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पांच महीने भटका, तब मिला बेटे का शव
प्रतापगढ़
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:42 PM IST
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pratapgarh
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बेटे का शव पाने के लिए एक परिवार पांच महीने तक भटकता रहा। जिले के अफसरों के साथ ही कैबिनेट मंत्री तक गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर परिवार अपना दर्द लेकर विदेश मंत्रालय में पहुंचा। इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के दखल के बाद दुबई से बेटे का शव शनिवार को उसके घर लाया जा सका। मामला मानिकपुर के लाटतारा गांव में रहने वाले एक परिवार का है। शव मिलने के बाद जिगर के टुकड़े के अंतिम दर्शन की इच्छा तो पूरी हो गई लेकिन घरवालों को इस बात का भी मलाल है कि इस असहनीय ‘दर्द’ को पाने के लिए भी उन्हें महीनों इंतजार करना पड़ा।
मानिकपुर के लाटतारा गांव निवासी पंकज मौर्या पुत्र सूखराम एक कंपनी के माध्यम से नौकरी करने के लिए दुबई गया था। परिवारवालों के मुताबिक वहां से फोन पर पंकज ने बताया कि नौकरी के नाम पर उससे धोखा हुआ। वहां उससे भेड़ चरवाने का काम लिया जा रहा। यहां तक कि खाना भी नहीं दिया जाता था। कुछ दिनों बाद उसका फोन आना भी बंद हो गया। इसके बाद कंपनी की तरफ से फोन कर जानकारी दी गई कि नौ अप्रैल को पंकज की मौत हो गई है।
घरवालों के मुताबिक उन्हें 11 अप्रैल को ये जानकारी दी गई। आरोप है कि बेटे के शव को घर पहुंचाने के लिए उनसे दो लाख रुपये मांगे गए। किसी तरह से रुपये इकट्ठा कर कंपनी के एकाउंट में भेजे गए। हालांकि इसके बाद कंपनी की ओर से न तो कोई जानकारी दी गई। यहां तक कि अफसरों ने फोन भी उठाना बंद कर दिया। घरवालों की मानें तो मामले की शिकायत जिला प्रशासन के अफसरों के साथ ही राज्य मंत्री से भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पिता सुखराम ने विदेश मंत्रालय को मामले की जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद शनिवार को उसका शव घर आया।
मानिकपुर के लाटतारा गांव निवासी पंकज मौर्या पुत्र सूखराम एक कंपनी के माध्यम से नौकरी करने के लिए दुबई गया था। परिवारवालों के मुताबिक वहां से फोन पर पंकज ने बताया कि नौकरी के नाम पर उससे धोखा हुआ। वहां उससे भेड़ चरवाने का काम लिया जा रहा। यहां तक कि खाना भी नहीं दिया जाता था। कुछ दिनों बाद उसका फोन आना भी बंद हो गया। इसके बाद कंपनी की तरफ से फोन कर जानकारी दी गई कि नौ अप्रैल को पंकज की मौत हो गई है।
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घरवालों के मुताबिक उन्हें 11 अप्रैल को ये जानकारी दी गई। आरोप है कि बेटे के शव को घर पहुंचाने के लिए उनसे दो लाख रुपये मांगे गए। किसी तरह से रुपये इकट्ठा कर कंपनी के एकाउंट में भेजे गए। हालांकि इसके बाद कंपनी की ओर से न तो कोई जानकारी दी गई। यहां तक कि अफसरों ने फोन भी उठाना बंद कर दिया। घरवालों की मानें तो मामले की शिकायत जिला प्रशासन के अफसरों के साथ ही राज्य मंत्री से भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पिता सुखराम ने विदेश मंत्रालय को मामले की जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद शनिवार को उसका शव घर आया।
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