और लौट जाता हूं। समिति कब खुलेगी कुछ नहीं पता। खेती पिछड़ जाएगी यही सोचकर निजी दुकान से चार बोरी डीएपी खरीदी। - अजय सिंह, जामताली
0 गेहूं बोआई के लिए समिति पर खाद नहीं मिल रही है। इससे खेती लगातार पिछड़ रही है। निजी दुकानदार महंगे दाम में खाद दे रहे हैं। अफसरों को इसपर लगाम लगानी चाहिए। - राजेश्वरी देवी, जगन्नाथपुर
समितियों पर खाद की उपलब्धता
यूरिया- 2280 मीट्रिक टन
फास्फेटिक- 1531 मीट्रिक टन
समितियों कुल संख्या- 170
निजी दुकानों की कुल संख्या- 635
गेहूं बोआई का रकबा- 1.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल
वर्जन-
समितियों पर खाद वितरण का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। कुछ समितियों पर खाद वितरित की जा रही है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनको समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी। - देवेंद्र वर्मन, एआर कोऑपरेटिव

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद

लालगंज के अझारा में इफको गोदाम पर डीएपी लेने उमड़ी किसानों की भीड़। संवाद